श्योपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

बाढ़ ने ऐसी तबाही मचाई की सबकुछ बर्बाद कर दिया। इस तबाही से गांव भी अछूते नहीं रहे। बत्तीसा क्षेत्र में नारायणपुरा गांव का बांध फूटने से बंबौरी, लुहाड़ा, पांडोली, बासौंद गांव मैं सैकड़ों घर पानी में डूब गए। सीप नदी के पानी ने मानपुर चारों तरफ से घेर लिया, जिससे आधे से ज्यादा मानपुर जलमग्न हो गया। सैकड़ों परिवार घरों को छोड़कर अपनी जान बचाकर भागे। मेवाड़ा, बहरावदा, शंकरपुर, कोटरा गांवों में पानी घूसने से सैकड़ों मकान धराशायाी हो गई, कई मवेशाी पानी बह गए जिससे उनकी मौत हो गई। मेवाड़ा गांव में यह स्थिति थी कि, लोगों के घरों में रखा अनाज, पहनने के कपड़े, घर-गृहस्थी का सामान पानी में बह गया। इन गांवों में घरों के सामान से लेकर फसलें पूरी तरह तबाह हो गई। उधर चंबल नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण बुधवार की सुबह सामरसा गांव को खाली कराया गया। लेकिन कई घर नीचे थे उनमें खाली से होने से पहले ही पानी भर गया।

आटा नहीं मिला तो गेंहू उबाल कर बांटे

दुकानों और गोदामों में पानी भरने की वजह सैकड़ों क्विंटल आटा भीगकर खराब हो गया, जिस वजह से दुकानों पर आटा नहीं मिला, प्लांटों पर जो आटा रखा था उसकी बुुधवार को समाजसेवी लोगों ने पीड़ित परिवारों को पूड़ी, सब्जी बनाकर खिला दी। कुछ दुकानों पर जो आटा रखा था उसको नगरपालिका ने उठवाकर मैरिज गार्डन पर रखवा दिया, इस आटे से प्रशासन की तरफ से लोगों को भोजन वितरण किया जाएगा। लेकिन इसके बाद बस्तियों में खाना नहीं बंटा। कई कमालखेड़ली, बस स्टैंड के पीछे आदि इलाकों में छोटे-छोटे बच्चे भूख से बिलख रहे थे। आटा नहीं मिलने के कारण कॉलेज के सामने खाना बांट रहे लोगों ने दूसरे दिन गेहूं को गर्म पानी में उबाल कर लोगों को बांटा। इसके अलावा दुकानों पर आटा नहीं मिलने के कारण कई लोगों को परेशान होते हुए देखा गया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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