शिवपुरी। नईदुनिया प्रतिनिधि

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नए सिरे से हुए नगर पालिका के वार्ड आरक्षण में एक वार्ड को छोड़कर सभी वार्डों का आरक्षण बदल गया है। वार्ड क्रमांक 16 पहले एसटी था और नए आरक्षण में भी एसटी ही है। इसके अलावा शेष 38 वार्ड में रोस्टर के कारण आरक्षण बदला है। आरक्षण बदलते ही सभी पार्षदों को अब नई राजनीतिक जमीन तलाशना होगी। कुछ पार्षद ऐसे भी हैं जो लगातार दो बार से अपने वार्ड से चुनाव जीत रहे हैं, लेकिन इस बार वे भी आरक्षण में फंस गए। उदाहरण के लिए वार्ड क्रमांक 31 में लगातार दो बार से पंकज शर्मा पार्षद हैं, लेकिन इस बार यह सीट अनारक्षित महिला हो गई है। इसी तरह वार्ड क्रमांक 24 के बलवीर यादव दो बार पार्षद बने। एक बार सामान्य तो दूसरी बार ओबीसी सीट से लड़कर जीते। इस बार इस यह वार्ड अनारक्षित महिला हो गया है। ऐसे में अब यह सिटिंग पुरुष पार्षद चुनाव नहीं लड़ पाएंगे और इन्हें या तो अपने स्वजन को चुनाव लड़ाना होगा या फिर नए वार्ड में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशना होगी। हालांकि रोस्टर में हर साल आरक्षण प्रक्रिया में इस तरह के बदलाव होते हैं, लेकिन इस बार सभी वार्ड में बदलाव हो गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा परेशानी उन जनप्रतिनिधियों को आएगी जो अध्यक्ष पद की दावेदारी ठोक रहे हैं। अध्यक्ष के पहले उनके लिए पार्षद बनना जरूरी है और नए वार्ड में जाकर जीत सुनिश्चित करना इतना आसान नहीं होगा।

महिलाओं को नहीं होगी परेशानी

आरक्षण प्रक्रिया में महिला प्रत्याशियों को इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। जो वार्ड पहले महिलाओं के लिए अनारक्षित थे वे अधिकांश वार्ड अनारक्षित श्रेणी में पहुंच गए हैं। ऐसे में वे चाहें तो फिर से अपनी दावेदारी पेश कर सकेंगी। इस बार अनारक्षित महिलाओं के लिए वार्डेां की संख्या भी पिछले चुनाव के मुकाबले बढ़ गई है। इस बार अनारक्षित महिला के 14 वार्ड हैं। वहीं आरक्षण मिलाकर इनकी संख्या 19 वार्ड हैं।

अप्रत्यक्ष प्रणाली से बढ़ेगी उम्मीदवारों की संख्या, बागियों की संख्या भी

ताजा परिस्थितियों के अनुसार नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से होगा। ऐसा हुआ तो सालों से इसकी तैयारी में जुटे कई लोगों को झटका लगना तय है। ऐसी स्थिति में निर्दलीय के लिए विकल्प लगभग खत्म हो जाते हैं। दूसरी ओर पार्षदों को महत्व काफी बढ़ जाएगा। अध्यक्ष के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका होने से उम्मीदवार भी बढ़ेंगे। हालांकि अप्रत्यक्ष प्रणाली में पार्षदों के बागी होने की आशंका भी बढ़ेगी जो पार्टियों के लिए सिरदर्द बढ़ा सकती है। नरवर नगर परिषद में अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव हुए थे और इसमें कांग्रेस और भाजपा के पास लगभग बराबरा पार्षद थे, लेकिन निर्दलीयों का समर्थन सत्ता पक्ष को मिला। यहां तक कि कांग्रेस के पार्षदों ने भी भाजपा कैंडिडेट के पक्ष में वोट डाल दिए थे।

शुरू हो गई चुनावी दावेदारी

अभी चुनावों की अधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इंटरनेट मीडिया पर दावेदारी शुरू हो गई है। कई वार्ड तो ऐसे में हैं जिसमें लोगों ने काम कराने तक शुरू कर दिए हैं। वार्ड क्रमांक पांच में पार्षदी की उम्मीद में एक जनप्रतिनिधि ने जेसीबी लगाकर सफाई कार्य शुरू करा दिया जिससे जनता के बीच खुद को रख सकें। वहीं फेसबुक और वाट्सएप पर तो दावेदारों की बाढ़ सी आ गई है। हालांकि राजनीतिक से पार्टी से जुड़े लोग सीधे दावेदारी करने से बच रहे हैं और अपने दोस्तों व रिश्तेदारों के माध्यम से खुद को उम्मीदवार बताकर पब्लिक ओपिनियन ले रहे हैं।

पार्टियों की गतिविधियां हुई तेज

भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। गत दिनों लगातार भाजपा ने कोर कमेटी की बैठकें कर अपनी रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। दूसरी ओर कांग्रेस के लिए नियुक्त किए गए प्रभारियों ने भी सक्रिय कार्यकर्ताओं की सभाएं लेना शुरू कर दिया है। हालांकि अभी जितनी अधिक सक्रियता भाजपा दिखा रही है उतना चुनावी उत्साह कांग्रेसियों में दिखाई नहीं दे रहा है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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