श्योपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

जिला अस्पताल में एक करोड़ रुपये खर्च कर ट्रामा सेंटर बनाया गया था, सात पहले तात्कालीन प्रभारी मंत्री लाल सिंह आर्य ने ट्रामा सेंटर का शुभारंभ किया था। लेकिन डाक्टर और अन्य व्यवस्थाएं आज तक नहीं मिली। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन ने ट्रामा सेंटर में होने वाला उपचार जुगाड़ से शुरू कर दिया है। जिस उद्देश्य से ट्रामा सेंटर भवन का निर्माण कराया गया था वह पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। अब ट्रामा सेंटर भवन में सीटी स्कैन मशीन, एक्सरे जांच, शिफ्ट कर दी गई है, जिससे किसी तरह नवनिर्मित ट्रामा सेंटर की लाज बचाई जा सके। अभी गंभीर मरीजों को कोटा, सवाई माधोपुर या ग्वालियर रेफर किया जा रहा है, अगर सुविधाएं यहां मिल जाए तो इस परेशानी से छुटकारा मिल सकता है।

उल्लेखित है कि, हादसों में गंभीर घायलों को त्वरित इलाज उपलब्ध कराने के लिए भलेही जिला अस्पताल में अलग से ट्रामा सेंटर भवन बन गया है, लेकिन इसके बाद भी गंभीर घायल मरीजों को रैफर को मजबूर होना पड़ रहा है। कारण साफ है कि जहां गंभीर घायलों को इलाज उपलब्ध कराने के लिए ट्रामा सेंटर स्थापित किया गया हैं वहां ना तो डाक्टर हैं और ना ही स्टाफ। जिला अस्पताल प्रबंधन जिस ट्रामा सेंटर को कागजों में संचालित बता रहा है,वह ट्रामा सेंटर बीते सात साल से 11 नम्बर कमरे में चल रहा है। एक करोड़ रुपए खर्च कर ट्रोमा सेंटर बनाया गया है।

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यह चाहिए था स्टाफ

ट्रॉमा सेंटर को संचालित करने के लिए छह डाक्टर की टीम जिसमें दो सर्जिकल स्पेशलिस्ट और दो अस्थिरोग विशेषज्ञ की आवश्यकता थी। इसके अलावा 2 कंपाउंडर, 2 ड्रेसर, 4 स्टाफ नर्स के साथ ही 12 ट्रामा सहायक की पदस्थ किया जाना था। लेकिन अभी तक शासन की ओर से इनकी उपलब्धता नहीं कराई गई है।

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दिल्ली से सामान आने पर सही होगी एक्से मशीन

जिला अस्पताल में लगी डिजिटल एक्सरे मशीन पिछले छह दिनों से खराब पड़ी है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने एक्सरे कक्ष पर दो दिन बाद मशीन के चालू होने का बोर्ड लगा रखा है, लेकिन मशीन छह दिन बीतने के बाद भी चालू नहीं हो सकी है। जिस कारण मरीज एक्सरे कराने को लेकर परेशान हो रहे है। एक्सरे मशीन खराबी की वजह कोई बड़ा तकनीकी फाल्ट बताया जा रहा है। भोपाल से आए इंजीनियरों ने मशीन का जो सामान फाल्ट हुआ है, वह सामान दिल्ली से मंगवाए जाने की बात कहीं है। इसके बाद जिला अस्पताल प्रबंधन ने उस सामान को मंगवाए जाने का आर्डर दे दिया है। अस्पताल प्रबंधन का कहना था कि, सोमवार तक मशीन चालू हो जाएगी, लेकिन अभी तक चालू नहीं हुई है। अस्पताल के एक्सरे कक्ष में प्रतिदिन 30 से 40 के आसपास मरीजों के एक्सरे होते है। हड्डी रोग से संबंधित मरीजों का उपचार डाक्टर द्वारा एक्स-रे रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है, वहीं पुलिस से जुड़े कई मामलो में भी एक्सरे की जरूरत होती है, इसलिए पुलिस भी कई रिपोर्ट दर्ज कराने वाले फरियादी पक्ष के लोगों का एक्सरे करवाती है, लेकिन एक्सरे मशीन खराब होने के कारण न सिर्फ पुलिस परेशान हो रही है, बल्कि कई मरीज भी परेशान हो रहे है

वर्जन

हां अस्पताल में ट्रामा सेंटर बने हुई कई साल हो गए हैं। पर्याप्त स्टाफ नहीं होने की वजह ट्रामा सेंटर शुरू नही हो पाया है। इसलिए इमरजेंसी में अस्पताल के 11 नंबर रूप में ट्रामा सेंटर चल रहा है।

डा. आरबी गोयल

सिविल सर्जन, जिला अस्पताल, श्योपुर

फोटो नंबर-06

कैप्शनः जिला अस्पताल श्योपुर।

Posted By: Nai Dunia News Network

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