शिवपुरी (नईदुनिया प्रतिनिधि)।

शिवपुरी की अशोक बिहार कालोनी में रहने वाले लोगों को प्रशासन ने नोटिस जारी किए हैं कि वह जिस जमीन पर रह रहे हैं वह जमीन सरकारी है। इस नोटिस के माध्यम से लोगों को बेदखल करने की चेतावनी दी गई है। प्रशासन द्वारा लोगों को जारी किए गए नोटिस के संबंध में कालोनी वालों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर ली है। कालोनी वालों का कहना है कि उनके पास जमीन की रजिस्ट्री है। वह सालों से इसी जमीन पर बनाए गए मकानों का हाउस टैक्स भी नपा को भर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार 21 नवंबर को तहसील शिवपुरी से टीवी टावर रोड अशोक बिहार कालोनी में रहने वाले 28 मकान मालिकों को सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके मकान बनाने के संबंध में नोटिस जारी किया है। अलग-अलग नोटिसों में मकान मालिकों को सरकारी सर्वे नंबर 1098 व 1099 पर अतिक्रमण करके मकान बनाने के नोटिस जारी किए गए हैं। सूत्र बताते हैं कि अभी 19 और कालोनी वालों को नोटिस देने की तैयारी की जा रही है। कालोनी वालों का कहना है कि उनके पास उनके प्लाट्स की रजिस्ट्री, नामांतरण, डायवर्सन, हाउस टैक्स की रसीदें सब कुछ मौजूद है, जो कई सालों पुराने हैं। ऐसे में उनके मकान सरकारी जमीन पर कैसे हो सकते हैं? कालोनी वालों ने प्रशासन को न्यायालय में चुनौती देने का मन बना लिया है।

2016 में भी जारी हुए थे नोटिस

यहां उल्लेख करना होगा कि वर्ष 2016 में भी शिवपुरी तहसीलदार एलके मिश्रा ने कालोनी वालों को नोटिस जारी किए थे। तत्समय नोटिस के जबाब भी दिए गए और कालोनी वालों ने जमीन का सीमांकन करने के संबंध में भी आवेदन दिए। पूरे मामले की जांच की गई और तत्कालीन तहसीलदार एलके मिश्रा ने बकायदा शासकीय जबाब देते हुए कहा था कि इस जगह पर जमीन का सीमांकन किया जाना संभव नहीं है, क्योंकि यहां ऐसा कोई प्वाइंट नहीं है जहां से सीमांकन किया जा सके।

नपा ने दी मकान बनाने की अनुमति तो सरकारी कैसे?

कालोनी में ही रहने वाले खेमराज नामक एक व्यक्ति ने अपने प्लॉट की रजिस्ट्री के आधार पर उसका नामांतरण, डायवर्सन करवाया। नगर पालिका से मकान बनाने की अनुमति ली और नक्शा भी पास करवाया है। लोगों का कहना है कि अगर उक्त युवक का प्लॉट सरकारी जमीन पर है तो फिर उसे नगर पालिका ने मकान बनाने की अनुमति कैसे प्रदान कर दी? अगर उक्त मकान सरकारी जमीन पर है तो इसमें राजस्व विभाग सहित नगर पालिका के सारे कर्मचारी दोषी हैं, जिन्होंने उसे मकान बनाने की अनुमति प्रदान की है।

कालोनी बनी तब सो रहा था क्या राजस्व विभाग

कालोनी वालों का यहां तक कहना है कि यह कालोनी रातों रात नहीं बसी है। इस कालोनी का विकास दो दशक से भी अधिक समय में हुआ है। इस दौरान यहां पर दर्जन भर से अधिक हल्का पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर, नपा सीएमओ रहे हैं। अगर अतिक्रमण हो रहा था तो इन अधिकारियों को इतने सालों में अतिक्रमण होता दिखाई नहीं दिया क्या? कुछ लोगों का तो यहां तक कहना है कि अगर प्रशासनिक अधिकारियों ने ज्यादा तानाशाही दिखाने की कोशिश की तो उनके बुलडोजर को मकानों तक पहुंचने से पहले दर्जनों लोगों की छाती पर से गुजर कर जाना पड़ेगा।

कालोनाइजर दो बार जीत चुका है केस

इस कालोनी को हेमंत खेमरिया नामक कालोनाइजर व उसके पिता ने काटा है। वह कालोनी को लेकर उठे विवाद के संबंध दो बार हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुका है। दोनों बार हाई कोर्ट से केस भी जीत चुका है। इसके बाद रह रह कर प्रशासनिक अधिकारी किस आधार पर नोटिस बांट रहे हैं? इसका कोई जबाब फिलहाल अधिकारी नहीं दे रहे हैं। इसके अलावा कालोनी वालों का कहना है कि उनके पास दस्तावेज मौजूद हैं जिसमें इस बात का उल्लेख है कि सर्वे नंबर 1099 की भूमि प्रशासन द्वारा हास्टल व हाउसिंग बोर्ड की कालोनी निर्माण के लिए दी जा चुकी है। अब 1099 सर्वे नंबर की कोई भूमि उनके पास नहीं है। इसके बाबजूद प्रशासन द्वारा 1099 सर्वे नंबर पर अतिक्रमण के नोटिस आखिर किस आधार पर जारी किए हैं।

इनका कहना है

-हमने 28 लोगों को नोटिस जारी किए हैं और उनसे जबाब मांगा है। वह लोग अपने-अपने जबाब पेश करें, इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पूर्व में जो नोटिस वर्ष 2016 में जारी किए गए थे उक्त नोटिसों का निराकरण नहीं हुआ थाा। अगर कालोनाइजर कोई केस जीता है तो वह भी अपना जबाब पेश करे। बिना दस्तावेजों के हम कैसे मान लें कि क्या हुआ है और क्या नहीं।

एनसी गुप्ता, तहसीलदार शिवपुरी

Posted By: Nai Dunia News Network

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