जिला अस्पताल में भर्ती टिं्‌वकल ने कहा- हम दब गए, हाथ और मुंह था बाहर, बचाने लगाई आवाज तो ऊदल ने निकाला

बैराड़। नईदुनिया न्यूज

ग्राम मारोरा खालसा में पार्वती नदी से अवैध रेत खनन करते समय सोमवार को एक ही परिवार के 4 सदस्यों की टीला धसकने से हुई मौत और दो के घायल हो जाने के मामले ने अवैध रेत खनन पर एक बार फिर कई सवाल खडे कर दिए हैं। मारोरा खालसा में हादसे के बाद गम का माहौल छा गया है। बीते 3 साल के भीतर बैराड़ में ही रेत की एक भी खदान स्वीकृत ना होने के वाबजूद रेत खनन करते अब तक 9 लोग काल के गाल में समा चुके हैं। इधर हादसे में घायल होकर जिला अस्पताल के ट्रॉमा में भर्ती अभिषेक व टिंवकल ने कहा कि वे आज जब खदान पर गए तभी वह धसक गई। हम सब उसमें दब गए हमारे दोनों के हाथ व मुंह बाहर रह गए, हमने जोर जोर से मदद के लिए पुकारा, लेकिन लोग निकलते रहे बाद में सरपंच नरेश धाकड़ का बेटा ऊदल ने मौके पर आकर हमको बाहर निकाला। उसी ने अन्य लोगों को भी बाहर निकाला, लेकिन तब तक हमारे भाईयों की मौत हो गई।

प्रशासन जुटा पर्देदारी में

प्रशासन मामले की पर्देदारी में जुट गया है। अधिकारी इसे रेत से नहीं बल्कि मिटटी का टीला धसकने से मौत होना करार दे रहे हैं, जबकि मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि हर दिन पार्वती के घाट पर रेत का खनन किया जाता है। नदी के विशाल फैलाव के कई हिस्सों से रेत निकाली जाती है। आज के हादसे को लेकर मारोरा खालसा के सरपंच नरेश धाकड़ और उनके बेटे ऊदल ने साफ कहा कि रेत निकाले जाने के दौरान हादसा पेश आया।

मां त्रिवेणी बोली- रोका था मत जाओ रेत लेने, लेकिन नहीं माने

जिस परिवार के सदस्यों की मौत हुई, उस परिवार की महिला त्रिवेणी ने अपने दो बेटे सुदामा गोस्वामी 20, निवास गोस्वामी को हमेशा के लिए खो दिया है, जबकि टिंकल पुत्र सरवन गोस्वामी का इलाज किया जा रहा है। हादसे के बाद मां त्रिवेण्ी का रो रोकर बुरा हाल था। वह हादसे के बाद विलाप करती नजर आई उसका कहना था कि उसने इन सभी को रेत लेने जाने से रोका था। कहा था कि रेत का खनन करने नहीं जाना, लेकिन किसी ने सुनी नहीं और जान से हाथ धो बैठे। उसका कहना था कि उसके दो लाल जान से हाथ धो बैठे अब उसका क्या होगा।

बिखरी पड़ी नजर आई लाशें, लोग देखने जुटे

हादसा जिस टीले पर हुआ वो नदी के ऊपरी हिस्से में है, जैसे ही खदान धसकी उसके बाद मौके पर लाश बिखरी नजर आई। उनमें घायल भी मौके पर पडे रहे बाद में एंबूलेंस से घायलों और मृतकों को ट्राली के माध्यम से अस्पताल भेजा गया। हादसे के दौरान मौके पर भारी भीड जमा हो गई थी। पुलिस और पोहरी एसडीएम मौके पर जा पहुंचे थे।

जिले भर में अवैध उत्खनन का खूनी खेल

जिले भर में रेत के अवैध उत्खनन का खूनी खेल खेला जा रहा है। जिले में स्वीकृत खदान केवल तीन हैं, लेकिन जिले के सभी हिस्से में रेत का अवैध करोबार जारी है। बैराड़, कोलारस से लेकर पिछोर, खनियाधााना और सबसे ज्यादा करैरा के इलाके रेत खनन के गढ़ बने हुए हैं। वन भूमि से भी रेत निकाली जा रही है। पुलिस से लेकर खनिज महकमा तमाशबीन बना हुआ है।

बैराड़ के इन इलाकों में हो रहा खनन

बैराड़ की पार्वती नदी पर शासन द्वारा कोई भी रेत की खदान स्वीकृत नहीं हैं। बावजूद इसके यहां पर पार्वती नदी के फुलीपुरा, खरई, ऐंचवाड़ा, रायपुर, हर्रई, सांपरवाड़ा, ऊंची बरौद, बगौदा और गुरिच्छा के घाटों से रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। यहां पर जेसीबी मशीन या पनडुब्बी से नहीं, बल्कि मजदूरों के जरिए रेत का अवैध उत्खनन किया जाता है और ट्रैक्टर ट्रॉलियों से प्रतिदिन करीब 200 ट्रॉली रेत निकालकर बाजारों में खपाई जा रही है। यहां पर एक ट्रॉली रेत छनी हुई 2000 रुपए तो बिना छनी हुई रेत के 1500 रुपए तक के दाम पर बेचा जा रहा है। अवैध रेत निकालने के चलते यहां कई बार मजदूर दब जाते हैं और उनकी मौत हो जाती है। बावजूद इसके अवैध रेत का यह कारोबार मजदूरों की जान से खिलवाड़ कर जारी है।

