फोटो- 1- कथा का वर्णन करते हुए कथा व्यास।

पृथ्वीपुर। जीवन में भगवान की भक्ति का स्मरण करने से जहां मन को शांति मिलती है। वहीं जीवन को सार्थक बनाने में मदद मिलती है। इसलिए हमें अपने जीवन में भगवान का स्मरण आवश्यक रूप से प्रातः काल करना ही चाहिए। यह बात दुर्गापुर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कथा व्यास ने कही। मां नन्नाीबाई सोशल वेलफेयर सोसायटी मप्र द्वारा आयोजित अपना घर वृद्धाश्रम के शुभारंभ के अवसर पर विश्व शांति श्रीमद् भागवत कथा और मानव सेवा महायज्ञ दुर्गापुर अछरूमाता में श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर ओमानंद द्वारा रविवार को कथा का शुभारंभ किया गया। महामंडलेश्वर ने श्रीमद् भागवत कथा का महत्व बताते हुए कहा, कि जब भगवान शंकर जी ने पार्वती जी के जिद पर अपने डमरू बजाई तो एक तोते का अंडा फूटा तो उस फूटे हुए अंडे से एक तोते (शुक) का जन्म हुआ। भगवान शंकर जी ने पार्वती जी से कहा कि जब तक आप कथा में जागते रहोंगे, जब तक ही मैं कथा सुनाऊंगा एक पाठ, दो पाठ, इसी क्रम मे लगभग 10 पाठ हो गए। इसी बीच पार्वती जी ने भगवान शंकर जी से कहा कि रूकिए स्वामी मुझे नीद आ गई थी । परन्तु भगवान शंकर जी ने कहा कि आप सो रही हैं तो हमारी कथा पर हूका कौन दे रहा था। तब कथा का रसपान ग्रामीण एंव क्षेत्र के लोगों ने भारी संख्या मे किया कथा मे पधारे हुए सभी ग्रामीणों और क्षेत्र वासियों का आभार संस्था के संस्थापक राजेश बंशकार व्यक्त किया।

Posted By: Nai Dunia News Network

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