भागवत कथा सुनने उमड़ रहे हैं श्रद्धालु

खनियांधाना। नईदुनिया न्यूज

नगर में भक्ति व आस्था के केंद्र धंधोरा मंदिर पर पं. हरीशंकर पांडेय के सानिध्य में इन दिनों सप्त दिवसीय भागवत कथा तथा सप्तचंडी पाठ का संगीतमय आयोजन चल रहा है। इसमें मुख्य कथावाचक साध्वी शैल किशोरी वृंदावन में मुख से कथा सुनकर भक्तगण प्रभु भक्ति में तल्लीन हो रहे हैं। वृंदावन से आई कलाकारों की टीम का सुंदर नृत्य तथा प्रस्तुतीकरण देखकर भी उपस्थित श्रोता कृष्ण भक्ति में ऐसे लीन हो जाते हैं कि अपने आप को नृत्य करने से नहीं रोक पा रहे हैं। कथा के मुख्य भागवत पारीक्षत बनने का सौभाग्य कुलदीप सिंह बुंदेला को मिला है। आयोजन कर्ता में नरेंद्र पुष्पत, रामवीर सिंह, सुंदर पाल यादव, प्रदीप राजा, अंकुर राजा, रामपाल सिंह व सत्येंद्र सिंह चौहान यजमान की भूमिका में जुड़े हुए हैं। कार्यक्रम 6 दिसंबर तक चलेगा। अंतिम दिन हवन तथा पूर्णाहुति के बाद कन्या भोज का आयोजन किया जाएगा।

श्रीधाम वृंदावन से आई देवी शैल किशोरी के मुखारबिंदु से श्रीमद् भागवत सप्ताह भक्ति ज्ञान यज्ञ के छठवें दिवस में बुधवार को रास पंचाध्याई का वर्णन किया गया। इसमें भगवान भोलेनाथ गोपी का भेष बनाकर श्री वृंदावन रास में प्रवेश करते हैं। निरंतर वृंदावन में बात करने का संकल्प किया। कथा में आगे बताया कि भगवान वृंदावन को छोड़कर मथुरा में जाकर कंस आदि राक्षसों का संहार किया। गुरुदेव ने भगवान के पास में जाकर अल्पकाल में विद्या अध्ययन किया। जरासंध आदि राक्षसों को 18 बार परास्त कर द्वारिका में जाकर विवाह किया।

वृंदावन के रासलीला कलाकारों ने किया नृत्य

धंधोरा मंदिर में चल रही कथा के मध्य में बृज कलाकारों के द्वारा बृज बिहारी बांके बिहारी लाल की शौर्य का दर्शन कराया गया, जिसमें ऐसा वर्णन है कि बरसाने की मोर कुटी पर एक बार राधा रानी ने मोर नृत्य का दर्शन करने के लिए गई थी। किसी कारणवश उस दिन कोई मोर नहीं थे। भगवान कृष्ण ने स्वयं मोर बनके राधा रानी को नृत्य दिखाया। इस अवसर पर बाहर से आए कलाकारों द्वारा आकर्षक मोर नृत्य को देखकर जनता जनार्दन भगवान कृष्ण की पराकाष्ठा भक्ति में सराबोर हुई। भक्तगण भी जमकर थिरके।

2, 3 कैप्शन : कथा में मौजूद श्रद्धालु व कथा का वाचन करते हुए साध्वी शैल किशोरी।

Posted By: Nai Dunia News Network