Madhya Pradesh News: मनोज श्रीवास्तव, श्योपुर। महात्मा गांधी सेवाश्रम द्वारा कराहल और बड़ौदा में संचालित 74 बालिका शिक्षा केंद्रों पर तैनात कार्यकर्ता घर-घर में शैक्षिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। इसमें पाठ्य सामग्री के रूप में बच्चियों के आसपास उपलब्ध कंकड़-पत्थरों तथा अन्य वस्तुओं का उपयोग करना सिखाया जाता है। इसके अलावा घरेलू जानवर और उनके बच्चे, 1-20 की गिनती, जोड़ और घटाव, गिट्टी (गिनती के लिए मनके), मिट्टी के बर्तन, पत्थरों के रंग और लकड़ी की सामग्री से बने माडल से जानकारी देते हैं।

कोरोना शुरू होने से केंद्र से जुड़े लोग भी गांवों में नहीं पहुंच पा रहे थे। ऐसे में गांव-गांव में 408 कार्यकर्ता तैयार कर प्रत्येक कार्यकर्ता को पांच-पांच बच्चियों का समूह बनाकर पढ़ाने का जिम्मा दिया गया। जिन बच्चियों को पढ़ाना है वह कभी स्कूल नहीं गईं, इसलिए उन्हें पढ़ाने का तरीका भी बदला गया। वर्तमान में बुढेरा, बेरखेरदा, मदनपुर, सूसरा, बरगवां, हरीपरा, रानीपुरा सहित अन्य गांवों में कक्षा एक-दो केटेगरी में 678 और कक्षा तीन से पांच केटेगरी में 778 बच्चियां पढ़ रही हैं।

खेल-खेल में पढ़ाई

सेवाश्रम के प्रबंधक जयसिंह जादौन बताते हैं किसी भी प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले संस्था मोबाइल के माध्यम से वालंटियर को प्रशिक्षण देती है। वे कार्यकर्ता बालिकाओं के माता-पिता, भाई-बहन या घर के अन्य सदस्यों को प्रोजेक्ट के कार्य समझाकर बालिकाओं की शैक्षिक गतिविधि संचालित करते हैं।

आसपास उपलब्ध पेड़ों की सूची बनाना, गांव में उपलब्ध काम-धंधे, मिट्टी के खिलौने बनाना, घर में उपलब्ध वस्तुओं या अन्य सामग्रियों से गिनती करना सिखाते हैं। कंकड़ के माध्यम से जोड़-घटाव, मिट्टी के बर्तन, पत्थरों के रंग और लकड़ी की सामग्री से बने माडल से उन्हें रंगों की पहचान बताई जाती है। बर्तनों के माध्यम से वजन और माप करना, लंबाई मापने के लिए कदमों/हाथ/पैर/अंगुलियों का प्रयोग आदि तरीकों से ज्ञानवर्धक जानकारी दी जाती है।

दिल्ली से भी निगरानी

गांवों में बच्चियों को कैसे पढ़ाया जाता है, इसके लिए पांच सुपरवाइजर मानीटरिंग करते हैं। सुपरवाइजर जूम, गूगल मीट से प्रतिदिन वॉलंटियरों से चर्चा कर प्रोग्रेस रिपोर्ट लेते हैं। इसके बाद बालिका शिक्षा केंद्र संचालित करने में मदद करने वाली दिल्ली की संस्था इंपैक्ट के रामचंद्र, मुख्य प्रशिक्षक मौसमद्दीन खान, सुनील तिवारी व महात्मा गांधी सेवाश्रम के प्रबंधक जयसिंह जादौन को भेजते हैं।

इनका कहना

महात्मा गांधी सेवाश्रम कराहल व बड़ौदा के 74 गांवों में बालिका शिक्षा केंद्र संचालित कर रहा है। केंद्र के शिक्षक व कार्यकर्ता बालिकाओं को पत्थर-कंकड़ के अलावा आसपास की वस्तुओं से शिक्षा दे रहे हैं। यूटूयूब व इंटरनेट मीडिया से आनलाइन प्रेरक कहानियां भी बताते हैं। केंद्र से जुड़कर करीब 1,500 बच्चियां शिक्षा का लाभ ले रही हैं।

जयसिंह जादौन, प्रबंधक महात्मा गांधी सेवाश्रम श्योपुर

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

NaiDunia Local
NaiDunia Local
 
Show More Tags