- सीएसी, बीएसी के पद पर प्रतिनियुक्ति काउंसलिंग में वरिष्ठता सूची विसंगतियों भरी, करनी पड़ी प्रक्रिया स्थगित

- पहले से विवादों में चल रहे तबादला मामले से भी नहीं लिया सबक

- जिले भर से आए 400 शिक्षकों को लौटना पडा बैरंग

शिवपुरी। नईदुनिया प्रतिनिधि

शिवपुरी विकासखंड में तमाम रिक्त पद होने के बावजूद महिला शिक्षिकाओं को ब्लॉक से बाहर जंगल के स्कूलों में पदस्थ करने का मामला अभी सुर्खियों में बना हुआ है कि शिक्षा विभाग के गले की फांस बना हुआ है। बावजूद इसके विभाग सबक नहीं ले रहा। बुधवार को डाइट में सर्व शिक्षा अभियान के तहत विभिन्न विकासखंडों में 99 सीएसी (क्लस्टर अकादमिक समन्वयक) व 23 बीएसी (विकासखंड अकादमिक समन्वयक) के पदों पर माध्यमिक शिक्षकों, शिक्षकों व अध्यापकों की प्रतिनियुक्ति के लिए काउंसलिंग आयोजित की गई थी।

जिलेभर से 400 से अधिक शिक्षक सुबह 10 बजे ही डाईट पहुंच गए, अधिकारियों ने काउंसलिंग की तैयारी भी कर ली, लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा 1317 शिक्षकों की वरिष्ठता सूची जैसे ही सामने आई तो एक दो नहीं, बल्कि सैकड़ों विसंगतियां इस सूची में खुलकर सामने आ गईं। संकुलों के माध्यम से विभाग की स्थापना शाखा द्वारा तैयार की गई इस सूची में लापरवाही का आलम यह था कि एक शिक्षक दिनकर नीखरा का जन्म 2010 का बताया गया, जबकि नियुक्ति 2001 की है। यानि शिक्षक जन्म से पहले ही विभाग में नौकरी कर रहा है। ऐसी ही तमाम विसंगतियां इस सूची में आई तो काउंसलिंग कमेटी में शामिल कलेक्टर प्रतिनिधि व जिला पंचायत के परियोजना अधिकारी केके शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी अजय कटियार, डीपीसी डीआर कर्ण एसपीसी अकेडमिक अशोक जैन, एपीसी जेंडर वत्सराज राठौर सहित अन्य अधिकारी भी सकते में आ गए। आनन-फानन में 4 व 5 दिसंबर को निरधारित की गई काउंसलिंग प्रक्रिया रद्द कर दी। डीपीसी ने बताया कि विसंगतिपूर्ण सूची दावे आपत्ति के बाद 5 दिन में अपडेट कराई जाएगी। उसके बाद नए सिरे से काउंसलिंग की तारीख तय की जाएगी। यदि समय रहते यह कदम नहीं उठाया जाता और काउंसलिंग कर दी जाती तो एक और लापरवाही पूर्ण प्रक्रिया विवादों के केंद्र में आ जाती। काउंसलिंग निरस्त होने के बाद 400 शिक्षकों को बैरंग लौटना पड़ा।

न वरिष्ठता का क्रम, न नियुक्ति दिनांक सही

सुबह करीब 11ः30 बजे जैसे ही डाइट परिसर में सूची चस्पा की गई तो उसमें शिक्षकों की वरिष्ठता का क्रम ही पूरी तरह गड़बड़ाया हुआ था। जूनियर शिक्षकों को ऊपर और सीनियर शिक्षकों के नाम नीचे थे। जन्म तिथि से लेकर तमाम अन्य जानकारी भी विसंगतिपूर्ण थीं। सर्व शिक्षा अभियान के अधिकारियों का कहना था कि उन्होंने काउंसलिंग के लिए सूची जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से मंगाई थी। सूची वहीं पर संकुलों से जानकारी के अनुसार तैयार कराई गई है। इसलिए उन्हें भी इन खामियों की जानकारी आज सूची देखने के बाद ही पता चली है।

हाईस्कूल, हायर सेकंडरी में पदस्थ शिक्षकों के नाम नदारद

सूची में विसंगति सिर्फ गलत जानकारी तक ही सीमित नहीं थी। 1317 शिक्षकों की इस वरिष्ठता सूची में जिले के तमाम हाईस्कूल व हायर सेकंडरी स्कूलों में पदस्थ करीब 300 माध्यमिक शिक्षकों व शिक्षकों के नाम ही शामिल नहीं थे, जबकि काउंसलिंग में उन्हें भी बुलाया गया था। मौके पर इन स्कूलों के कई शिक्षक वहां पहुंचे, लेकिन नाम नहीं दिखा तो आपत्ति दर्ज कराई।

