शिवपुरी (नईदुनिया प्रतिनिधि)।

भारत सरकार ने वर्ष 2006-07 में स्वास्थ्य पालिसी पर चर्चा करते हुए यह बात कही थी कि देश को पब्लिक हेल्थ केयर की जरूरत है, लेकिन देश में पब्लिक हेल्थ कैडर तैयार करने वाले कालेज नहीं थे। ऐसे में देश में स्वशासी संस्था बनाकर इंडियन इंस्टीट्यूट आफ पब्लिक हेल्थ के चार सेंटर विकसित किए गए। इन सेंटर्स पर चिन्हित चिकित्सकों को प्रशिक्षण देकर पब्लिक हेल्थ कैडर तैयार किया गया और इस कैडर को मुंबई, राजस्थान व गुजरात में मूर्त रूप भी प्रदान कर दिया गया। मप्र में पिछले लंबे समय से इस सिस्टम का इंतजार था जिसे बीते रोज कैबिनेट में पास कर दिया गया है। अब मप्र में भी डाक्टरों का नया कैडर तैयार किया जाएगा। एक कैडर में ऐसे डाक्टरों को रखा जाएगा जो मेडिकल आफिसर और क्लास-वन अधिकारी होंगे। दूसरे कैडर में ऐसे डाक्टर होंगे जो एमबीबीएस की डिग्री के साथ पब्लिक हेल्थ केयर, अस्पताल प्रबंधन में डिप्लोमा धारक होंगे। इस कैडर में से सीएचएचओ, सीएस और बीएमओ की जिम्मेदारी उस डाक्टर को दी जाएगी जिनके पास एमबीबीएस की डिग्री के साथ-साथ पब्लिक हेल्थ केयर का डिप्लोमा होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य है कि अस्पतालों में न तो प्रबंधन दोयम दर्जे का रहे और न ही स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हों। वर्तमान में जिले में ऐसे अधिकारी न के बराबर ही हैं जिनके पास चिकित्सा के साथ मैनेजमेंट की डिग्री हो। इसके बाद यहां सभी अधिकारी बदल जाएंगे।

कैडर बनाने के ये होंगे फायदे

सरकार का मानना है कि कुछ डाक्टर ऐसे होते हैं मरीज का इलाज तो बहुत अच्छे से कर सकते हैं लेकिन उनके अंदर प्रबंधकीय क्षमता बहुत अच्छी नहीं होती है। वर्तमान निमयों के अनुसार विशेषज्ञ डाक्टर को ही सीएमएचओ और सीएस की जिम्मेदारी दी जाती है। ऐसे में वह विशेषज्ञ डाक्टर न तो मरीजों को देख पाता है और न ही बहुत अच्छा प्रबंधन कर पाता है। इससे अस्पतालों में विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी भी हो जाती है। इस नए सिस्टम से विशेषज्ञ डाक्टर मरीजों को देखने में अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर पाएंगे। प्रदेश में यह माडल लागू होने के उपरांत ब्लॉक से लेकर संचालनालय तक विभिन्ना प्रबंधकीय पदों पर इन एमबीबीएस डाक्टरों को पदस्थ किया जाएगा। इससे सैंकड़ों की संख्या में विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी को पूरा किया जा सकेगा। इसके अलावा हर स्तर पर डाक्टरों की क्रमोन्नाति, वेतनमान, ग्रेड आदि को बेहतर किया जाएगा। सिविल सर्जन के पांच प्रतिशत पदों को लोक स्वास्थ्य प्रबंधन संवर्ग से से भरा जाएगा।

नए मसौदे का यह है प्रारूप

-लोक स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए पद किए मंजूर-675

-चिकित्सा अधिकारी के पद होंगे-5284

-विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद होंगे-3564

-अस्पताल प्रबंधन संवर्ग में पद-148

-संयुक्त संचालक के नए पद होंगे-24

-हर जिले में महामारी विशेषज्ञ का पद होगा-1

-अभी प्रदेश भर में महामारी विशेषज्ञ के पद हैं-20

इनका कहना है

-प्रदेश सरकार तैयारी कर रही है कि अब अस्पतालों में प्रबंधकीय पदों पर ऐसे डाक्टरों को पदस्थ किया जाए जो पब्लिक हेल्थ केयर और हास्पिटल मैनेजमेंट में डिप्लोमा धारक हों। इसी को लेकर कैबिनेट में प्रस्ताव पास किया गया है। इससे दो लाभ होंगे एक यह कि जो डाक्टर प्रबंधकीय पद पर होगा वह पूरी तरह से प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करेगा, दूसरा विशेषज्ञ डॉक्टरों से सिर्फ चिकित्सकीय कार्य लिया जा सकेगा।

डा. संजय ऋषिश्वर, जिला टीकाकरण अधिकारी

Posted By: Nai Dunia News Network

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