हरिओम गौड़, श्योपुर। जिले में स्मैक का नशा अब जानलेवा लाइलाज बीमारियों का कारण भी बनने लगा है। ताजा मामले में एक ही गांव के आठ युवक एचआईवी पॉजीटिव मिले हैं। सभी ने एक ही सिरिंज से नशों में कई दिन तक स्मैक मिलाकर एविल इंजेक्शन के लगाए। जांच में आठों को एड्स की पुष्टि हुई है। डराने वाली बात यह है कि चपेट में आए युवक बड़ौदा तहसील के एक ही गांव के हैं। इस कारण संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही।

स्मैक सेवन का तरीका बदला, जो जानलेवा

दरअसल, स्मैक का नशा और ज्यादा हो इसलिए, स्मैक के सेवन का तरीका अब बदल गया है। अब स्मैक को एविल इंजेक्शन में मिलाकर नशेड़ी अपने हाथ-पांव की नशों में लगा रहे हैं। एविल इंजेक्शन एलर्जी, खुजली, इंफेक्शन व दवाओं के रिएक्शन के मरीजों को लगाया जाता है।

इस इंजेक्शन से स्मैक का नशा कई गुना तेज हो जाता है। आदी युवक एक ही सिरिंज से इंजेक्शन लगाते हैं। श्योपुर, बड़ौदा व चन्द्रपुरा क्षेत्र के अधिकांश मेडिकल स्टोर संचालक स्मैक के आदी लोगों को बिना किसी डॉक्टर की सलाह के एविल इंजेक्शन बेच रहे हैं। अंतर यह है कि 10 रुपए का यह इंजेक्शन मेडिकल संचालक 50 रुपए में नशेड़ियों को बेच रहे हैं।

जेल में शिविर लगा वहां पता लगा

जेल में शिविर लगाकर हमने कैदियों की जांच की थी। वहां स्मैक के एक आदी को जांच में एड्स निकला। उसकी काउंसलिंग में पता चला कि यह एक ही सिरिंज से कई युवक नशे का इंजेक्शन लगाते थे। जो आठ युवक इंजेक्शन लगाते थे उन सभी की जांच की तो आठों एड्स पीड़ित मिले। इनकी काउंसलिंग व इलाज चल रहा है।

चन्द्रशेखर दुबे, एड्स मरीजों के काउंसलर, श्योपुर