फूफ। नईदुनिया न्यूज

गंदे हाथ हमेशा बीमारियों को आमंत्रित करते हैं। हाथ की सफाई के प्रति बच्चों में अभाव तो है ही, साथ ही बड़े लोग भी हाथ धोने में कोताही करते हैं। ऐसे में खाने के साथ पेट में कीटाणुओं जाते हैं और फिर बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। गांवों में तो शौच के बाद मिट्टी या राख से हाथ धोने का प्रचलन है। डायरिया जैसी बीमारी का एक प्रमुख कारण भी साबुन से हाथ को साफ नहीं करना है। यह बात फूफ कस्बे में स्थित ऋषीश्वर कॉलेज में एनसीसी के कैडेटों को हाथ धुलाई के बारे जानकारी देने के दौरान कर्नल राजीव शर्मा ने कही।

उन्होंने कहा कि साबुन से हाथ धोने पर डायरिया होने की संभावना बहुत ही कम हो जाती है। डायरिया से बचने के विभिन्ना कारणों में से साबुन से हाथ धोने पर डायरिया होने की संभावना कम हो जाती है। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर लोग सादा पानी से, मिट्टी से या फिर राख से हाथ धोते हैं, जबकि ये इतने प्रभावी नहीं होते, इसलिए साबुन से हाथ धोने की आदत लोगों में विकसित करनी होगी। भले ही वे सस्ते एवं स्थानीय साबुन क्यों नहीं उपयोग करें। लेकिन हाथ धोने के लिए साबुन का ही उपयोग करना चाहिए। इसी दौरान के प्राचार्य एमएल शर्मा ने बच्चों को बताया कि बच्चों की हाथ की सफाई रखनी चाहिए। जिसमें बीमार नहीं पड़ेंगे। साथ ही जब बीमार नहीं पड़ेंगे, तो रोज स्कूल आएंगे, तो पढ़ाई में आगे होंगे। उन्होंने कहा कि डायरिया के शिकार बच्चों का मानसिक एवं शारीरिक विकास अवरूद्ध होता है। साबुन से हाथ धोना, डायरिया को दूर करने का एक कारगर हथियार है। इन बच्चों की आदतों को बदलना तो आसान है, पर गांव के बुजुर्ग अभी भी हाथ धोने के लिए साबुन का नियमित इस्तेमाल नहीं करते। इसी दौरान एनसीसी कैडेट मनोहरसिंह भदौरिया, पवन यादव और अनिकेत राठौर के द्वारा हाथ धोने का तरीके को समझाया। इस मौके पर 30 एमपी हवलदार जबरसिंह, डॉ. कौशलेन्द्रसिंह भदौरिया, गजेन्द्र कुमार शर्मा, डॉ. वीके शर्मा, शैलेन्द्र भारद्वाज, चंद्रबिंदु शर्मा, महावीर पवैया, अजयसिंह, दुर्गेशसिंह, अरूणसिंह और विकाश शर्मा के अलावा अन्य लोग उपस्थित रहे।

फोटो सहित क्रमांक 7

Posted By: Nai Dunia News Network

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