श्योपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। हीरापुर गांव में स्थित तीर के बालाजी मंदिर पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिन सोमवार को कथा वाचक पंडित रिंकू शर्मा ने भक्तों को कथा का रसपान कराते हुए शुकदेव जन्म वर्णन कथा का प्रसंग सुनाया।

नागा संत द्वारा आयोजित कराई जा रही श्रीमद् भागवत कथा में पंड़ित रिंकू शर्मा ने कहा कि, अभिमान करना अच्छी बात नहीं है काम क्रोध लोभ मोह राग द्वेष ईर्ष्या छल-कपट अभिमान छोड़िए। कालिया नाग का प्रसंग का सार बताया। उन्होंने कहा कि कथा सुनने से पाप समाप्त हो जाते हैं। श्रीमद भागवत कथा का श्रवण कर उसे आत्मसात करें। श्रीमद भागवत कथा सुनने से कष्टों का नाश होता है और पुण्य फल की प्राप्ति होती है। हमें सदैव प्रभु का स्मरण करते हुए अपने कर्म करते रहना चाहिए। भगवान पर अटूट विश्वास रखें। परिस्थितियां कैसी भी हो भगवान का स्मरण करते रहें। यदि भक्त किसी परेशानी में होगा भी तो प्रभु अपने भक्त की मदद के लिए तत्पर रहते हैं। संगीतमयी श्रीमद भागवत कथा के दौरान हुए भजनों पर भक्त झूम उठे। उन्होंने कहा कि, भगवान श्रीकृष्ण को इस बात का ज्ञान हुआ कि स्वयं वहां आए और उन्होंने शुकदेव को आश्वासन दिया कि बाहर निकलने पर तुम्हारे ऊपर माया का प्रभाव नहीं पड़ेगा। श्रीकृष्ण से मिले वरदान के बाद ही शुकदेव ने गर्भ से निकल कर जन्म लिया। जन्म लेते ही शुकदेव ने श्रीकृष्ण और अपने पिता-माता को प्रणाम किया और तपस्या के लिए जंगल चले गए। व्यास जी उनके पीछे-पीछे पुत्र, पुत्र कह कर पुकारते रहे, किन्तु शुकदेव ने उस पर कोई ध्यान न दिया। व्यास जी चाहते थे कि शुकदेव श्रीमद्भागवत का ज्ञान प्राप्त करें, किन्तु शुकदेव तो कभी पिता की ओर आते ही नही थे। कथा में बड़ी संख्या में रोजाना भक्तगण कथा श्रवण करने पहुंच रहे हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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