श्योपुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। शासकीय महाविद्यालय की छात्राओं के लिए वर्ष 2011 में 50 सीटर का छात्रावास स्वीकृत किया था। इसके लिए भवन निर्माण कराने में 80 लाख रुपये भी खर्च कर दिए, भवन बनकर तैयार होने के बाद कई सालों तक उपयोग में नहीं आया तो वह जर्जर हो गया जिसकी मरम्मत पर 20 लाख फिर से खर्च कर दिए। लेकिन छात्रावास अभी तक शुरू नहीं हुआ। ये भवन शासकीय पीजी कालेज कैंपस में बना हुआ है। छात्रावास शुरू नहीं होने से गांव से कालेज पढ़ाई करने आने वाली छात्राओं को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। इस सत्र में छात्रावास शुरू होने की उम्मीद थी लेकिन फिर से यह सपना अधूरा रह गया।

उल्लेखनीय है कि, लगभग दस साल पहले 80 लाख रुपये की लागत से 2014 में पीजी कालेज में कन्या छात्रावास भवन बनकर तैयार हो गया था, लेकिन छात्राओं के लिए छात्रावास अभी तक शुरू नहीं हो सका है, अभी तक स्टाफ भी पदस्थ नहीं किया गया है। छात्रावास शुरू नहीं होने से सबसे ज्यादा परेशानी गांवों से पढ़ने आने वाली छात्राओं को होती है, इन छात्राओं को मजबूरी में शहर में किराए से कमरा लेकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। यह छात्रावास इस सत्र जुलाई में शुरू होने की उम्मीद थी। जुलाई में निकलकर अगस्त का आधा महीने बीतने को है, लेकिन अभी तक ऐसे में अभी छात्रावास में स्टाफ भी तैनात नहीं है तो फिर कैसे शुरू हो पाएगा। भवन बनने के आठ साल बाद भी उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेज तैनाती नहीं की है।

बॉक्सः

20 लाख में कराई जा रही मरम्मत

महाविद्यालय प्रबंधन को हैंडओवर होने के बाद भवन जरर होने से अब इस भवन में छात्रावास का संचालन कराने से पहले लगभग 20 लाख रुपए की लागत से मरम्मत कराई जा रही है। जिसका काम भी शुरू हो गया है। पहले छात्रवास भवन में शौचालय के गड्ढे तक नहीं थे, अब गड्ढे खुदवाकर पुट्टी का काम चल रहा है।

बॉक्सः

गांव से रोजना बस से कालेज पढ़ने आती है छात्राएं

बड़ी संख्या में गांव से छात्राएं श्योपुर पीजी कालेज में पढ़ाई करने के लिए आती है। लगभग एक हजार के आसपास छात्राएं कालेज में अध्यनरत हैं, जिनमें से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र की छात्राएं हैं लेकिन छात्रावास की सुविधा नहीं होने से ग्रामीण क्षेत्र की छात्राएं या तो महंगे दामों पर किराए से कमरा लेने को मजबूर हैं या फिर गांव से ही अपडाउन करती हैं। ऐसे में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि छात्राओं द्वारा कई बार कन्या छात्रावास के संचालन की मांग की जा चुकी है।

वर्जनः

- में रोजाना गांव से बस से कालेज पढ़ने आती हूं। पहले कोचिंग पढ़ती हूं फिर कालेज का टाइम होने पर कालेज चली जाती हूं। अकेली को स्वजन किराए से कमरा लेकर भी रखते हैं। इसलिए रोजना गांव से कालेज पढ़ने आना पड़ता है।

सुनीता बैरवा

छात्रा, बीए प्रथम वर्ष

छात्रावास इस सत्र में जुलाई से छात्रावास शुरू होना था, लेकिन अभी कुछ काम बाकी रहा है, जिस वजह से लेट हो गया। इस समय भवन मरम्मत व रंग-पुताई का काम चल रहा है। छात्रावास में आउटसोर्स पर कर्मचारियों रखा जाएगा।

डा. एसडी राठौर

प्राचार्य, शा. महाविद्यालय श्योपुर।

Posted By:

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close