- मुनिश्री के अभिनंदन में बंधाजी की महिलाओं ने सजाए घर-घर मंगल कलश

बम्हौरी बराना। नईदुनिया न्यूज

अतिशय क्षेत्र बंधाजी में मंगलवार को विद्यासागर महामुनि राज के शिष्य वीरसागर महाराज, मुनिश्री विशाल सागर महाराज, मुनिश्री धवल सागर महाराज का खाकरोन से पैदल चलकर बंधाजी की पावन धरा पर आगमन हुआ। कमेटी द्वारा पाद प्रक्षालन कर मुनि संघ की अगवानी की बंधाजी की महिलाएं घर-घर मंगल कलश लिए हुए मुनिश्री की अगवानी कर रही थी। खाकरोंन से जैनेत्तर समाज के 200 लोग जिसमें बड़े बूढ़े बच्चे एवं महिलाएं सभी मुनि संघ के साथ 7 किलोमीटर पैदल चलकर बंधा जी आए। बंधा जी कमेटी द्वारा सभी लोगों का माल्यार्पण के द्वारा सम्मान किया गया। सभी लोगों द्वारा मुनिश्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुनिश्री धवल सागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि आज मैं बुंदेलखंड के छोटे से गांव में आया हूं जहां सात घर की समाज है। लेकिन अतिशय क्षेत्र बंधाजी छोटा नहीं है इस क्षेत्र के आसपास 40 गांव की समाज जुड़ी हुई है। मुनिश्री ने कहा कि मैंने पहली बार अजितनाथ भगवान के दर्शन किए हैं। अजितनाथ भगवान कसौटी पाषाण से निर्मित है। मुनिश्री ने कहा कि मैंने सुना था कि अजितनाथ भगवान चमत्कारी हैं। मैंने आज स्वयं उनका अतिशय देखा है मुनिश्री ने कहा कि मेरा पृथ्वीपुर से जतारा जाने का विचार मन में चल रहा था, लेकिन बंधाजी वाले बाबा के अतिशय से मुझे बंधा जी आना पड़ा मुनिश्री ने कहा यदि में बंधा जी वाले बाबा के दर्शन नहीं कर पाता तो है मेरे जीवन की बड़ी भूल होती।

मुनिश्री वीरसागर महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि मैं अभी आगरा से चल कर आया हूं मैंने आगरा में शौरीबटेश्वर क्षेत्र में भी अजितनाथ भगवान के दर्शन किए वह भी प्रतिमा कसौटी पत्थर से बनी हुई है। मैं बंधा जी के अजितनाथ भगवान के दर्शन कर रहा था तो मुझे शौरी बटेश्वर के अजितनाथ भगवान झलक दिख रही थी। वीरसागर महाराज मुनि अवस्था के 20 वर्ष पहले अमेरिका में एक निजी कंपनी में सवा करोड़ रुपए सालाना पैकेज पर नौकरी करते थे। अमेरिका से दर्शन के लिए आचार्य भगवान विद्यासागर के पास पहुंचे वहीं से उनके वैराग्य की शुरुआत हुई और ऐसा वैराग्य आया कि उन्होंने सवा करोड़ सालाना की नौकरी छोड़ कर दिगंबर मुद्रा को धारण करके अपनी आत्मा का कल्याण कर रहे हैं।

यहां रहने वाले लोग सौभाग्यशाली

मुनिश्री ने कहा कि मैं बंधा जी के अजितनाथ भगवान के दर्शन करने भौयरे में गया मुझे ऐसा लगा जैसे अजितनाथ भगवान में चुंबकीय गुण हो अपनी ओर चुंबक की तरह खींचते हो मैंने ऐसा महसूस किया। मुनिश्री ने कहा मैंनै अपने जीवन में पहली बार अजितनाथ भगवान के दर्शन किए हैं। आप लोग जो यहां निवास करते हैं वह निश्चित ही बहुत सौभाग्यशाली हैं कि आप लोगों को अजितनाथ भगवान की शरण मिली है। आप लोग अजितनाथ भगवान से कभी दूर नहीं जाना उनकी शरण में रहना आपके जीवन में मंगल ही मंगल होगा।

Posted By: Nai Dunia News Network

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