एक ही तारीख की नियुक्ति वरिष्ठता में 800 का अंतर

डीईओ कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराई गई। इस सूची में तमाम विसंगतियां नजर आई। अध्यापक सुनील राठौर व संगीता शिवहरे की नियुक्ति 2001 की है, लेकिन सूची में संगीता का नाम 108 वें स्थान पर, जबकि सुनील का 939 वे नंबर पर था। उनसे दो साल जूनियर अनिल जैन का नाम 938 वें नंबर पर दर्शा दिया गया। शासकीय मावि छावनी क्रमांक 1 में पदस्थ माध्यमिक शिक्षक मुकेश गौतम का नाम ही सूची में नहीं था। कुंअरपुर में पदस्थ माध्यमिक शिक्षक दिनकर नीखरा का जन्म 2010, जबकि नियुक्ति 2001 की दर्शाई गई।

वरिष्ठता के अनुसार होनी थी काउंसलिंग

नियमों की बात करें तो जिले में सीएसी के 99 व बीएसी के 23 पदों पर वरिष्ठता सूची के आधार पर शिक्षकों को काउंसलिंग के लिए बुलाना था। जैसे जैसे शिक्षक विकासखंडवार पद चुनते जाते शेष बचे पदों पर सूची में नीचे आने वाले शिक्षकों की काउंसलिंग का क्रम जारी रखकर सभी पदों पर भर्ती की जाती। ऐसे में यदि इसी सूची से काउंसलिंग हो जाती तो पूरी प्रक्रिया ही उसी तरह विवादों में घिर जाती, जिस तरह शिक्षकों के तबादले का मामला विवादों में बना हुआ है।

पूर्व सीएसी, बीएसी सबसे ज्यादा दिखे पुनः पदस्थी के इच्छुक

सर्व शिक्षा अभियान में दो साल की प्रति नियुक्ति पर सीएसी व बीएसी की नियुक्ति की जाती है। अंतिम बार साल 2016 में काउंसलिंग की गई थी। इसके बाद एक साल का कार्यकाल बड़ा दिया गया था। इस बीच कई सीएसी बीएसी प्रतिनियुक्ति समाप्त कराकर स्कूल लौट गए, जिसे जिले में अब 140 सीएसी में से 39 ही कार्यरत हैं, जबकि 40 बीएसी के पदों पर सिर्फ 17 कार्यरत है। शेष पदों पर प्रभारी व्यवस्था लंबे समय से चल रही है। आज काउंसलिंग के दौरान भी वहां इन पदों पर पदस्थी की चाह लेकर पहुंचने वालों में पिछले वर्षों में इन्हीं पदों पर प्रतिनियुक्ति पर रहे शिक्षक ही थे। हालांकि कई महिलाएं भी बीजीसी, बीएसी व सीएसी के पद पर नियुक्ति के लिए काउंसलिंग में पहुंची। नियुक्ति में ब्लॉक परिवर्तित करने को लेकर भी स्थिति साफ नहीं थी। विभागीय अधिकारियों का कहना था कि ब्लॉक परिवर्तित नहीं किया जाएगा, जबकि आवेदकों का कहना था कि प्रतिनियुक्ति नियमों में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है।

यह बोले अधिकारी

सीएसी के 99 व बीएसी के 23 पदों पर प्रतिनियुक्ति के लिए काउंसलिंग आयोजित की गई थी। इसके लिए वरिष्ठता सूची जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से उपलब्ध कराई गई थी। इसमें खामियां सामने आई हैं, हमने उसके बाद फिलहाल काउंसलिंग स्थगित कर दी है। बुधवार को खामियों को लेकर दावे आपत्ति लिए है। 5 दिन में अपडेट सूची उपलब्ध होने के बाद नए सिरे से काउंसलिंग की तारीख घोषित करेंगे।

डीआर कर्ण, डीपीसी जिला शिक्षा केंद्र शिवपुरी।

5 कैप्सन-चस्पा की गई विसंगतिपूर्ण सूची की खामियां देखकर सिर पकडते शिक्षक।

6 कैप्सन-काउंसलिंग के लिए पहुंचे अधिकारियों को विसंगति से अवगत कराते शिक्षक।

7 कैप्सन-शिक्षक दिनकर नीखरा जो 2001 से कार्यरत हैं। सूची में उनका जन्म नियुक्ति के 9 साल बाद 2010 में बताया गया है।

Posted By: Nai Dunia News Network