श्योपुर। (नईदुनिया प्रतिनिधि)।

करीब एक माह पहले पार्वती नदी में मिले शव की गुत्थी फिर से उलझ गई है। क्योंकि वह शव सीहोर जिले के तहसीलदार नरेन्द्र सिंह ठाकुर का नहीं निकला। तहसीलदार के बेटे से उसके पिता के शव को पहचाने में चूक हो गई थी। तहसीलदार का शव अब सीवन नदी में ही मिल गया है। इसलिए यह सवाल खड़ा हो गया है कि तहसीलदार के स्वजन जिस शव को तहसीलदार का शव समझकर लेकर गए थे,वह शव आखिर किसका था। बडौदा थाना पुलिस ने भी इस मामले की फाइल को बंद कर दिया था,जिसे पुलिस अब फिर से खोलेगी और शव की शिनाख्ति के प्रयास करेगी।

जानकारी के अनुसार गत 20 अगस्त को बड़ौदा थाना क्षेत्र स्थित पार्वती नदी में एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला था। जो काफी सड़ और गल गया था। पुलिस ने इस शव को लावारिस मानकर दफना दिया था। तभी 24 अगस्त को सीहोर जिले की सीवन नदी में बहे तहसीलदार नरेन्द्र सिंह ठाकुर का बेटा सहित अन्य स्वजन बडौदा पहुंचे, जिन्होंने पार्वती नदी में मिले शव की पहचान कद काठी को देखते हुए तहसीलदार नरेंद्र सिंह ठाकुर के रूप में की। इसके बाद बडौदा पुलिस ने दफन किए शव को बाहर निकालकर तहसीलदार के स्वजनों के सुपुर्द कर दिया। स्वजनों ने शव को सीहोर ले जाकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया।

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लोकेट से हुई मृतक तहसीलदार का शव

गत 10 सितंबर को सीहोर के सेवनिया ग्राम के पास सीवन नदी में एक गड्ढे में शव मिला, जो पूरी तरह से सड़ चुका था। पुलिस ने इस शव को लावारिस समझकर दफना दिया। मृतक के गले में सोने की चेन में ओम वाला लोकेट मिला। जिससे यह कयास लगाए जाने लगे कि यह शव तहसीलदार नरेंद्र सिंह ठाकुर का है। जब इस बात की जानकारी तहसीलदार के परिजनों को लगी तो वे थाने पहुंचे,जहां उन्हें सोने की चेन और शव पर मिला टीशर्ट का टुकड़ा दिखाया गया। सोने की चेन में ओम लिखा लोकेट देखते ही तहसीलदार के बेटे पुष्पेंद्र ने इसकी पुष्टि कर दी। फिर दफन किए गए शव को बाहर निकाला गया। परिजन ने 16 सितंबर को इसका अंतिम संस्कार किया।

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तहसीलदार का शव समझकर अंतिम संस्कार वह आखिर किसका था

खास बात यह है कि, स्वजनों बड़ौदा थाना क्षेत्र के पार्वती नदी में मिले शव की पहचान कर ले गए थे, वह शव तहसीलदार का नहीं निकला। नदी में बहे तहसीलदार का शव एक महीने बाद सीवन नदी में ही मिल गया है। अब सोचने वाली बात यह है कि स्वजन जिस शव की पहचान कर ले गए थे वह आखिर किसा था।

वर्जन-

स्वजनों ने शव की पहचान की थी, तभी हमने शव को तहसीलदार के बेटे के सुपुर्द किया था, यदि वह शव तहसीलदार का नहीं निकला तो इसमें स्वजनों की गलती है, अब हम फिर से उस फाइल को खोलकर शव की शिनाख्त करेगे। अब डीएनए टेस्ट भी कराएंगे।

राजेश शर्मा

थाना प्रभारी बड़ौदा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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