सोंईकलां/श्योपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

कोरोना महामारी के बाद अब श्योपुर में ब्लैक फंगस ने भी दस्तक दे दी है। जिसकी पुष्टि श्योपुर के जिला अस्पताल से राजस्थान के जयपुर के लिए रेफर किए गए पांडोला गांव निवासी 35 वर्षीय मरीज योगेश पुत्र सियाराम सुमन की जांच के बाद हुई है। मरीज की हालत अभी भी नाजुक है। शुक्रवार को जयपुर में जैन अस्पताल के डॉक्टरों ने दूरबीन द्वारा मरीज के ब्लैक फंगस का ऑपरेशन शुरू कर दिया है। ऑपरेशन के बाद इस संक्रमण को खत्म करने के लिए लिपोसमल एम्फोटेरिसिन बी (फॉसोम 50) नाम के 30 इंजेक्शनों की आवश्यकता है, लेकिन राजस्थान में यह इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इस वजह से मरीज के स्वजनों ने मप्र सरकार से अतिशीघ्र यह इंजेक्शन उपलब्ध कराए जाने की गुहार लगाई है।

ब्लैक फंगस से पीड़ित मरीज के भाई शंभूदयाल सुमन ने बताया कि ब्लैक फंगस नाम के संक्रमण में फिलहाल यही एक इंजेक्शन है, जो संक्रमण को 90 फीसद तक खत्म करने में कारगर है। लेकिन राजस्थान में यह इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। शंभूदयाल की मानें तो अस्पतालों में भर्ती मरीजों को उनके राज्यों की सरकारें यह इंजेक्शन उपलब्ध करवा रही हैं। इसके लिए संबंधित मरीज जिस जिले का मूल निवासी होता है। उस जिले के कलेक्टर और सीएमएचओ अपने स्तर पर कार्रवाई करके यह इंजेक्शन मुहैया कराने में मरीजों की मदद करते हैं। उन्होंने श्योपुर कलेक्टर राकेशकुमार श्रीवास्तव और सीएमएचओ डॉ. बीएल यादव उनकी मदद कर शनिवार तक 30 नहीं तो कम से कम पांच-सात इंजेक्शन फिलहाल में उपलब्ध करवा दें ताकि, इंजेक्शन लगने के बाद मरीज के शरीर में इस संक्रमण को हराने की शक्ति बढ़ सके।

11 मई को जिला अस्पताल से किया गया था रेफर :

ब्लैक फंगस से संक्रमित हुए श्योपुर जिले के पहले मरीज योगेश सुमन को जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने पिछले 11 मई को रेफर किया था। स्वजन मरीज को जयपुर के जैन अस्पताल में ले गए। अस्पताल में भर्ती करवाकर उसकी जांचें करवाई तो इस वायरस की पुष्टि ब्लैक फंगस के रूप में वहां के डॉक्टरों ने की। योगेश की तरह श्योपुर में दूसरे मरीजों को भी यह वायरस संक्रमित कर सकता है। इसे देखते हुए आवश्यक है कि, स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह पता लगाने का प्रयास किया जाए कि, योगेश को ब्लैक फंगस का इंफेक्शन कहां से और कैसे हुआ है।

श्योपुर में नहीं ब्लैक फंगस की जांच और इलाज की सुविधा

जिले में भले ही ब्लैक फंगस का पहला मरीज सामने आ चुका है, लेकिन जिला अस्पताल सहित श्योपुर के किसी भी अस्पताल में अभी तक इस संक्रमण की पहचान के लिए जांच की सुविधा नहीं है। फिर इस संक्रमण के इलाज की व्यवस्था होने का तो सवाल ही नहीं उठता। ऐसे हालातों में अगर यहां ब्लैक फंगस का संक्रमण फैलता है, तो मरीजों दूसरे बड़े शहरों के अस्पतालों के लिए रेफर होना पड़ेगा।

वर्जन :

भाई की तबीयत बिगड़ने पर श्योपुर अस्पताल में भर्ती करवाया था, लेकिन वहां से डॉक्टरों ने उसे माधौपुर रेफर कर दिया। माधौपुर के डॉक्टरों ब्लैक फंगस बीमारी बताकर जयपुर भेज दिया, अभी जयपुर में इलाज चल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि एक आंख की रोशनी चली गई है और आज दूरबीन द्वारा वायरस का ऑपरेशन किया जा रहा है।

शंभूदयाल सुमन, मरीज का भाई

हमारे यहां ब्लैक फंगस की जांच व इलाज की सुविधा नहीं है। अभी हमारे यहां इस तरह के किसी मरीज की पुष्टि भी नहीं हुई है। हां इस तरह की चर्चाएं जरूर सुनने में मिली हैं कि, बड़ौदा इलाके के किसी मरीज को इस तरह की दिक्कत है और वह जयपुर में भर्ती है। हमारे यहां अगर इस तरह के केस सामने आते हैं तो हम संबंधित मरीज को इस तरह की सुविधाओं वाले अस्पताल के लिए भिजवा देंगे।

डॉ. आरबी गोयल, सिविल सर्जन

वर्जन :

सिर्फ चर्चाएं सुनने को मिली है कि, पांडोला-बड़ौदा इलाके का कोई मरीज जयपुर में भर्ती है उसे ब्लैक फंगस हो गया है। रही बात इंजेक्शन उपलब्ध कराने की तो अभी तक हमारे पास न तो किसी ने इस तरह की कोई मांग पहुंचाई है और नहीं जानकारी दी है। अगर ऐसी कोई जरूरत होगी तो हम सीएमएचओ से बात करके इंजेक्शन उपलब्ध कराने की हर संभव मदद करेंगे।

रूपेश उपाध्याय, एडीएम श्योपुर

Posted By: Nai Dunia News Network

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