कूनो से सटे शिवपुरी क्षेत्र में पर्यटन बोर्ड तलाश रहा संभावनाएं

शिवपुरी (नईदुनिया प्रतिनिधि)। माधव राष्ट्रीय उद्यान में लगभग दो दशक बाद जनवरी में बाघ आना संभावित हैं, इसके साथ ही यहां टाइगर रिजर्व बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। उद्यान के आसपास तीन जगहों पर पर्यटन बोर्ड ने जमीन चिन्हित की है जिस पर पर्यटन संबंधित गतिविधियां शुरू की जाएंगी। टाइगर रिजर्व में आसपास का करीब 800 वर्ग किमी का क्षेत्र बफर जोन रहेगा।

मप्र पर्यटन बोर्ड ने शिवपुरी में गांगुली, माझेड़ा सहित तीन जगह पर जमीन चिन्हित की गई है। पर्यटन बोर्ड ऐसी जमीन भी तलाश कर रहा है जो कूनो के शिवपुरी में आने वाले अहेरा गेट के पास में हो। यहां पर राजस्व विभाग ने चिन्हित की हुई है जिस पर सहराना बनाना प्रस्तावित है। जहां पर्यटकों के लिए सहरिया जनजाति से संबंधित शैली, कृतियां आदि संजोई जाएंगी।

मप्र पर्यटन बोर्ड के उप संचालक सीपी जैन ने बताया कि शिवपुरी के साथ कूनो-पालपुर में संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं और इसका एक गेट शिवपुरी में भी है। इसके आसपास अच्छी जगह देखकर पर्यटन का विकास करना प्राथमिकता में है। जल्द ही यहां आकर जमीन देखेंगे, जिससे आगे की योजना पर काम शुरू किया जाए।

ग्रामीण अंचल के विकास पर खर्च होगी राशि

बाघ आने के बाद यहां की आने वाले पर्यटकों से जो आमदनी होगी उसका 30 प्रतिशत हिस्सा बफर जोन के गांवों के विकास पर खर्च करने की योजना है। राशि समितियों के माध्यम से ग्रामीण अंचल सड़कें, तालाब, सार्वजनिक भवन आदि बनवाने पर खर्च की जाएगी। एक अनुमान के मुताबितक मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्वों की आमदनी 40 करोड़ रुपये तक होती है। ऐसे में माधव राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के ग्रामीण क्षेत्र को विकास के लिए एक अच्छी खासी राशि मिल सकेगी।

इनका कहना है

गाढ़ाघाट का रेस्ट हाउस पर्यटन बोर्ड को दे दिया गया है। वहां पर वे एमिनिटीज विकसित करेंगे। इसके साथ ही अहेरा गेट के पास मड़खेड़ा में भी जमीन आरक्षित कर दी गई है। होम स्टे और फार्म स्टे भी कई तैयार हो चुके हैं। पर्यटन की इन गतिविधियों से जिले की अर्थव्यवस्था को बहुत मदद मिलेगी। इसमें प्रशासन की ओर से हर संभव प्रयास किए जाएंगे और निवेश के इच्छुक लोगों को पूरी मदद दी जाएगी।

- अक्षय कुमार सिंह, कलेक्टर

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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