शिवपुरी (नईदुनिया प्रतिनिधि)।

जिले से 2 नेशनल हाइवे होकर गुजरते हैं जिसके कारण यहां हर दिन हजारों की संख्या में वाहनों का आवागमन होता है। हाइवे और यहां से हर दिन गुजरने वाले हजारों वाहनों की वजह से हादसे भी काफी होते हैं। इसके चलते ब्लैक स्पाट भी काफी बनते हैं। लेकिन पिछले चार सालों में जिले में ब्लैकस्पाट की संख्या में कमी है। जबकि हादसों की संख्या में ऐसी कोई उल्लेखनीय कमी नहीं देखी गई है। वर्ष 2018 तक जिले में कुल 22 ब्लैक स्पाट चिन्हित थे, लेकिन अब इनकी संख्या 12 ही रह गई है। यातायात पुलिस ने विभिन्ना एजेंसियों से सामंजस्य स्थापित कर इनकी संख्या में कटौती की है। लेकिन जो 12 ब्लैकस्पाट बचे हैं वह भी कम खतरनाक नहीं हैं। तीन सालों में यहां एक सैकड़ा से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। अभी भी इन जगहों पर सुरक्षा के उतने पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। सबसे ज्यादा ब्लैक स्पाट नेशनल हाइवे पर ही हैं। नेशनल हाइवे अथारिटी द्वारा इन पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा है जिससे हादसों पर लगाम नहीं लग पा रही है।

यदि आप ईश्वरी रेल्वे पुल या फिर पडौरा चौराहे के पास से गुजर रहे हैं तो खास सावधानी रखने की जरूरत है। इन दो ब्लैकस्पाट पर ही 23 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं सबसे खतरना ब्लैकस्पाट सिरसौद चौराहा है जहां पर तीन साल में 13 लोगों ने अपनी जान गवां दी। इन तीन ब्लैक स्पाट को लेकर यातायात विभाग लगातार काम कर रहा है, लेकिन यहां हादसों में कमी नहीं आई है। अभी भी यह सबसे खतरनाक जगह बने हुए हैं।

एनएच 46 के मुकाबले एनएच 27 ज्यादा खतरनाक

यदि ब्लैक स्पोटों पर हुए हादसों पर नजर डाली जाए तो एनएच 46 हाइवे एनएच 27 के मुकाबले ज्यादा खतरनाक है। यहां ब्लैक स्पाट भी अधिक हैं और होने वाली मौतों की संख्या भी। एनएच 46 हाइवे का निर्णाण एनएच 27 के बाद हुआ है। एनएच 46 शिवपुरी से ग्वालियर की ओर जाता है। वहीं एनएच 27 शिवपुरी को झांसी और उत्तरप्रदेश से जोड़ता है। यहां पर अमोला घाटी, सिरसौद चौराहा जैसे ब्लैकस्पाट आते हैं जिन पर हादसों की संख्या अधिक हैं। पिछले तीन सालों में यहां काफी लोगों की जान गई है।

स्पाट तो आधे घटे, पर हादसों पर नियंत्रण नहीं

ब्लैक स्पाट की संख्या भले ही घटकर आधी रह गई हो, लेकिन हादसों पर अभी नियंत्रण नहीं है। हर साल हादसों की संख्या में मामूली इजाफा ही हो रहा है। बस सुधार इतना हुआ है कि अब एक ही जगह पर लगातार हादसे रिपीट नहीं हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार हादसों में कमी लाने के लिए सड़क निर्माण एजेंसी, परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को साथ में काम करना जरूरी है। लेकिन तीनों एजेंसियों में अभी इतना सामंजस्य दिखाई नहीं देता है जिसके कारण हादसों पर लगाम नहीं है।

तीन साल में पांच से अधिक मौत होने पर बनता है ब्लैक स्पाट

जिस जगह पर तीन साल में अंदर पांच या उससे अधिक मौत हो जाती हैं उस जगह को यातायात पुलिस ब्लैक स्पाट घोषित कर देती है। यहां पर पुलिस संबंधित निर्माण एजेंसी को हादसे रोकने के उपाय करने के संबंध में पत्राचार करती है। यदि किसी जगह पर घुमावदार मोड होता है तो उसे सीधा कर दिया जाता है। जब बनावट में बदलाव नहीं किया जा सकता है तो वहां पर स्पीड ब्रेकर, साइन बोर्ड और जागरूकता के बैनर लगाकर लोगों को जगह के खतरनाक होने संबंधी जानकारी दी जाती है। ब्लैक स्पाट 500 मीटर के क्षेत्र में बनता है।

यह हैं 12 ब्लैक स्पाट जहां गई सबसे ज्यादा जानें

ब्लैक स्पाट ------- हादसे --------- मौत

पिपरसमा चौराहा --------- 8---------8

खूबत घाटी--------------13---------7

ईश्वरी रेल्वे पुल---------------13-------11

गांधी पेट्रोल पंप से पडौरा चौराहा----------21---------12

देहरदा गांव से देहरदा चौराहा------------13-----6

शिवपुरी लिंक रोड करई डाडा---------9------------5

अमोला घाटी फोरलेन-------------11---------6

सिरसौद चौराहा----------12--------13

मुगांवली तिराहा--------------7----------5

अशोक होटल--------5--------3

आवास मोड ------------7-------------5

सिकंदरा बैरियर--------5------------5

इनका कहना है...

2018 के मुकाबले में अब ब्लैकस्पाट कम हुए हैं। इनकी संख्या 22 से घटकर 12 हो गई है। 10 ब्लैकस्पाट घटाने में हमें सफलता मिली है। जो शेष 12 जगह बची हैं वहां पर सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए गए हैं। कोशिश है कि जल्द ही इन ब्लैक स्पाट को भी खत्म किया जाए और हादसों में कमी लाए जाए।

- रणवीर सिंह यादव, यातायात प्रभारी

Posted By: Nai Dunia News Network

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