श्योपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़े के मामले आए दिन सामने आते रहे हैं। ऐसा ही एक मामला एक साल पहले सरप्लस शिक्षक वाले प्राथमिक स्कूल किला में कर देने का मामला जोरदारी के साथ उठा था लेकिन, तब के अफसरों पूरे मामले को दबा दिया। अब शिकायत सरकार तक पहुंचने के बाद इस मामले में शिक्षा आयुक्त जयश्री कियावत ने संकुल प्रिंसीपल एमएल गर्ग को नोटिस जारी करते हुए 4 वेतनवृद्धि रोकने की चेतावनी दी है।

विगत वर्ष जिले में शिक्षकों के जितने ट्रांसफर हुए हैं, उतने विगत 20 सालों में भी नहीं हुए। ऑनलाइन ट्रांसफर प्रक्रिया के विरुद्ध जिले में अधिकारियों ने लेनदेन कर नियम विरुद्ध ऑफलाइन ट्रांसफर अधिक किए। ट्रांसफरों के इस खेल में सभी अफसरों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों का भी हिस्सा रहा था। अब सरकार बदलने के बाद पूर्व में हुई शिकायतों पर कार्रवाई होने लगी हैं। इसकी बानगी कन्या उमा स्कूल के प्रिंसीपल एमएल गर्ग को शिक्षा आयुक्त द्वारा जारी किया गया नोटिस है। इस नोटिस में जरुरत नहीं होने पर 45 किमी दूर गांव के स्कूल में पढ़ा रही शिक्षिका कनीजा बेगम का ट्रांसफर जिला मुख्यालय स्थित किला परिसर के उस स्कूल में कर दिया, जिसमें पहले से ही शिक्षक सरप्लस थे। कनीजा बेगम का तबादला प्रभारी मंत्री के अनुमोदन पर पूर्व कलेक्टर बसंत कुर्‌रे ने किया लेकिन, अब कार्रवाई के चपेटे में संकुल प्रिंसीपल एमएल को लिया जा रहा है। शिक्षा आयुक्त ने एमएल गर्ग की चार वेतनवृद्धि रोकने की चेतावनी देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

हेडमास्टर के अनुरोध को किया नजरअंदाज

कनीजा बेगम को किला स्कूल में पदस्थ करने के आदेश को अमल में लाने से रोकने के लिए स्कूल के हेडमास्टर ने लिखित आवेदन देकर कम छात्र होने का हवाला दिया था। आवेदन में उल्लेखित था कि, स्कूल में सिर्फ 17 छात्र हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए 4 शिक्षक पहले से मौजूद हैं। आरटीई के नियमों के तहत 35 छात्रों पर एक शिक्षक नियुक्त होता है। इसके बावजूद विभाग ने ले-देकर 45 किमी दूर गांव में पढ़ाने जा रही कनीजा बेगम को नियम कायदें बला-ए-ताक रख स्कूल में पदस्थी करा दी। इससे नाराज शिक्षा आयुक्त ने संकुल प्रिंसीपल को नोटिस जारी किया है।

दो साल पहले भी विरोध के बावजूद भेजा शिक्षक

जिस 17 छात्र-छात्राओं वाले स्कूल में विभाग ने चौथा शिक्षक भेजा है, दो साल पहले भी इसी तरह की मनमानी करते हुए कम छात्र संख्या पर भी एक शिक्षक को पदस्थ कराया था। ग्रामीण क्षेत्र में पढ़ाने जाने वाले इंसाफ मोहम्मद को दो साल पहले इसी तरह इस स्कूल में पदस्थी दी थी। तब भी स्कूल में मौजूद स्टाफ व हेडमास्टर ने छात्र संख्या कम होने एवं शिक्षक अधिक होने का हवाला दिया था। स्थानीय शिक्षा विभाग ने तब भी स्कूल प्रबंधन और नियमों की अनदेखी करते हुए इंसाफ मोहम्मद को जबरदस्ती स्कूल में पदस्थ कराया था। एक साल बाद उसी कृत्य पुनर्रावृत्ति की गई।

वर्जन

- यह तबादला प्रभारी मंत्री के अनुमोदन पर कलेक्टर व जिला शिक्षा अधिकारी ने किया है। तबादला प्रशासनिक तौर पर हुआ है तो मैं इसे रोकने वाला कौन होता हूं। मुझे नोटिस मिला है जो सरासर गलत है। नोटिस के जवाब में भी मैं यही बातें लिखूंगा। इसके बाद भी मेरे खिलाफ कोई कार्रवाई हुई तो मैं कोर्ट जाऊंगा क्योंकि, इसमें मेरी कोई गलती नहीं।

एमएल गर्ग

प्रिंसीपल, कन्या संकुल

फोटो : 10कैप्शन : कन्या उमावि श्योपुर।

Posted By: Nai Dunia News Network

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