शिवपुरी। नईदुनिया प्रतिनिधि

बच्चों के साथ उपेक्षित व्यवहार, दुर्व्यवहार और शोषण की घटनाएं दिनों दिन बढ़ती जा रहीं है। कुछ दूषित मानसिकता के लोग छोटी-छोटी मासूम लड़कियों को बहला फुसलाकर ले जाते है, फिर उन्हें बाल विवाह, बालश्रम एवं देह व्यापार जैसे दलदल में धकेल देते है। इस प्रकार की घटनाओं में आम तौर पर परिवहन के लिए रेलवे का उपयोग किया जाता है। हमारे निगरानी दल के लोगों को सजग और संवेदनशील होकर काम करना होगा। यह बात बाल कल्याण समिति अध्यक्ष डा. सुषमा पांडे ने रेलवे स्टेशन पर आयोजित परिचर्चा के दौरान कही। गुरुवार को रेलवे स्टेशन परिसर में बच्चों की सुरक्षा विषय पर नोडल चाइल्ड लाइन द्वारा उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें रेलवे स्टाफ,जीआरपी, आरपीएफ स्टाफ के अलावा स्टेशन पर सेवाएं देने वाले लोग मौजूद रहे। इस आयोजन में बच्चों के प्रति बढ़ते अपराधों की रोकथाम हेतु सजगता एवं संवेदनशीलता के साथ काम करने पर जोर दिया गया।

बाल संरक्षण अधिकारी राघवेंद्र शर्मा ने कहा कि जिस परिवार से कोई बच्चा गुम हो जाता है तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, हम इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2020 के आंकड़े बताते है कि भारत में हर घंटे सात बच्चे और हर दिन 162 बच्चे गुम हो जाते हैं। महीने की बात करें तो 4,939 बच्चे हर माह गुम हो जाते हैं। हमें इस मुद्दे पर बेहद संवेदनशील और सजग होने की आवश्यकता है।

कोई भी बच्चा मुसीबत में दिखे तो बात जरूर करें: स्टेशन मास्टर

स्टेशन मास्टर आरएस मीणा ने कहा कि स्टेशन पर प्रतिदिन हजारों यात्री प्रतिदिन आते-जाते हैं। हमें पूरी सजगता से यात्रियों की निगरानी करने की जरूरत है कि कोई भी बच्चा मुसीबत में या संदेहास्पद स्थिति में दिखे तो उससे पूछताछ जरूर करें। उन्होंने कहा कि हालांकि जीआरपी और आरपीएफ के द्वारा निगरानी की जाती है। उसे और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। जीआरपी एएसआइ लाखन सिंह रघुवंशी ने जीआरपी और आरपीएफ की निगरानी तंत्र की पूरी जानकारी दी तथा यात्रा के दौरान संदिग्ध स्तिथि में तुरंत हमे उस बच्चे से बात करना है उसे भरोसा दिलाना है कि वो अपने घर से दूर भले है पर एक सुरक्षित परिवेश में है। सिटी समंवयक सौरभ भार्गव एवं सेंटर समंवयक अरुण सेन ने बताया कि चाइल्ड लाइन किस तरह से मुश्किल हालातों में फंसे बच्चों की मदद करती है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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