Shivpuri News: शिवपुरी (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सरकारी कालेजों के लगातार बिगड़ते रिजल्ट के कारणों को जब सरकारी विभिन्ना विषय विशेषज्ञों के माध्यम से जाना तो पता चला कि बिगड़ते हुए रिजल्ट के पीछे का मुख्य कारण कालेजों में अध्ययनरत बच्चों का कालेज और पढ़ाई से दूर रहना है। बच्चे कालेज पढ़ने के लिए नहीं आते हैं इस कारण रिजल्ट बिगड़ रहा है। वहीं यह भी जानकारी सामने आई कि कालेजों में प्राध्यापक पदस्थ तो हैं लेकिन समय पर क्लास लेने नहीं पहुंच रहे हैं। ऐसे में शासन ने अब प्राध्यापकों सहित छात्रों को कालेज से जोड़ने और नियमित क्लास लगे इसके लिए प्राध्यापकों के साथ-साथ छात्रों की भी बायोमैट्रिक उपस्थिति अनिवार्य कर दी है। कालेजों में बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ऐसे में सभी विद्यार्थियों को अपना बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। इसी क्रम में 1 नवंबर से कालेज के प्राध्यापकों की बायोमैट्रिक उपस्थिति शुरू कर दी गई है। इसके बाद 10 तारीख से बच्चों के बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन को लेकर रुझान नहीं

खास बात यह है कि जिला मुख्यालय सहित जिले भर के कालेजों में बच्चों का रूझान बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन करवाने की दिशा में नहीं है। इस कारण अभी तक किसी भी कालेज में 10 से 15 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों के बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन नहीं हो सके हैं। कालेज प्राचार्य का कहना है कि अगर बच्चों के बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन नहीं हुए तो उन्हें परीक्षा देने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि परीक्षा हाल में प्रवेश सिर्फ इसी बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन के आधार पर ही दिया जाएगा। इससे एक फायदा यह भी होगा कि फर्जी परीक्षार्थी बैठने की आशंका नगण्य हो जाएगी।

बायोमैट्रिक अटेंडेंस से निकाली जाएगी 75 प्रतिशत उपस्थिति

कालेज में परीक्षा में शामिल होने के लिए विद्यार्थी की 75 प्रतिशत उपस्थिती अनिवार्य है, लेकिन किसी भी सरकारी कालेज में विद्यार्थी कालेज जाने को तैयार नहीं होता है। इसके बाद साल के अंत में प्राध्यापकों के हाथ-पैर जोड़ कर जुगाड़ करके किसी भी तरह अपनी उपस्थिति 75 प्रतिशत करवा लेता है। अब ऐसा संभव नहीं हो पाएगा, क्योंकि छात्र की 75 प्रतिशत उपस्थिती बायोमैट्रिक अटेंडेंस के आधार पर ही काउंट की जाएगी।

प्रवेश लेकर बाहर जाना संभव नहीं

अभी तक विद्यार्थी करते यह थे कि उन्होंने सरकारी कालेजों में नियमित विद्यार्थी के रूप में प्रवेश ले लिया और इसके बाद वह महानगरों में जाकर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते रहते थे। जब कालेज एग्जाम का समय आता था तो कालेज में आकर परीक्षा देने के बाद वह स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री भी हासिल कर लेते थे, लेकिन सब कुछ सही रहा तो अब यह संभव नहीं हो पाएगा। कालेज प्राचार्य महेंद्र सिंह के अनुसार अब छात्र अगर नियमित एडमीशन लेगा तो उसे नियमित रूप से कालेज आना होगा।

सीसीई काउंसलिंग कक्षाओं में छात्रों की उपस्थिति नगण्य

शासकीय श्रीमंत माधवराव सिंधिया महाविद्यालय कोलारस के प्राचार्य डॉ आर एस ठाकुर एवं वाणिज्य विभाग के अतिथि विद्वान डॉ रामजी दास राठौर द्वारा महाविद्यालय से प्राप्त निर्देशानुसार 10 नवंबर से वाणिज्य विभाग के विद्यार्थियों के लिए सीसीई काउंसलिंग कक्षाएं प्रारंभ की गई थीं, जिनमें 25 नवंबर तक बीकॉम प्रथम वर्ष के 40 प्रतिशत छात्र, बीकॉम द्वितीय वर्ष के 10 प्रतिशत छात्र और बीकाम तृतीय वर्ष के 30 प्रतिशत छात्र ही सीसीई काउंसिलिंग कक्षाओं में उपस्थित रहे हैं। उनका कहना है कि वाणिज्य विभाग के विद्यार्थियों को विभिन्ना माध्यमों से सूचनाएं देने के बावजूद महाविद्यालय के वाणिज्य विभाग में प्रवेश प्राप्त विद्यार्थियों द्वारा महाविद्यालय आने में कोई रुचि नहीं दिखाई जा रही है। मध्य प्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग के आदेशानुसार समस्त विद्यार्थियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति 75 प्रतिशत होना अनिवार्य है।

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Posted By: Nai Dunia News Network

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