श्योपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि। Maha Shivaratri 2020 श्योपुर के छारबाग मोहल्ले का गोविंदेश्वर महादेव मंदिर। यह मंदिर पूरे देश में इकलौता है, जहां शिवलिंग अपनी धुरी पर चक्की की तरह 360 डिग्री घूम जाता है। यहां श्रद्धालु शिवलिंग को घुमाकर मन्नत मांगते हैं। लगभग तीन सदी पुराना यह शिवलिंग देश का दूसरा शिवलिंग है, जो दक्षिणमुखी है। यहां के अलावा महाराष्ट्र के नासिक के शिव मंदिर में भी दक्षिणमुखी शिवलिंग है।

मंदिर के पुजारी पंडित मोहन बिहारी शास्त्री के अनुसार शिवलिंग का मुख नंदी की प्रतिमा की ओर रहता है, लेकिन कोई भी भक्त शिवलिंग को घुमाकर उसका मुख किसी भी दिशा में कर सकता है। इससे भी बड़ा चमत्कार और चौकाने वाला तथ्य यह है कि साल में एक बार यह शिवलिंग अपने आप ही घूमता है।

24 खंभों की छत्री की दूसरी मंजिल पर यह शिवलिंग है। पहली मंजिल पर भगवान गणेश की अद्भुत प्रतिमा है। श्री शास्त्री के अनुसार साल में एक बार रात के समय मंदिर की घंटियां अपने आप बजने लगती हैं।

आरती होती है और शिवलिंग अपने आप घूमने लगता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार दक्षिणमुखी शिवलिंग की पूजा सबसे पहले पांडवों ने की थी, जिसके बाद उनके कष्टों का अंत हुआ था। दक्षिणमुखी शिवलिंग का अभिषेक करने व मृत्युंजय पाठ करने से मौत का खतरा तक टल जाता है। सर्पदोष, पितृदोष व गृहक्लेश से मुक्ति के लिए दक्षिणमुखी शिवलिंग का ही अभिषेक करना सबसे अच्छा व कारगर माना जाता है

1722 में सोलापुर से आया था शिवलिंग

बताया जाता है कि यह मंदिर तो 1100 साल पुराना है, लेकिन इसमें घूमने वाले शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा 300 साल पहले हुई है। श्योपुर के गौड़ वंशीज राजा पुरुषोत्तम दास 1722 में इस इस शिवलिंग को महाराष्ट्र के सोलापुर से लाए थे।

Posted By: Hemant Upadhyay

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