देवेन्द्र गौड़, सोंईकलां (श्योपुर)। प्रकृति से अगर लेना है तो उसे कुछ देना भी सीखिए। अगर कोई आपदा आए तो सूझबूझ से उसे हल किया जा सकता है। यह सीख श्योपुर जिले के सोंईकलां क्षेत्र के किसानों से ली जा सकती है। छह दिन पहले तक जब बारिश नहीं हो रही थी, तब किसानों ने बोर से जमीन के अंदर से पानी खींचकर धान की फसल की सिंचाई की। अब झमाझम बारिश में यही खेत डूब गए तो इन्हीं बोरों से धरती के अंदर पानी को पहुंचाया जा रहा है। ऐसा एक-दो जगह नहीं हो रहा बल्कि, सोंईकला क्षेत्र के चिमलका, बगडुआ, कांचरमूली, जावदेश्वर और रायपुरा गांव के कई किसान कर रहे हैं।

ऐसे खड़ी हुई समस्या

श्योपुर में बीते चार दिनों तक लगातार बारिश हुई। इस बारिश से खेतों में चार से पांच फीट तक पानी भर गया। इससे सोयाबीन और उड़द की फसल खराब हो गई। धान की फसल भी डूब गई। खेतों में भरा पानी आसपास कहीं भी नहीं निकाला जा सकता, क्योंकि चारों ओर पानी ही पानी है।

निकाला हल: मोटर एक-दो मिनट चालू करके बंद कर देते है

कई गांवों के किसान पानी निकासी की गुहार लेकर कलेक्टोरेट में आ रहे हैं, लेकिन पानी निकासी का रास्ता प्रशासन को भी सूझ रहा। वहीं सोंईकलां क्षेत्र के किसानों ने बोरों के जरिए जमीन के अंदर बरसात का पानी पहुंचाने का बहुत ही आसान तरीका अपनाया। इसके लिए बोर की समर्सिबल मोटर को एक से दो मिनट के लिए चालू करते हैं। बोर से पाइप जोड़कर उसे खेत में भरे पानी के बीच छोड़ देते हैं, फिर बोर की मोटर बंद कर देते हैं। मोटर बंद होते ही बोर का पानी प्रेशर के साथ लौटता है तो वह खेतों के पानी को भी खींचता है। ऐसे करके खेतों का पानी बोरों के जरिए जमीन के अंदर जा रहा है।

आधे से ज्यादा पानी पाइप के जरिए जमीन के अंदर कर रहे

खेतों में इतना पानी भर गया कि धान की फसल पूरी तरह डूब चुकी है। अगर पानी को नहीं निकाला तो पूरी फसल खराब हो जाएगी। आसपास हर जगह पानी है इसलिए बोरों के जरिए पानी को जमीन के अंदर पहुंचा रहे हैं। तीन दिन से मेरे खेत का आधे से ज्यादा पानी पाइप के जरिए जमीन में वापस पहुंच गया।

-कर्मसिंह सरदार, किसान