श्योपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

जन शिक्षण संस्थान श्योपुर द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छता पखवाड़े के तहत सातवें दिन संस्थान द्वारा वर्मी कम्पोस्ट केंचुआ खाद बनाने के बारे में लोगों को जागरूक किया। संस्थान के कर्मचारियों द्वारा बताया कि वर्मी कम्पोस्ट पोषण प्रदार्थो से भरपूर एक उत्तम जैव उवर्रक है। यह केंचुआ आदि कीड़ों के द्वारा वनस्पतियों व भोजन के कचरे आदि को विघटित करके बनाई जाती है। वर्मी कम्पोस्ट में बदबू नहीं होती है और मक्खी व मच्छर नहीं बढ़ते हैं। वातावरण प्रदूषित नहीं होता है। तापमान नियंत्रित रहने से जीवाणु क्रियाशील तथा सक्रिय रहते हैं। वर्मी कम्पोस्ट डेढ़ से दो माह में तैयार हो जाता है।

संस्थान के निदेशक अजय कुमार सक्सैना ने बताया कि वर्मीकम्पोस्ट बनाने के लिए फार्म व घरों के कूड़े करकट, सूखी पत्तियां व खरपतवार आदि को इकट्ठा करके गड्ढे में क्यारियों में पर्त लगाकर अंधेरे या छांव में डालकर उसमे केंचुओं के स्पान या कोकून को छोड़ देते हैं। ये स्पान बाजार में पैकेट में मिलते हैं। स्पान बढ़कर केंचुए बन जाते हैं और अवयवों को खाकर मिट्टी के रूप में मल त्याग करते हैं। यह ही मल उर्वरक मिट्टी वर्मी कम्पोस्ट कहलाती है। लगभग डेढ़ माह में इस प्रकार से अच्छी खाद तैयार हो जाती है। इसी क्रम में संस्थान के कार्यक्रम अधिकारी आसिफ पठान ने बताया कि अच्छी गुणवत्ता वाला वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए वर्मी बेड़ो में केंचुआ छोड़ने से पूर्व कच्चे माल का आंशिक विच्छेदन, जिसमें 15 से 20 दिन का समय लगता है, इसका पता लगाने के लिए ढेर में गहराई तक हाथ डालने पर गर्मी महसूस नहीं होनी चाहिए। ऐसी स्थिति मे कचरे की नमी की अवस्था में पलटाई करने से आंशिक विच्छेदन हो जाता है। इस अवसर पर सहायक कार्यक्रम अधिकारी कुसुम जादौन, सत्येन्द्र सिंह तोमर, गोविन्द शिवहरे, भरत शर्मा एवं ग्रामीण क्षेत्र के लोग उपस्थित रहे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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