घोटाले से नाराज समाज सेवी कोरोना काल में नहीं कर रहे गरीबों की मदद, जरूरतमंदों के सामने संकट

फोटो नंबर 5

श्योपुर( नईदुनिया प्रतिनिधि)।

पिछले साल लॉकडाउन के दौरान मजदूर व गरीब परिवारों के लिए निःशुल्क राशन से लेकर खाने के पैकेट और अन्य राहत सामग्री पहुंचाने का बड़े स्तर पर काम करने वाले समाजसेवी इस बार जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। वजह पिछली लॉकडाउन के दौरान जिले के कुछ अधिकारियों ने गरीबों को बांटे गए निःशुल्क राशन व खाना के पैकेटों के फर्जी बिल तैयार करके लाखों रुपये की गड़बड़ी की थी। यह मामला कई दिनों तक सुर्खियों में भी रहा, लेकिन संबंधितों के खिलाफ कोई कार्रवाई तो दूर आला अधिकारियों ने मामले की जांच तक नहीं कराई। इससे नाराज समाजसेवी चाहकर भी किसी मदद नहीं कर रहे हैं।

यहां बता दें, कि पिछली साल समाजसेवी संगठनों ने रोजाना हजारों जरुरतमंदों को खाने के पैकेट से लेकर महीने भर की राशन किट जिसमें तेल, दाल, चावल, मशाला, आटा आदि खाद्य सामग्री बांटी थी। जिले के कुछ अधिकारियों ने उन्हीं खाने के पैकेट व राहत सामग्री को अपने विभाग द्वारा बांटना बताकर लाखों रुपये के फर्जी बिल लगा दिए थे। समाजसेवी संगठनों और अन्य लोगों ने इसका जमकर विरोध भी किया। क्षेत्रीय कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने भी इस मामले में जिला प्रशासन के कुछ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाते हुए मामला विधासनभा में भी उठाया था। जिले के एक आला अधिकारी के दबाव में इस मामले में कोई जांच तक नहीं कराई जा सकी। अब समाजसेवियों को डर है कि, अगर वह फिर से जरुरतमंदों की सेवा के लिए आगे आते हैं। तो वही अधिकारी फिर से फर्जी बिल लगाकर घोटाला कर देंगे।

100 रुपये वसूलकर बांटे 2-2 मास्क :

पिछले लॉकडाउन के दौरान प्रशासन द्वारा आमजन को सैनिटाइजर तो बांटा ही नहीं था और जो 5-7 रुपये में मिलने वाले 2-2 मास्क दिए, उसके एवज में लोगों से 100-100 रुपये जुर्माने के वसूल किए गए, फिर भी उनके नाम पर हजारों रुपये खर्च करना बताया गया था। करीब 80 लाख रुपये मजदूरों को लाने वाली यात्री बसों के डीजल के खर्चे के नाम पर खर्च किए गए।

ऑक्सीजन प्लांट लगाने का फंड फिर भी मांग रहे मदद :

जिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए पीएम केयर फंड से लाखों रुपये की राशि मिल चुकी है। बावजूद भी जिला प्रशासन के कुछ अधिकारी जिले के समाजसेवियों से मदद मांग रहे हैं। समाजसेवियों ने उनकी मदद करने से साफ इनकार कर दिया और कह दिया कि जब इस कार्य के लिए पीएम फंड से पर्याप्त राशि मिल चुकी है। तब उसी कार्य के लिए और मदद क्यों मांगी जा रही है। मदद के नाम पर समाजसेवियों ने जिला अस्पताल में वाटर कूलर लगवा दिया है।

पिछली साल कोरोना काल के दौरान हमने जन सहयोग से खाने के पैकेटों से लेकर राहत सामग्री बांटने का काम किया था। प्रशासन को भी कई कार्यों के लिए राशि मुहैया कराई थी लेकिन, कुछ अधिकारियों ने हमारे द्वारा बांटे गए राशन व खाने के पैकेटों के ही फर्जी बिल लगा कर गडबड़ी कर डाली। ऑक्सीजन प्लांट के लिए पीएम केयर फंड से राशि मिल चुकी है। इसके बावजूद अधिकारी हमसे मदद मांग रहे हैं। हम नहीं चाहते कि, फिर से कोई घोटाला हो, इसलिए हमने उनसे मदद करने के लिए मना कर दिया।

डॉ. विष्णु गर्ग, समाजसेवी एवं जिला महामंत्री वैश्य समाज

पिछली बार हमने और हमारे समाज के अन्य लोगों ने गरीब व असहाय लोगों की काफी मदद की थी लेकिन, पिछली बार जो गडबड़ी होने की चर्चाएं सामने आईं, उसके बाद हमारा मन उस काम के लिए गवाही नहीं दे रहा।

अनिल गोयल, समाजसेवी एवं जिला अध्यक्ष वैश्य महासम्मेलन

इस बार हमारी सरकार ने 3-3 महीने का राशन गरीबी तबके के हर वर्ग को दिया है। इस वजह से ऐसी स्थिति बनी नहीं है, रही बात पिछले बार की गड़बड़ी की तो इस तरह की कोई शिकायत आएगी तो सीएम साहब को अवगत करवाकर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई करवाएंगे।

सुरेंद्रसिंह जाट, जिलाध्यक्ष भाजपा

पिछली साल लॉकडाउन में अधिकारियों ने जमकर घोटाला किया था, पिछली बार कोरोना खत्म हो जाने की वजह से यह मुद्दा शांति हो गया था लेकिन, अब इसकी जांच कराएंगे, अधिकारियों को भ्रष्टाचारी नहीं करने देंगे।

बाबू जंडेल, कांग्रेस विधायक श्योपुर

ऑक्सीजन प्लांट के लिए हमने किसी से कोई मदद नहीं मांगी। पिछली बार भी कोई घोटाला नहीं हुआ। खाने के पैकेटों से लेकर अन्य काम महिला बाल विकास विभाग ने किया था। जो भी आरोप लगा रहा है वह गलत है।

रूपेश उपाध्याय, एडीएम श्योपुर

Posted By: Nai Dunia News Network

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