टीकमगढ़( नईदुनिया प्रतिनिधि)।

द्वापर युग में जब कुरूक्षेत्र में महाभारत युद्घ चल रहा था उस समय खग्रास सूर्यग्रहण पड़ा था, इसके बाद कई वर्षो में और भी सूर्यग्रहण पड़े। रविवार को जो खग्रास सूर्यग्रहण पड़ा वह काफी समय तक रहा। इसको लेकर आम लोगों में काफी उत्सुकता बनी रही। सूर्यग्रहण को यदि राशियों के हिसाब से देखे तो मिथुन राशि के अलावा वृश्चिक राशि,मीन, मकर राशि वालों के लिए इस खग्रास सूर्यग्रहण का प्रभाव नकारात्मक नहीं बल्कि सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वही वैज्ञानिकों ने इसे महज खगोलीय घटना ही बताया है।

सूर्यग्रहण के चलते शनिवार की रात लगभग 10 बजे ही सूतक लग गया था तथा सूतक लगने के बाद भोजन का त्याग भी आम लोगों ने कर दिया था। रविवार की सुबह करीब 10 बजे से सूर्यग्रहण शुरू हुआ जिसका मोक्ष दोपहर करीब 3 बजे तक रहा। इस मौके पर जिले भर के प्रायः सभी मंदिरों के पट पूरी तरह से बंद रहे। तथा श्रद्घालु मंदिर के बाहर अथवा अपने घरों पर ही भगवान की आराधना करते रहे। वही ग्रामीण अंचलों में तो श्रद्घालु भजन मंडलियों के साथ देवस्थानों पर पहुंचे जहां दोपहर तक भजन कीर्तन कर किया।

भारत-चीन के मध्य छिड़ सकता है युद्घ

खग्रास सूर्यग्रहण के संबंध में ख्यातिप्राप्त आचार्य पं. कृष्णगोपाल द्विवेदी से चर्चा हुई तो उन्होंने बताया कि खग्रास सूर्यग्रहण का प्रभाव ठीक नहीं है। खग्रास सूर्यग्रहण पड़ने से भारत- चीन के मध्य युद्घ भी छिड़ सकता है इसमें भारत को विजय तो मिलेगी लेकिन उसका नुकसान भी हो सकता है। वही उन्होंने कोरोना वायरस को लेकर कहा कि खग्रास सूर्यग्रहण पढने से कोरोना वायरस में कमी आएगी। और यह वायरस धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगा।

मिथुन राशि पर पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव : पं. कृष्णगोपाल द्विवेदी ने बताया कि मिथुन राशि के अलावा वृषि, मीन राशि बालों पर इसका प्रभाव सकारात्मक होगा तथा इसका प्रभाव एक माह तक रहेगा। उन्होंने बताया कि अन्य राशि वालों के लिए मध्यकारी है। उन्होंने कहा कि ईश्वर की भक्ति ही सर्वोपरि है।

दोपहर 2.30 बजे के वाद ही खुले मंदिरों के पट

खग्रास सूर्यग्रहण के चलते शनिवार रात 9 बजे आरती के बाद ही मंदिरों के पट बंद हो गए थे। रविवार को सूर्यग्रहण की समाप्ति के वाद जब मोक्ष हुआ तभी मंदिरों के पट खोले गए। मंदिरों के पट खुलने के पूर्व सभी मंदिरों की विशेष साफ सफाई की गई तथा गंगाजल का छिड़काव किया गया तथा पूजा अर्चना के उपरांत श्रद्घालुओं ने भगवान के दर्शन किए। जिला मुख्यालय पर जहां झिरकी बगिया मंदिर, नजरबाग मंदिर,जानकीबाग मंदिर में काफी संख्या में श्रद्घालु दर्शनों के लिए पहुंचे तो वही काफी संख्या में श्रद्घालु भगवान भोलेनाथ की नगरी कुंडेश्वर भी पहुंचे जहां अमावस्या के चलते श्रद्वालुओं ने जमड़ार नदी में स्नान कर भगवान शिव की पूजा अर्चना की। हालांकि इस दौरान किसी भी श्रद्वालु को मंदिर के अंदर प्रवेश नहीं दिया गया था।

दोपहर 12 बजे छाया हल्का अंधेरा

भारत में इस साल के बड़े सूर्यग्रहण को सभी लोग बड़ी बेसब्री से देख रहे थे। कोरोना काल में पड़ रहे इस सूर्यग्रहण को जहां ज्योतिषाचार्य बहुत अच्छा नहीं मान रहे थे, वही वैज्ञानिक खग्रास सूर्यग्रहण को महज खगोलीय घटना ही बता रहे थे। हिन्दू धर्म में सूतक का बहुत बड़ा महत्व होता है। सूर्यग्रहण का असर 10 बजकर 15 मिनट से दिखना प्रारंभ हो गया था। जबकि निवाडी मुख्यालय पर दोपहर करीब 12 बजे जब चंद्रमा ने पृथ्वी को पूरी तरह से ढक लिया तब सूर्य की रोशनी अत्यंत धीमी हो गई थी।

ग्रहणकाल में हुआ सुंदरकांड के साथ श्रीरामनाम संकीर्तन

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श्रीरामनाम संकीर्तन करते हुए भक्तगण

पृथ्वीपुर। खग्रास सूर्यग्रहण के चलते नगर के सभी मंदिरों में रविवार को पट पूरी तरह से बंद रहे तथा दोपहर सूर्यग्रहण के मोक्ष के बाद मंदिर श्रद्वालुओं को पूजा अर्चना के लिए खोल दिए गए। नजदीकी ग्राम जेरोन में खग्रास सूर्यग्रहण के चलते नगर के झंडा चबूतरा पर नगरवासियों द्वारा श्रीरामनाम संकीर्तन के साथ ही सुंदरकाण्ड का पाठ किया गया। सुंदरकाण्ड का समापन सूर्यग्रहण के उपरांत हुआ। समापन के अवसर पर पूजा अर्चना के साथ आरती उतारी गई और श्रद्वालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर कृष्णकुमार रावत, शिवसहाय पाण्डेय, रामकुमार गोस्वामी, मंशाराम पाण्डेय, मनोज तिवारी, संतोष विदुआ, दिनेश विदुआ, विनोद गुप्ता, रामचरण सोनी, प्रभू पांडेय, मनमोहन नामदेव,मातादीन पस्तोर, रामबहादुर पुष्पकार सहित काफी संख्या में भक्त मौजूद रहे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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