मकर संक्रांति के दिन तिल का विशेष महत्व

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पं. रामप्रकाश पस्तोर

पृथ्वीपुर(नईदुनिया न्यूज)।

हर वर्ष मकर संक्राति 14 जनवरी को ही मनाई जाती है, लेकिन इस बार मकर संक्राति 14 और 15 जनवरी दो दिन मनाई जाएगी। सूर्य की एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना संक्राति कहलाता है। जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर में प्रवेश करता है तो मकर संक्रांति पड़ती है। बुधादित्य योग में केसरयुक्त कुमकुम का लेप कर पीले वस्त्र धारण कर हाथों में बज्र धारण किए संक्रांति का वाहन बाघ व उपवाहन अश्व उत्तर से दक्षिण की ओर गमन करेंगे। ज्योतिषाचार्य पं. रामप्रकाश पस्तोर ने बताया कि सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी को होगा। परंतु पंचांगों में समय को लेकर भेद के चलते इस बार मकर संक्रांति दो दिन की रहेगी। यह स्थिति 14 जनवरी की रात आठ बजकर 58 मिनट पर सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के कारण बन रही है। इसका पुण्यकाल अगले दिन यानी 15 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। इस तरह मकर संक्रांति 14 और 15 को मनाई जाएगी। मकर संक्रांति के दिन तिल का विशेष महत्व होता है। इस दिन पुण्यकाल में श्वेत तिल से उबटन कर स्नान करना चाहिए। साथ ही तिल का हवन, तिल से तर्पण, तिल युक्त वस्तुओं का दान एवं सेवन करना चाहिए। श्वेत तिल से देवताओं का तथा काले तिल से पितरों का तर्पण करना चाहिए। ज्योतिषाचार्य पं. भगवत सहाय पटैरिया ने बताया कि मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान कर तांबे के लोटे में शुद्ध जल लेकर उसमें रोली, अक्षत, लाल पुष्प तथा तिल और गुड़ मिलाकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हो जाएं। दोनों हाथों को ऊपर उठाकर सूर्यदेव को श्रद्धापूर्वक गायत्री मंत्र या ऊं घृणि सूर्याय नमः श्री सूर्य नारायणाय अर्घ्य समर्पयामि मंत्र के साथ अर्घ्य दें।

कुण्डेश्वर में लगने वाला मेला स्थगित

जिले में बढ़ रहे संक्रमित मरीजों की संख्या को देखते हुए इस साल मकर संक्रांति के अवसर पर शिवधाम कुण्डेश्वर मंदिर परिसर में 14 जनवरी से तीन दिवसीय आयोजित होने वाला मेला का आयोजन नहीं किया जाएगा। मंदिर परिसर में मेला नहीं लगाया जाएगा साथ ही सभी दुकानें बंद रहेंगी। संक्रांति पर्व पर मेला न लगाए जाने के संबंध में मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष डा. नंदकिशोर दीक्षित ने बताया कि संक्रमण काफी तेज गति से बढ़ रहा है। यहां संक्रांति महापर्व पर लगभग 50 हजार श्रद्धालुओं की भीड़ उमडती है। संक्रमण न फैले इसको ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं में परिवर्तन किया गया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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