श्योपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)।

चंबल-पार्वती नदी के किनारे बसे 28 गांवों में बचाव के लिए निर्देश पंचायत सचिव एवं पटवारियों को दिए गए हैं। उधर कोटा बैराज के 13 गेट खोले जाने से कई जगह चंबल ओवरफ्लो होकर खेतों में घुस गई हैं। जवासा पुलिया पर पानी होने से कई गांवों का संपर्क लगभग कट गया हैं।

कोटा बैराज के 13 गेट खोलकर 1.70 लाख क्यूसेक पानी चंबल में छोड़ा गया है, जिसे से आवनी- जवास गांव को जोड़ने वाली पुलिया पर पांच फीट पानी हो गया है। पुलिया पर पानी होने से पांच गांव का संर्पक शहर से पूरी तहर कट गया है। उधर पार्वती नदी उफान पर आने से श्योपुर का कोटा, बारां से संर्पक कटा हुआ है।

मालवा, निमाड़ क्षेत्र में हो रही बारिश से जिले में देखने को मिल रहा हैं। चार दिन से लगातार खातौली पुल पर पानी होने से कोटा-श्योपुर आवागमन बंद तो था ही अब जलस्तर खतरे के निशान से भी ऊपर पहुंच गया हैं, जिससे पार्वती के साथ चंबल किनारे के 28 गांव के डूब में आने का संकट बढ़ गया हैं। इस संकट से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी करते हुए पंचायत सचिव व पटवारियों की ड्यूटी ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने व पल-पल की सूचना देने के लिए लगा दी है। पार्वती का जलस्तर बढ़ने से जहां चार दिन से कोटा-श्योपुर मार्ग बंद हैं, वहीं विगत 24 घंटे से कुहांजापुर पुल पर पानी होने की वजह से श्योपुर से बारां का रास्ता भी बंद है। इससे राजस्थान का संपर्क अधिकतर जगहों से टूटा हुआ है।

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खेतों में घुसा चंबल का पानी, 1 हजार बीघा फसल डूबी

कोटा बैराज से 13 गेट खोले जाने से चंबल के जलस्तर काफी बढ़ गया है। चंबल नदी अपनी सीमा से निकलकर खेतों में पहुंच गई है, जिससे किसानों की खेतों में खड़ी फसल जलमग्न हो गई है। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर मौके पर पहुंचे पटवारी और पंचायत सचिव ने ग्रामीणों को सुरक्षित रहने व नदी पर ना जाने की हिदायत दी है। आवनी-जवासा पुल पर पानी होने से ग्रामीण जरूरी काम के लिए जान हथेली पर रखकर पुलिया पार कर शहर व दांतरदा आ रहे हैं। उधर नदियों की सीमाओं को पार कर आवानी, जवासा, टोंगनी, सियापुरा गांव में किसानों के खेतों में चंबल का पानी घुस गया, जिससे सैंकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई है।

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चंबल-पार्वती किनारे बसे गांवों में अलर्ट जारी

चंबल नदी किनारे बसे 28 गांवों के पटवारी एवं पंचायत सचिवों को निर्देशित किया है कि वह गांवों में रहकर बाढ़ की स्थिति की पलपल की जानकारी से अवगत कराते रहे। ग्रामीणों को ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने, भोजन-पानी, बिजली इत्यादि की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। विषम परिस्थिति से निपटने के लिए बाढ़ राहत दल को सतर्क रहने को कहा गया हैं। जिन गांवों में अलर्ट घोषित किया हैं, उनमें जलालपुरा, झोपड़ी, सूंडी, अड़वाड़, छीताखेड़ली, माखनाखेड़ली, मलारना, ईच्छनाखेड़ली, अडूसा, मुदाला का पाड़ा, लहचौड़ा, बनवाड़ा, साड़ा का पाड़ा, सामरसा, ऊंचाखेड़ा, दांतरदाकलां, बिचपुरी, तलावदा, जैनी, जवासा, सिरसौद, टोंगनी, बगदरी, खिरखिरी, बिलोनी, छोलघटा, खैरघटा, दलारना गांव के नाम शिमल हैं।

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कोटा बैराज से छोड़ा 1.70 क्यूसेक पानी

उधर कोटा-बेराज के बुधवार को 13 गेट खोल कर 1.70 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज कर दिया गया है। कोटा बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने से अब चंबल नदी के जल स्तर में भी लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। प्रशासन ने एहतियात पार्वती और चंबल नदियों पर कड़ी चौकसी लगा रखी है। वहीं नदी किनारे बसे गावों में भी लोगों को सचेत रहने को कहा जा रहा है।

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श्योपुर- कोटा चौथे दिन भी रहा बंद

सीजन में पहली बार श्योपुर से बारां को जोड़ने वाले मार्ग पर कुहांजापुर पुल बंद हुआ है। पार्वती नदी उफान आने से श्योपुर- कोटा एवं बड़ौदा-बारां सड़क सम्पर्क पूरी तरह कटा हुआ है। बुधवार को पार्वती नदी का जलस्तर बढ़ने से 3 से 4 फीट पानी होने से चौथे दिन भी श्योपुर- कोटा हाइवे बंद रहा।

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नदी खतरे का निशान जलस्तर

पार्वती 198 मीटर 199.50 मीटर

चंबल 199.50 मीटर 195.76 मीटर

वर्जनः

- कोटा बेराज से पानी छोड़े जाने से चंबल नदी का जलस्तर बढ़ गया है, चंबल किनारे बसे 28 गांवों के पटवारी एवं पंचायत सचिवों को निर्देशित किया है कि वह गांवों में रहकर बाढ़ की स्थिति की पलपल की जानकारी से अवगत कराते रहे। पार्वती नदी का जल स्तर से लगतार बरकार बना हुआ है।

लोकेंद्र सरल

एसडीएम, श्योपुर।

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