कराहल। नईदुनिया न्यूज

एक शिक्षक को दो स्कूलों के प्रिंसीपल के साथ बीआरसी और डीपीसी का भी प्रभार दे रखा है, इससे शिक्षा विभाग के अन्य कर्मचारी नाराज बने हुए हैं। खास बात यह है कि राज्य शिक्षा केन्द्र के इस महत्वपूर्ण पद के लिए शिक्षा विभाग के किसी प्रिंसीपल को चार्ज बजाए दिया जाना था, लेकिन ट्राइवल क्षेत्र के शिक्षक को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आदिम जाति कल्याण विभाग के शिक्षक प्रदीप श्रीवास्तव पर पहले से ही हाईस्कूल बरगवां एवं हाईस्कूल पटौंदा के प्रिंसीपल का प्रभार के साथ-साथ कराहल बीआरसी का भी प्रभार है। इसके बावजूद उन्हें पूरे जिले की शिक्षा विभाग से जुड़े डीपीसी का प्रभार भी दे दिया गया है। अभी तक इस पद पर सामान्य शिक्षा विभाग से ही प्रभारी नियुक्त होते रहे हैं, लेकिन श्रीवास्तव की नियुक्ति ट्राइवल क्षेत्र से इस पद पर कर देने पर कर्मचारियों में नाराजगी है। डीपीसी का प्रभार इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि, सरकार ने अब शिक्षा विभाग में दो जिला अधिकारियों का पद सर्जित कर दिए हैं। डीईओ का काम सिर्फ शैक्षणिक व्यवस्था देखना है जबकि, डीपीसी का काम राज्य शिक्षा केन्द्र के सभी कामों को क्रियान्वयन कराना है। इसमें मध्या- भोजन योजना, गणवेश योजना, मुफ्त साइकिल वितरण योजना, स्कूल भवन, शौचालय आदि निर्माण के साथ-साथ सभी तरह प्रकार के वित्तीय प्रभार डीपीसी के पास रहते हैं। इसलिए यह पद डीईओ से कहीं अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। सेवानिवृत डीईओ वकील सिंह रावत का इस बारे में कहना है कि एक व्यक्ति को चार-चार पदों की जिम्मेदारी दी जा सकती है। कलेक्टर वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के लिए जिम्मेदारी दे सकते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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