शिवपुरी (नईदुनिया प्रतिनिधि)।

नगरीय निकाय के चुनावों से पहले मूलभूत आवश्यकताओं के लिए तरस रहे लोगों का विरोध लगातार जारी है। कई वार्डों में रहवासियों द्वारा किए जा रहे विरोध के क्रम में रविवार को फक्कड़ कालोनी के लोगों ने अपना विरोध दर्ज कराते हुए चुनाव से बाहर रहने की बात कही है। विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि उन्हें अगर बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत चीजें ही उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं तो फिर हम वोट क्यों दें?

उल्लेखनीय है कि फक्कड़ कालोनी को बसे हुए डेढ़ दशक से अधिक बीत चुका है, लेकिन अभी तक यहां प्रशासन ने यहां रहने वाले लोगों की बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत जरूरतों की पूर्ति तक नहीं की है। जब भी लोगों ने इन मूलभूत आवश्यकताओं की मांग की तो उनकी कालोनी की अवैध बताकर हर बार विकास से कोसों दूर रखा गया। यही वजह है कि इस बार कालोनी के लोगों ने अपना विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि जब प्रशासन ने इतने सालों में हमारी बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत जरूरतों की पूर्ति नहीं की है तो फिर हम वोट आखिर क्यों दें? कालोनी के लोगों ने अपनी-अपनी गलियों की तमाम समस्याएं गिनाते हुए उनकी पूर्ति की मांग की। किसी का कहना था कि उनके तरफ रास्तों में गहरे-गहरे गड्ढे हैं तो किसी का कहना था कि उनके यहां बिजली के पोल नहीं हैं। कई लोगों ने पानी की लाइन नहीं होने की बात कही।

पहुंचे प्रत्याशी, वोटर का दर्द सुनकर लौट

विरोध दर्ज कराने वाले कालोनीवासियों ने इस दौरान वहां प्रचार प्रसार के लिए पहुंचे कई लोगों वापस लौटने की हिदायत दे दी। इस पर कई प्रत्याशी वार्डवासियों की समस्याएं सुनने के लिए उनके पास पहुंचे। लोगों का कहना है कि सभी प्रत्याशी उनकी मांगें सुनकर वहां से लौट गए। किसी ने भी समस्याओं के निराकरण का ठोस आश्वासन नहीं दिया।

विकास के नाम पर अवैध, वोट के नाम पर वैध

कालोनी वालों का कहना है कि वह अपनी समस्याओं को लेकर न सिर्फ नगर पालिका बल्कि कलेक्टर तक को अवगत करा चुके हैं। उन्होंने पार्षद से लेकर विधायक और मंत्री तक भी अपनी बात रखने का प्रयास किया किया है। इसके बाबजूद वह मूलभूत आवश्यकताओं के लिए मोहताज हैं। लोगों का कहना है कि जब अधिकारी और नेता उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने नहीं आ सकते हैं तो फिर वोट के लिए क्यों आ जाते हैं? लोगों का कहना है कि विकास के नाम पर कालोनी अवैध हो जाती है और वोट के लिए यह अवैध कालोनी वैध कैसे हो जाती हैं।

जहां लाइन वहां आपरेटर मांगता है रुपये

कालोनी में कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां पर पानी की लाइन मौजूद है। लोगों के अनुसार इस लाइन में कभी-कभार ही पानी आता है। महिलाओं का आरोप तो यहां तक है कि नल खोलने वाला आपरेटर सोनी उनसे नल खोलने के बदले में रुपयों की मांग करता है। उसका कहना है कि महीने के 50-100 रुपये एक घर से दोगे तो पानी मिलेगा अन्यथा नहीं मिलेगा। अगर महिलाओं के आरोप सही हैं तो नपाकर्मी द्वारा भी जानबूझ कर जल संकट पैदा किया जा रहा है।

ये बोले लोग

- हमारे यहां न तो पानी है और न ही बिजली व सड़क जैसी मूलभूत चीजें। इसके अलावा सड़कों में गहरे-गहरे गड्ढे होने के कारण गाड़ी से दूर पैदल चलना तक मुश्किल हो रहा है। रात के अंधेरे में कई लोग गिर कर घायल हो जाते हैं। शिकायत की कहीं कोई सुनवाई नहीं होती है। पीने के पानी की तो यह स्थिती है कि लोग 50 और 100 रुपये का कलेक्शन करके पानी का टैंकर मंगाते हैं तब कहीं जाकर पीने के पानी का इंतजाम होता है।

राधा शर्मा, वार्डवासी

- हमारी गली में न तो पानी की लाइन है और न ही बिजली के खंबे, पानी की लाइन बिछाने के लिए खुदवाई जा रही थी लेकिन बाद में खुदाई बंद कर दी गई। किसी ने यह तक नहीं बताया कि खुदाई आखिर बंद क्यों की गई। हमें बिजली, पानी, सड़क मुहैया करा तो वोट देंगे।

सुनीता, वार्डवासी

-हमारे यहां पानी की लाइन खोलने वाला आपरेटर हमसे कहता है कि अगर पानी चाहिए तो हर घर से 50 से 100 रुपये दोगे तो पानी की सप्लाई करूंगा, नहीं तो मेरी मर्जी होगी तब करुंगा, नहीं होगी तो नहीं करुंगा।

मीना शर्मा, वार्डवासी

Posted By: Nai Dunia News Network

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