श्योपुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। अक्षय तृतीया 1 दिन बाद यानी शुक्रवार को है। अक्षय तृतीया को सराफा और कपड़े की ग्राहकी का मुख्य सीजन कहा जाता है। इस दिन सैकड़ों शादियां होती हैं। खासकर श्योपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में। एक महीने पहले ही सराफा से लेकर कपड़ा बाजार में रौनक शुरू हो जाती है और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग ज्वेलरी खरीदने के लिए आते हैं। इससे सराफा बाजार की दुकानों पर दिनभर ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी और जमकर कारोबार होता है। कई लोग तो एक महीने पहले ही अपनी पसंद की ज्वेलरी की बुकिंग करा लेते हैं। 1 दिन बाद 14 मई है और जिले में 4 मई से पूरी तरह से लॉकडाउन है।

यहां बता दें, कि पिछले साल 2020 में 26 अप्रैल को अक्षय तृतीया थी। उस समय लॉकडाउन लगा था। इससे शहर के सराफा कारोबारियों को इस बार अक्षय तृतीया से अधिक उम्मीदें थीं, कि इस साल जमकर कारोबार होगा, जिससे उनकी पिछले साल हुए नुकसान की भरपाई हो जाएगी। लेकिन इस बार भी सराफा बाजार कोरोना संक्रमण के कारण लॉक है। ऐसे में लॉकडाउन से अकेले अक्षय तृतीया का ही 20 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होगा। वहीं दूसरी तरफ दुकान का किराया, बिजली बिल, टैक्स तो देना ही होगा।

सराफा में 8 करोड़ तो कपड़े का 3 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित :

सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष कुंजबिहारी सराफ का कहना है, कि जिले में सराफा की करीब 55 से 60 दुकान हैं। इस बार फसल अच्छी होने के साथ ही लोगों ने फसल बेच भी दी थी। ऐसे में लोगों में सोना-चांदी खरीदने का भी अधिक रूझान था, लेकिन लॉकडाउन ने उनके उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। जिले में इस करीब 8 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। इसी तरह कपड़ा व्यापारी सुरेश बंसल का कहना है,ि कि इस बार करीब 3 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है।

अब लोग वापस मांग रहे हैं एडवांस -

शहर में टेंट और मैरिज गार्डन चलाने वाले राजू का कहना है, कि अधिकांश लोग किराए के मैरिज गार्डनों का संचालन करते हैं। ऐसे में मेंटनेंस खर्च महंगा पड़ रहा है। अक्षय तृतीया के लिए जिन लोगों ने बुकिंग कराई थी, अब वह शादी कैंसिल कर एडवांस मांग रहे हैं, लेकिन हम लोगों से निवेदन कर रहे हैं, कि वह तारीख आगे बढ़ा लें या फिर थोड़ा इंतजार करें। ऐसा लग रहा है कि यह कारोबार अब खत्म हो गया है।

हलवाई से लेकर कर्मचारी तक घर बैठ गए -

हलवाई और केटरिंग संचालक सुरेश वर्मा का कहना है, कि लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराने के लिए प्रशासन ने होटल, लॉज, धर्मशाला और मैरिज गार्डन में शादी करना पूरी तरह से बंद करा दिया है। शादी में महज 10-10 लोगों की अनुमति है। ऐसे में अक्षय तृतीया पर हमने फरवरी महीने में 8 बुकिंग की थी। किसी ने 2 तो किसी ने 5 हजर रुपये एडवांस दिया था। हमने भी कारीगरों को एडवांस दिया था, लेकिन अब सभी बुकिंग कैंसिल हो गई हैं। ऐसे में बड़ी परेशानी हो रही है। जमा-पूंजी से ही घर का खर्च चला रहे हैं।

अक्षय तृतीया की इसलिए है अधिक मान्यता -

पंडित विपिन कृष्ण भारद्वाज ने कहा कि अक्षय तृतीया के मुहूर्त में किसी भी प्रकार का दोष नहीं होता है। इसलिए इस मुहूर्त में अधिक विवाह होते हैं। कोरोना के कारण गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार सहित अन्य कार्यक्रम भी नहीं हो पा रहे हैं। इससे आने वाले समय में पूजन सहित अन्य कार्य कराने वाले पंडितों की भी मुश्किलें भी बढ़ जाएंगी। कर्ज लेने की स्थिति बन जाएगी।

व्यापारियों को यह हो रहा है नुकसान -

- व्यापारियों ने 7 से लेकर 30 हजार रुपये प्रति माह किराए पर दुकानें ले रखी हैं। लॉकडाउन में दुकानें भले ही बंद है, लेकिन किराय तो देना ही होगा।

- हर महीने 2 से लेकर 15 हजार रुपये तक का बिजली बिल जाता है। वह भी देना है।

- दुकानों पर जो कर्मचारी रखे हैं उन्हें भी वेतन देना होगा। साथ ही जीएसटी भी चुकाना है।

वर्जन :

कोरोना के चलते पिछले साल भी लॉकडाउन में कारोबार प्रभावित हुआ था। इस बार अक्षय तृतीया पर अच्छे कारोबार की उम्मीद थी, लेकिन लॉकडाउन फिर से लगने से करीब 7 से 8 करोड़ रुपये तक का कारोबार प्रभावित हुआ है।

कुंजबिहारी सराफ, अध्यक्ष सराफा एसोसिएशन श्योपुर।

Posted By: Nai Dunia News Network

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