मजदूर निकालते हैं 200 से 300 रुपए ट्राली में रेत

बैराड़ इलाके में रेत को जेसीबी या पनडुब्बी की मदद से नहीं बल्कि मजदूरों के जरिए निकाला जाता है और वह भी महज 200 से 300 रुपए ट्रोली के हिसाब से मजदूरों को भुगतान दिया जाता है और एक से डेढ़ घंटे में एक ट्रोली को रेत से भर दिया जाता है। बैराड़ के इन घाटो पर ट्रेक्टर ट्रोलियों में रेत भरने का काम मजदूर करते हैं। जिससे आए दिन हादसे घटित होते हैं और मजदूरों को अपनी जान तक गंवानी पड़ती है।

थाने और तहसील के सामने से रोज निकलते हैं ट्रेक्टर

थाने और तहसील के सामने से हर रोज 100 से 150 ट्रेक्टर ट्रोली रेत निकलती है लेकिन पुलिस और न ही राजस्व अमला इन पर कार्रवाई करता है। यहीं कारण है कि रेत का यह अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है और कार्रवाई न होने से रेत के कारोबारी इसे बढ़ाते जा रहे हैं।

खनियांधाना, करैरा व नरवर में भी हो चुकी हैं मौतें

रेत के अवैध कारोबार के चलते खनियाधाना, करैरा और नरवर मे भी मौतें हो चुकी है। जब भी हादसे घटित होते हैं तब पुलिस और प्रशासन थोड़ी सख्ती बरतता है लेकिन कुछ समय बाद यह कारोबार फिर से चलने लगता है। लोगों का कहना है किप्रशासन को रेत के इस अवैध कारोबार पर अंकुश लगना चाहिए।

खनिज विभाग नहीं कर रहा कार्रवाई

रेत के अवैध उत्खनन को लेकर खनिज विभाग को कार्रवाई करना चाहिए लेकिन खनिज विभाग का कहना है कि उनके पास स्टाफ की कमी है जिसके चलते वे पुलिस और राजस्व अमले की मदद लेकर कार्रवाई कर रहे हैं। इधर लोगों का कहना है कि खनिज विभाग को रेत के अवैध उत्खनन पर प्रभावी कार्रवाई करना चाहिए जिससे लोगों की जान न जाए।

यह हादसे हुए अब तक

18 अप्रैल 2018 को ग्राम सेगाड़ा में सोनीपुरा निवासी सूरज और राजेन्द्र आदिवासी की रेत खदान धसकने और उसमें दबने से मौत हो गई थी। ये लोग रात के समय रेत निकाल रहे थे उस दौरान रेत का टीला धसक गया और ये दोनों उस टीले के नीचे दब गए जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों के शवों को बाहर निकाला गया।

16 अप्रैल 2017 को ग्राम आंकुर्सी के पास से निकली पार्वती नदी के किनारे वीरेन्द्र पुत्र चिरौंजी आदिवासी रेत निकाल रहा था उसी दौरान रेत का टीला धसक गया और वह उसके नीचे दब गया जिससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद आनन फानन में पुलिस को सूचना दी गई जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को निकाला गया।

19 मई 2017 को बरौद गांव के पास पार्वती नदी से रेत निकाल रहे नेपाल धाकड़ व दौलतराम धाकड़ की रेत के टीले के नीचे दबने से मौत हो गई थी। यह दोनों अपना मकान बनाने के लिए रेत निकालने के लिए गए थे और अचानक से टीला धसक गया जिससे इन दोनों की मौत हो गई।

यह बोले एसडीओपी

पोहरी इलाके में आज जो हादसा हुआ वो घर बनाने के लिए मिटटी लेने जाने के दौरान हुआ। मौके पर मौजूद लोगों ने इन मासूमों को रोका भी था कि मिटटी धसक जाएगी लेकिन वे माने नहीं। छह में से चार की मौत हो गई है।

राकेश व्यास, एसडीओपी पोहरी।

23 कैप्शन-हादसे के बाद एंबुलेंस में घायलों जबकि मृतकों को ट्रॉली में ले जाया गया।

24 कैप्शन- ग्राम मारोरा खालसा में पार्वती नदी से अवैध रूप से रेत का खनन करते मौके पर ही तीन की मौत के बाद जमा लोग।

Posted By: Nai Dunia News Network