शिवपुरी। नईदुनिया प्रतिनिधि

150 करोड़ रुपये से भी ज्यादा खर्च करने के बाद सिंध परियोजना को कोई लाभ शहरवासियों को नहीं मिल पा रहा है। एक दशक से चल रही इस परियोजना के बाद आज तक शहरवासियों के कंठ सूखे हैं। खुद मुख्यमंत्री ने कई महीनों में पहले इसको लेकर चिंता व्यक्त की थी और जांच के आदेश भी दिए थे, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने सीएम के आदेशों को भी हवा में उड़ा दिया। न कोई जांच हो पाई और न यह योजना धरातल पर सफल हो पाई। इसके दुष्परिणाम जरूर आमजन हर दिन भोग रहा है। इसका परिणाम यह हुआ है वार्ड 20 के लोग पानी के मटके लेकर नगर पालिका कार्यालय पहुंच गए और वहां पर प्रदर्शन किया।

वार्ड क्रमांक 20 के कुमार मोहल्ला, दारूगर मोहल्ला, जोगीपुरा, तारकेश्वरी कॉलोनी, छोटा लुहारपुरा आदि के आधा सैकड़ा रहवासी नपा कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन किया। रहवासियों का कहना है हमने उधार लेकर 2700 रुपये कनेक्शन के जमा कराए। इसके बाद भी पानी नहीं मिल पा रहा है। 40 डिग्री से अधिक तापमान हो रहा है और दैनिक जरूरत के लिए भी पानी न मिल पाए तो आम आदमी पर क्या बीतेगी। हालांकि नगर पालिका के एई सचिन चौहान ने उन्हें दो दिन की मोहलत मांगकर लौटा दिया। सचिन चौहान ने कहा कि दो दिन में पानी की व्यवस्था कर दी जाएगी। गौरतलब है कि ऐसे आश्वासन नपा के अधिकारी सालों से रहवासियों को दे रहे हैं। कलेक्ट्रेट परिसर में भी कई बार सिंध की लाइन को लेकर प्रदर्शन् हो चुका है, लेकिन समाधान आज तक किसी को नहीं मिला है।

आए दिन फूटती है लाइन, सड़कों पर बहता है पानी

जो पानी लोगों को उनके घरों में मिलना चाहिए वह सिंध की बार-बार लाइन फूटने की वजह से सड़कों पर बहता है। सिंध की आधी लाइन बदली जा चुकी है, लेकिन शहरी क्षेत्र में अभी भी पुरानी लाइन कई जगह डली हुई है। दोशियान कंपनी ने जो पाइप डाले थे वह खराब गुणवत्ता के थे जो पानी के प्रेशर को नहीं झेल पाते और फट जाते हैं। आधी लाइन बदल भी दी गई है और इसके कारण परियोजना का बजट भी बढ़ा है। लेकिन इतनी जद्दोजहद के बाद भी अंत में शहर के लोग प्यासे ही रह गए हैं।

सीएम के आदेश भी हुए बेअसर

सिंध जलावर्धन योजना को लेकर मार्च 2021 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने समीक्षा बैठक की थी। इसके बाद भी नगर पालिका इसे लेकर गंभीर नहीं हुआ। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद योजना में खामी का पता लगाने के लिए इंदौर से विशेषज्ञों की टीम आना थी, लेकिन वह अभी तक नहीं आ पाई है। नगर पालिका के अधिकारी इसके लिए कोरोना का हवाला दे रहे हैं, लेकिन कोरोना महामारी में भी लोगों को पानी की जरूरत हो है ही। यह योजना किसी एक नगर पालिका अध्यक्ष या अधिकारी के कार्यकाल की नहीं है। पिछले 12 सालों में जो भी अधिकारी और अध्यक्ष रहे सभी के लिए यह चारागाह बनी रही।

प्लांट से सप्लाई, लेकिन यहां भरने और सप्लाई की व्यवस्था ही नहीं

सिंध जलावर्धन के लिए बनाए गए फिल्टर प्लांट में पूरे समय मोटर चालू रखी जाती है जिससे करीब आठ टंकियां भरी जा रही हैं। इसके अलावा मोटर गर्म होने पर एक-दो घंटे बंद की जाती है। कभी-कभी टंकियां खाली ही नहीं हो पाती हैं, इसलिए भी पानी की सप्लाई बंद करना पड़ती है। दरअसल टंकियों से पानी सप्लाई होने की पूरी लाइन ही नहीं है, इसलिए टंकियां जल्दी खाली ही नहीं हो पाती हैं। प्लांट से सप्लाई होने के बाद भी शहर में डिस्ट्रीब्यूशन नहीं होने से पानी की टंकियां खाली ही नहीं हो पाती हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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