शिवपुरी। नईदुनिया प्रतिनिधि

माधव राष्ट्रीय उद्यान में टाइगर को बसाने की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। इसके लिए वन्य जीवों की दोबारा से गणना भी की जा रही है। गणना के लिए एक वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट पार्क में करीब 40 कैमरे लगाए हैं। इन कैमरों में जानवर तो कैद हो ही रहे हैं, साथ ही पार्क में अनाधिकृत रूप से प्रवेश करने वाले लोग भी नजर आ रहे हैं। पिछले माह इन लोगों ने कुछ कैमरों को तोड़ दिया था। दो मामलों में पार्क प्रबंधन की ओर से देहात थाने में एफआइआर के लिए आवेदन दिया गया था जिस पर देहात थाना पुलिस ने मामला भी दर्ज कर लिया है। लेकिन इस घटनाक्रम से पार्क और टाइगर की सुरक्षा सवालों के घेरे में आ रही है। अब इससे निपटने के लिए पार्क प्रबंधन अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रहा है। पार्क में घुसने वालों की सूचना देने वालों को इनाम देने की घोषणा भी की जा चुकी है। इससे बचने के लिए फेंसिंग का विकल्प है जो लंबा काम है। फिलहाल प्रबंधन कोशिश में जुटा है कि किसी भी तरह से पार्क में अनाधिकृत रूप से घुसने वालों को जेल भिजवा दिया जाए जिससे एक कड़ा संदेश जाए और टाइगर की राह में यह बाधा न बनें। इसके अलावा एक बड़ी बाधा मुआवजा लेकर न हटने वाले बने हुए हैं और प्रबंधन ने उनके लिए भी रणनीति बना ली है। वहीं जल्द ही नेशनल पार्क में फेंसिंग का काम भी शुरू होगा। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की मंशा है कि पूरे पार्क की फेंसिंग कराई जाए जो करीब 300 किमी है। हालांकि इसमें खर्च भी बहुत है क्योंकि एक किमी की फेंसिंग एक करोड़ रुपये की पड़ती है। सूत्रों की मानें तो शुरुआत में करीब 30 प्रतिशत एरिया में ही फेंसिंग कराई जाएगी जो टाइगर का क्षेत्र रहेगा। इससे बिना अनुमति यहां कोई प्रवेश भी नहीं कर पाएगा।

देहात थाने में दर्ज हुई एफआइआर

देहात थाना प्रभारी विकास यादव के अनुसार पार्क में बिना अनुमति प्रवेश करने और प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने के दो आवेदन प्राप्त हुए थे। इनकी जांचकर इस मामले में एफआइआर दर्ज कर दी गई है। कैमरे में दिखे बदमाशों के हुलिए के आधार पर उनकी तलाश की जा रही है और उन्हें जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।

मुआवजा लेकर न हटने वालों पर फोकस, जिन्होंने नहीं लिया उन पर बाद में फैसला

यहां पर करीब 400 परिवार रिजर्व फॉरेस्ट में थे जिनमें से अधिकांश ने मुआवजा ले लिया है, लेकिन जमीन नहीं छोड़ी है। पिछले दो-तीन महीनों में काफी हद तक अधिकारियों ने जमीन मुक्त करा ली है, लेकिन अब भी थोड़ी कसर बाकी है। इसके लिए अब प्रबंधन उन लोगों को फिलहाल छोड़ दिया है जिन्होंने मुआवजा नहीं लिया है। प्राथमिकतौर पर उन्हें हटाया जा रहा है जो मुआवजा लेने के बाद भी नहीं हटे हैं। इसके लिए उनकी जमीनों को जोत दिया गया है। यहां पर जानवरों के लिए चारागाह बनाया जा रहा है जिससे जमीन भी मुक्त हो जाए और पशुओं का चारागाह भी बन जाए।

जल्द सामने आएगी गणना, पता चलेगी भोजन की उपलब्धता

वन्य जीवों की गणना कराने के पीछे उद्देश्य है कि यह पता चल सके कि टाइगर को पर्याप्त भोजन मिलेगा या नहीं। यह काम ड्ब्ल्यूडब्ल्यूएफ संस्था कर रही है। शुरुआत में 20 दिनों के लिए कैमरा ट्रैपिंग की गई थी, लेकिन अब इसे बढ़ा दिया गया है। कई ऐसे वन्य जीव भी कैमरे में कैद हुए हैं जो अब तक नेशनल पार्क में देखे ही नहीं गए। साथ ही कई बार तेंदुए भी कैमरों के सामने देखे जा चुके हैं। संस्था कुछ दिन और ट्रैपिंग कर रिपोर्ट तैयार करेगी जो दिल्ली भेजी जाएगी। एनटीसीए के लिए यह रिपोर्ट बहुत महत्वपूर्ण है। इसके बाद वहां के अधिकारी शिवपुरी आएंगे और टाइगर आने का रास्ता पूरा साफ हो जाएगा।

इनका कहना है

कई बाहरी लोग बिना अनुमति लिए पार्क में प्रवेश करते हुए कैमरे में दिखे हैं। कुछ लोगों ने कैमरों को भी नुकसान पहुंचाया है। इनकी पहचान बताने और पकड़वाने वालों को इनाम दिया जाएगा और उनका नाम भी गोपनीय रखा जाएगा।

- अनिल सोनी,उपसंचालक माधव राष्ट्रीय उद्यान

Posted By: Nai Dunia News Network

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