हरिओम गौड़, श्योपुर। प्रदेशभर के नायब तहसीलदारों को भ्रष्ट-चाटुकार और पूरे सिस्टम को सड़ा हुआ बताकर उससे घिन (नफरत)करने वाली तहसीलदार अमिता सिंह तोमर पर जमीनों के फर्जीवाड़े के संगीन आरोप हैं। यह आरोप जनता ने नहीं बल्कि उन्हीं के वरिष्ठ अफसरों ने जांच के बाद लगाए थे। जमीनों के फर्जीवाड़े में उनके खिलाफ कमिश्नरी में विभागीय जांच भी चल रही है। हालांकि अमिता सिंह इन सभी जांचों को झूठा बताकर खुद को ईमानदार बता रही हैं।

दरअसल 5 साल पहले जब अमिता सिंह कराहल की तहसीलदार थीं, तब उन्होंने कराहल में सरकारी जमीनों को भूमाफिया से लेकर बाहरी लोगों के नाम कर दिया। अमिता सिंह के कारनामों का खुलासा 13 फरवरी 2014 को कराहल के तत्कालीन एसडीएम एचसी कोरकू द्वारा तब के कलेक्टर ज्ञानेश्वर बी पाटील को दी गई एक रिपोर्ट में हुआ। इस रिपोर्ट में कराहल एसडीएम ने अमिता सिंह द्वारा जमीनों के नामांतरण व मालिकाना हक से जुड़ी 61 फाइलों का जिक्र किया था।

इसमें भू-दान, आदिवासी व एससीएसटी वर्ग की विक्रय से वर्जित जमीनों को कलेक्टर की अनुमति बिना दूसरे लोगों के नाम करने के आरोप लगाए। कराहल में बाहरी लोग जमीन नहीं खरीद सकते, लेकिन अमिता सिंह के कार्यकाल में दिल्ली, पंजाब व हरियाणा जैसे प्रांतों के लोगों के नाम जमीन दर्ज हो गई। एसडीएम की इस रिपोर्ट के बाद आरोप पत्र जारी हुए। इसमें अमिता सिंह को दोषी पाते हुए विभागीय जांच बैठी, जिसकी जांच संभाग आयुक्त रेणु तिवारी कर रही हैं।

गौरतलब है कि चार दिन पहले फेसबुक पर पोस्ट करके अमिता सिंह ने नायब तहसीलदारों को भ्रष्ट, प्रशासनिक अकादमी को भ्रष्टाचार व चाटुकारिता की ट्रेनिंग देने वाली संस्था व पूरे सिस्टम को सड़ा हुआ बताकर पोस्ट की थी। इसमें बाद से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया और राजस्व अफसरों के संगठनों ने ही अमिता सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

तब भाजपा ने सीएम के सामने किया अमिता का विरोध

2013 में जब अमिता सिंह कराहल में पदस्थ थीं। तब भाजपा की सरकार थी और सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने ही अमिता सिंह पर सरकारी जमीनों के पट्टे करने, आदिवासियों की जमीन बाहरी लोगों के नाम करने के आरोप लगाए थे। 6 नवंबर 2013 को कराहल में तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान की सभा थी। इस सभा में भाजपा नेता व कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर 'अमिता सिंह को हटाओ, कराहल बचाओ' के नारे लगाए थे। सीएम के सामने हुए प्रदर्शन के बाद ही कलेक्टर पाटील ने अमिता सिंह पर जांच बैठाई थी।

इनका कहना है

मैंने पूर्व कलेक्टर के कहने पर एक कोटवार की अहस्तांतरित जमीन को विक्रय से वर्जित कर दिया था। इस मामले में विभागीय जांच बैठी है। एसडीएम कोरकू की रिपोर्ट झूठी व गलत है। जिन प्रकरणों में मुझ पर आरोप लगाए, उन्हें स्टांप शुल्क न मिलने के कारण मैंने ही निरस्त कर दिया था। अगर मैं ऐसे काम करती तो अब तक नौकरी में नहीं रह पाती। मैं अपना काम ईमानदारी से करती हूं। तीन तहसीलों को मैंने आईएसओ प्रमाण पत्र दिलवाए हैं। अच्छा काम करने पर सिंहस्थ में मुझे सर्वाधिक 6 प्रमाण पत्र सीएम ने दिए थे।

अमिता सिंह तोमर तहसीलदार श्योपुर

Posted By: Hemant Upadhyay