श्योपुर। कोरोना संक्रमित होने के बाद जिला अस्पताल में ऑक्सीजन सपोर्ट पर भर्ती कराए गए जनसंपर्क अधिकारी जेपी राठौर के बेटे प्रदीप राठौर सहित जिले भर के 08 मरीजों की शनिवार को इलाज के दौरान मौंत हो गई। मरने बालों में 06 मरीज कोरोना संक्रमित बताए गए हैं। जिनका कोविड गाइड लाइन के तहत नगर पालिका की टीमों के द्वारा शहर के वाहर स्थित शांतिधाम पर अंतिम संस्कार कराया गया है।

जिला जनसंपर्क कार्यालय के पीआरओ जेपी राठौर के बेटे प्रदीप राठौर वर्ष 2018 से जिला जनसंपर्क कार्यालय में शोशल मीडिया हेंडर के पद पर पदस्थ थे। पिछले बुधवार को इनकी अचानक तबियत खराब होने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां जांच में वह कोरोना पॉजिटिव निकले। इसके बाद उनकी हालत दिनों-दिन बिगड़ती रही, पिछले 2 दिनों से वह जिला अस्पताल के आइसीयू वार्ड में वेंटीलेटर पर भर्ती थे। शुक्रवार-शनिवार की रात उनकी तबियत ज्यादा खराब होने पर उन्हें रात भर वेंटीलेटर पर इलाज देने के बाद रेफर करने की तैयारी चल ही रही थी, इसी दौरान उनकी मौंत हो गई। उनके अलावा जिला अस्पताल में भर्ती मरीज गिरजा बाई, जानकी बाई, कविता, अखिलेश, सीताराम, सरोज और सतनाम की मौंत भी शुक्रवार 12 बजे से शनिवार रात पौने 09 बजे तक हो चुकी है। मौतों की घटना के बाद म्रतकों के स्वजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वह जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को कोसते दिखाई दिए।

सिविल सर्जन और सीएमएचओ के कहने पर दिया जा रहा मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर

जिला अस्पताल में इन दिनों जिला प्रशासन के अधिकारी ऑक्सीजन की व्यवस्था संभाले हुए हैं। जिन्होंने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को ऑक्सीजन सिलेंडर वितरण करने की जिम्मेदारी दी हुई है। यह कर्मचारी सिर्फ नर्सिग स्टॉफ की अनदेखी करके सिर्फ सीएमएचओ डॉ बीएल यादव या सिविल सर्जन डॉ. आरबी गोयल के कहने पर ही मरीजों को ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध करवाते हैं। इससे जब भी किसी मरीज को ऑक्सीजन की जरुरत पड़ती है। तब स्टॉफ के लोगों को पहले सिविल सर्जन को सूचना देनी होती है। इसके बाद सिविल सर्जन के कहने पर उन्हें ऑक्सीजन मिलती है। इतनी देर में गंभीर मरीजों की सांसें भी उखड़ सकती हैं। जिसे देखते हुए मरीजों को सांस देने बाली ऑक्सीजन की व्यवस्थाओं में सुधार होना चाहिए।

स्टॉफ की भर्ती करने में फिसड्डी सावित हो रहे अफसर

जिला अस्पताल लंबे समय से डॉक्टर व अन्य स्टॉफ की भारी कमी से जूझ रहा है। मौजूदा हालातों में नर्सिंग स्टॉफ से लेकर कई डॉक्टर भी कोरोना संक्रमित होने की वजह से ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं। इससे अस्पताल में स्टॉफ की और भी ज्यादा कमी खल रही है। ऐसे हालातों में मरीजों को भारी फजीहतों का सामना करना पड़ रहा है और मौजूदा स्टॉफ के लोगों को एक साथ कई अतिरिक्त प्रभार संभालने पड़ रहे हैं। हैरान कर देने बाली बात यह है कि, राज्य सरकारों के द्वारा जिलों के कलेक्टरों को नर्सिंग स्टॉफ की भर्ती किए जाने के अधिकार दे रखे हैं। इसके बावजूद जिला प्रशासन के अफसर कोविड कर्मचारियों की भर्ती नहीं कर पा रहे हैं।

56 मरीज निकले कोरोना पॉजिटिव

शनिवार को जिला अस्पताल, बड़ौदा, कराहल और विजयपुर के सामुदायिक अस्पतालों सहित आइसीएमआर से आइ रिपोर्टों में 56 मरीज कोरोना पॉजिटिव निकले हैं। 11 मरीज इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिए गए हैं। फिलहाल की स्थिति में जिले बर में कोरोना के 707 केश एक्टिव हैं।

ऑक्सीजन किसी भी तरह से वेस्टेज नहीं हो, इसके लिए जिला प्रशासन के अधिकारी हमारा सहयोग कर रहे हैं, ऑक्सीजन मरीजों के लिए ही है, जब भी जरुरत पड़ती है, तब हम उनसे कहकर मरीजों के लिए ऑक्सीजन उपलब्ध करवा देते हैं। 3 मौतों की मुझे जानकारी है, बांकी की जानकारी जानकारी मेरे पास नहीं आई है।

डॉ. आरबी गोयल

सिविल सर्जन जिला अस्पताल।

Posted By: Nai Dunia News Network

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