शिवपुरी (नईदुनिया प्रतिनिधि)।

देश की आजादी के बाद पहली बार देश में एक बार फिर चीते आ रहे हैं। इनका आना तय हो गया है, लेकिन अभी अधिकारिक रूप से तिथि तय नहीं है। कूनो और इस प्रोजेक्ट से जुड़े प्रदेश के अधिकारियों को भी तारीख नहीं बताई गई है। माना जा रहा है कि 13 अगस्त या इसके बाद कभी भी चीते भारत लाए जा सकते हैं। अब इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह से केंद्र सरकार ने अपने हाथ में ले लिया है। इसके बारे में राज्य सरकार या फिर कूनो के इस प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों को भी अधिक जानकारी नहीं दी जा रही है। उन्हें सिर्फ तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

सूत्रों की मानें तो इसे लेकर वरिष्ठ अधिकारी उच्च स्तर पर आपत्ति भी दर्ज करा चुके हैं। संभवत 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चीतों के आने की विधिवत घोषणा कर सकते हैं। चीते आए तो देश में आजादी के बाद पहली बार होगा जब लोग चीतों को देख सकेंगे। सन 1952 में सरकार ने भी इस बात की घोषणा कर दी थी कि अब देश में कोई भी चीता मौजूद नहीं है। तैयारियों का जायजा लेने के लिए वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी शिवपुरी और श्योपुर में डटे हुए हैं। वाइल्ड लाइफ के चीफ वार्डन जसवीर चौहान भी दो दिन पहले निरीक्षण के लिए आ गए। कूनो प्रोजेक्ट को लीड कर रहे सीसीएफ सीएस निनामा के साथ उन्होंने तैयारियों का जायजा लिया। हालांकि स्थानीय स्तर पर अधिकारी अधिकृत रूप से कुछ भी बताने से बच रहे हैं।

केंद्र से नहीं मिले निर्देश

चीतों को कूनो तक लाए जाने का रूट अभी तय नहीं किया गया है। दक्षिण अफ्रीका से इन्हें हवाई मार्ग से दिल्ली लाया जाएगा। इसके बाद दिल्ली से यह किस तरह कूनो पहुंचेंगे यह भी बताया नहीं गया है। संभवत उन्हें दिल्ली से विशेष विमान से ग्वालियर लाया जा सकता है। इसके बाद ग्वालियर से सड़क मार्ग से यह कूनो लाए जाएंगे। इसके लिए विशेष वाहन का उपयोग किया जाएगा। यहां पर 30 दिनों तक उन्हें क्वारंटाइन रखा जाएगा और इसके बाद बनाए गए बाड़े में छोड़ा जाएगा।

तेंदुए को ढूंढने में जुटी पूरी टीम

बाड़े में कैमरा ट्रैप में आए पांच तेंदुओं में से एक तेंदुआ अभी तक नहीं मिला है। तेंदुआ चीते के लिए खतरनाक माना जाता है और बाड़ा इसीलिए बनाया गया है कि तेंदुए इसमें न रहें। लेकिन एक तेंदुआ अभी भी इस क्षेत्र में घूम रहा है। यह बाड़ा करीब पांच स्क्वेयर किलोमीटर में फैला हुआ है। यह 12 किमी लंबा है। इसमें कई हजार वाट का करंट भी सुरक्षा के लिए दौड़ रहा है। पिछले दो महीने से कूनो की टीम इस तेंदुए को ढ़ूंढ रही है। मदद के लिए शिवपुरी के माधव राष्ट्रीय उद्यान से भी रेस्क्यु एक्सपर्ट कूनो में भेजे गए हैं।

चीतों को लेकर श्रेय की होड़

चीतों को लाने के लिए प्रयास तो कई सालों से किए जा रहे थे, लेकिन पिछले तीन वर्ष से इस पर तेजी से काम हुआ। इसमें राज्य सरकार ने काफी प्रयास किए। चीतों के आने के लिए कई बार दावे किए गए, लेकिन वे नाकाफी साबित हुए। अब नामीबिया व दक्षिण अफ्रीका से स्वीकृति मिलने के बाद केंद्र सरकार ने इस योजना को पूरी तरह से अपने हाथ में ले लिया है। राज्य के अधिकारियों को चीतों के आने की सही सूचना भी नहीं दी जा रही है। उन्हें तैयारियां पूरी तरह से दुरुस्त रखने के लिए कहा गया है जिससे तारीख की घोषणा करते ही चीतों को यहां लाया जा सके।

Posted By: Nai Dunia News Network

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