- पार्वती नदी के प्रतिबंधित क्षेत्र से हर रोज 60 से 65 ट्रॉली रेत निकाला जा रहा, जिन पर रोकने का जिम्मा वो दे रहे संरक्षण।

श्योपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

श्योपुर में रेत का अवैध कारोबार फिर चरम पर पहुंच गया है। बिना रॉयल्टी और बिना अनुमति के अवैध तरीके से आ रहा यह रेत ढाई से तीन गुना महंगा बिक रहा है। रेत के इन माफियाओं ने घड़ियाल सेंक्चुरी के प्रतिबंधित क्षेत्र से रेत निकालने के लिए कई किसानों की फसलों और खेतों को खोदकर चौपट कर दिया है। घड़ियाल सेंक्चुरी से हो रहे अवैध उत्खनन में सेंक्चुरी के ही मैदानी कर्मचारी और कई अफसरों पर किसानों ने वसूली के आरोप लगाए हैं।

गौरतलब है कि श्योपुर जिले में पार्वती और चंबल नदी किनारों पर भरपूर रेत है लेकिन, यह दोनों नदियां व उनके किनारे घड़ियाल सेंक्चुरी घोषित हैं इसीलिए, यहां से रेत निकाले पर पूरी तरह प्रतिबंध है। लॉकडाउन में यह प्रतिबंध केवल कागजों में सिमट गया है। पार्वती नदी से आमल्दा गांव, अड़वाड़, जलालपुरा आदि क्षेत्रों में रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है। सबसे ज्यादा आमल्दा गांव से हो रहा है जहां हर दिन 60 से 65 ट्रॉली रेत निकाला जा रहा है। रेत का अवैध कारोबार पूरी प्लानिंग से होता है। दिनभर रेत माफियाओं के लोग खातौली तिराहे से लेकर आमल्दा गांव की मुख्य सड़क पर जगह-जगह तैनात रहते हैं। किसी अफसर या पुलिस की गाड़ी आते ही यह नेटवर्क इतनी तेजी से काम करता है कि, चंद मिनटों में रेत के भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली गांव की पगडंडी व खेतों के रास्तों में छिपा दिए जाते हैं। यहां से निकल रहा रेत श्योपुर, बड़ौदा क्षेत्र में सप्लाई हो रहा है। एक ट्रॉली रेत 3200 से 3500 रुपए में बेच रहे हैं जबकि इस पर सरकार को एक पैसे की रायल्टी नहीं मिल रही।

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नदी किनारे की फसलें और खेत खोदे

आमल्दा गांव में पार्वती नदी किनारे कई किसान गर्मी के दिनों में खरबूजा, तरबूज, ककड़ी आदि की फसलें करते हैं। इसके अलावा नदी किनारे के खेतों में मूंग, मक्का, पेंठा आदि की फसलें करते हैं। दबंग रेत माफियाओं ने नदी किनारे हो रहीं फसलों को उजाड़ दिया और किसानों को पीटपीटकर भगा दिया। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को नदी किनारे पहुंचाने के लिए कई जगह चोर रास्ते बनाए हैं इनके लिए कई किसानों के खेत रातोंरात खोद डाले। किसान विरोध करते हैं तो रेत माफिया धमकियां देते हैं। रेत माफियाओं से भयभीत किसानों ने देहात थाने में भी चौकीदार के हाथों आवेदन पहुंचाया, लेकिन पुलिस ने इसे फिलहाल तो गंभीरता से नहीं लिया है।

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सेंक्चुरी अफसर रिश्वत लेकर छोड़ रहे रेत के वाहनों को

चंबल और पार्वती नदी किनारे से रेत के अवैध कारोबार को रोकने का जिम्मा घड़ियाल सेंक्चुरी का है। इसके लिए घड़ियाल सेंक्चुरी ने एक दर्जन से ज्यादा कर्मचारी श्योपुर में तैनात किए हैं, लेकिन यह कर्मचारी रेत माफियाओं पर कार्रवाई कम और उन्हें संरक्षण ज्यादा दे रहे हैं। आमल्दा गांव के किसानों की मानें तो घड़ियाल सेंक्चुरी के गेम रेंज ऑफिसर रेत की एक ट्रॉली से 500 रुपये यानी एक दिन में अगर 60 ट्रॉली रेत निकलता है तो सेंक्चुरी के कर्मचारी 15000 रुपये की वसूली एक दिन में करते हैं। घड़ियाल सेंक्चुरी के अफसरों ने 12 दिन पहले खातौली तिराहे पर बगवाज गांव के एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को रेत ले जाते हुए पकड़ा। इस ट्रैक्टर-ट्रॉली को राजसात करने की कार्रवाई शुरू हुई लेकिन बाद में 15000 रुपये लेकर इसे छोड़ दिया गया।

वर्जन

- घड़ियाल सेंक्चुरी से रेत पर पूरी तरह प्रतिबंध है अगर वहां से रेत निकल रहा है तो गलत है। यदि इस काम में सेंक्चुरी के अमले पर मिलीभगत के आरोप हैं तो पूरे प्रकरण की जांच अलग टीम से कराई जाएगी। मैं एक विशेष टीम भेजूंगा जो औचक रूप से जाकर कार्रवाई करेगी। सेंक्चुरी एरिया से रेत निकालने वाले हर वाहन को सीधे राजसात करेंगे।

पीडी ग्रेवियल

डीएफओ, घड़ियाल सेंक्चुरी

फोटो : 01,02

कैप्शन : आमल्दा गांव में पार्वती नदी किनारे घड़ियाल सेंक्चुरी से रेत निकालते ट्रैक्टर-ट्रॉली।

Posted By: Nai Dunia News Network

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