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टीकमगढ़। जिला मुख्यालय से करीब 5 किमी की दूरी पर स्थित सुनवाहा गांव के वीरान जंगल में विराजी मां चामुंडा अपने भक्तों को आर्शीवाद दे रही है। शारदीय नवरात्र में तो यहां सुबह से लेकर शाम तक श्रद्वालुओं के आने जाने का सिलसिला लगा रहता है। सुनवाहा ग्राम के वीरान जंगल में रेलवे पटरी के समीप प्रसिद्व अति प्राचीन मां चामुंडा का मंदिर है। कालांतर में यहां एक छोटी सी मड़िया हुआ करती थी, लेकिन धीरे-धीरे इस मंदिर का विकास होता गया और अब यहां मां चामुंडा का विशाल मंदिर निर्मित हो गया है। मां के दरबार में आए हुए भक्त कभी खाली नहीं आते है। मां चामुंडा अपने भक्तों की झोलियां खुशी से भर देती है। वैसे तो यहां प्रति शुक्रवार को हवन पूजन के साथ अन्य धार्मिक आयोजन होते रहते है। लेकिन शारदीय नवरात्र में यहां प्रतिदिन श्रद्वालुओं की भीड सुबह से शाम तक अनवरत बनी रहती है। इतना ही नहीं मनौती पूरी होने पर यहां श्रद्वालु विशाल भण्डारे के साथ ही अन्य धार्मिक अनुष्ठान भी करवाते है। नवदुर्गा महोत्सव के दौरान ही श्रद्वालुओं के द्वारा वेदी हवन का धार्मिक अनुष्ठान भी कराया जाता है।

गौरतलब है कि जिला मुख्यालय से हटकर यह मंदिर कुछ दूरी पर स्थित है। यहां आवागमन के साधन सुलभ न होने के कारण यहां आने जाने का रास्ता भी सही न होने से कम संख्या में ही श्रद्वालु मंदिर तक पहुंचते है। लेकिन इसके बाद भी आज भी आस्था एवं विश्वास के आगे श्रद्वालु कभी ढग मग नहीं हुए और चाहे बरसात का मौसम हो या तेज धूप होए श्रद्वालुओं को पहुंचने में यहां में भले ही थोडी परेशानी होती हो लेकिन इसके वाद भी श्रद्वालु मां चामुण्डा के दरबार में अपनी हाजिरी लगाने पहुंच ही जाते है।

मन मोह लेता मंदिर का वातावरण

मां चामुंडा माता के मंदिर पहुंचते ही श्रद्वालुओं की सारी थकान पल भर में दूर हो जाती है। मंदिर परिसर में इतनी अधिक आत्मिक शांति मिलती है कि यहां से घर जाने का मन ही नहीं होता है। भले ही आपको आने जाने में गर्मी का अहसास होता रहे लेकिन मंदिर पहुंचते ही इतनी अधिक ठंडक महसूस होती है कि यहां का वातावरण सभी का मन मोह लेता है।

दूसरे दिन शहर के मंदिर में पहुंचे श्रद्धालु

शहर में नवरात्र के दूसरे दिन विभिन्ना देवी मंदिरों में जल चढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। अल्प सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। वहीं एक दिन पहले शनिवार की देर रात शहर के विभिन्ना देवी पांडालों में विधि विधान से देवी प्रतिमाओं की स्थापना हुई। साथ ही बगाज माता मंदिर में प्रशासन और पुलिस की व्यवस्थाएं चुस्त रहीं।

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