टीकमगढ़। नईदुनिया टीम

बुंदेलखंड में किसानों की फसलों पर ओले कहर बनकर बरसे। टीकमगढ़ और निवाड़ी जिले के विभिन्ना गांव में शनिवार की देर रात आंधी तूफान के साथ ही जोरदार बारिश हुई और इसके बाद ओले भी गिरे। साथ ही रविवार को सुबह ओले गिरने के बाद किसान अपनी फसलों को देखने के लिए खेतों में पहुंचे, जहां पर फसलों को देखकर किसान रो पड़े। खेतों में ओले की चादर बिछी हुई देखकर किसानों के होश उड़ गए। टीकमगढ़ में प्रशासन ने 31 गांवों में फसलों के नुकसान होने का आकलन किया है। इसमें भी अधिकतम 20-25 प्रतिशत नुकसान आंका है। इसके अलावा 11 पशुहानि के साथ ही दो लोगों की आकाशीय बिजली गिरने से मौत की जानकारी एकत्र की है। जबकि एक्सपर्ट यानी विभाग के रिटायर्ड अफसरों ने कहा कि 25 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर किसान को मुआवजा दिया जाता है।

गौरतलब है कि निवाड़ी-पृथ्वीपुर सहित आसपास के एक दर्जन से अधिक गांवों मड़िया, खिस्टोन, बारहबुजुर्ग, बिरोराखेत, बिरोरा, बछौड़ा, मवई, गैलवारा, जलंधर, बछौड़ा में तेज बारिश के साथ गिरे ओलों से किसानों की फसलें पूरी तरह से चौपट हो गईं। इससे खेतों और सड़कों पर ओलो की सफेद चादर सी बिछ गई। फसल नष्ट होने से किसानों का रो-रो कर बुरा हाल है और वह अपने खेतों को देखकर बुरी तरह रो रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकार अब उनकी कुछ मदद करे और उन्हें मुआवजा दें। बता दें कि जिले में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही हैं। हालांकि बीते दिन थोड़ा मौसम जरूर साफ हुआ, जिससे किसानों को थोड़ी राहत नजर आई, लेकिन रविवार की सुबह एक बार फिर ओलावृष्टि और बारिश से किसानों की फसल बर्बाद हो गईं हैं। फसलों की दुर्दशा देखने के लिए रविवार को सुबह से कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पटवारी और जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे, जहां पर किसानों की सुनकर उन्हें सहायता दिलाने की बात कही।

चार तहसीलों में नहीं आंका नुकसान

ओलावृष्टि और लगातार बारिश के बाद कई गांवों में फसलें तबाह हो गई हैं, लेकिन टीकमगढ़ जिले में नौ तहसील क्षेत्रों में से पांच तहसीलों में नुकसान आंका हैं, जबकि बल्देवगढ़, जतारा, पलेरा और लिधौरा में बिलकुल भी नुकसान नहीं होने की बात प्रशासन ने कही है। अब प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। बता दें कि प्रशासन ने टीकमगढ़ के छह गांवों में 15-20 प्रतिशत, बड़ागांव धसान के पांच गांवों में पांच-10 प्रतिशत, खरगापुर के चार गांवों में पांच से 10 प्रतिशत, दिगौड़ा के आठ गांवों में 15-20 प्रतिशत, मोहनगढ़ के आठ गांवों में 20-25 प्रतिशत नुकसान आंका है। जबकि टीकमगढ़ में एक, बड़ागांव धसान में पांच, बल्देवगढ़ में पांच पशुओं की मौत होने का मामला सामने आया है।

आकाशीय बिजली गिरने से दो की मौत

आंधी तूफान के साथ तेज गरज के साथ हुई बारिश के बीच ओलावृष्टि हुई है। तेज गरज और चमक के साथ बिजली गिरने से दो लोगों की मौत होने का मामला सामने आया है। इसमें मोहनगढ़ तहसील के केशवगढ़ गांव में कुंवरलाल यादव की आकाशीय बिजली गिरने से मौत हुई है। वहीं लिधौरा तहसील क्षेत्र के कछियागुड़ा गांव में भी गीता पत्नी नीरज कुशवाहा आकाशीय बिजली गिरने की चपेट में आ गईं, जिससे उनकी मौत हो गई। कलेक्टर सुभाष कुमार द्विवेदी ने कहा कि इस मामले में मृतक के स्वजनों को चार-चार लाख रूपये की नियमानुसार सहायता प्रदान की जाएगी।

आंसू बहा रहा किसानः तीन दिनों बाद होगा सर्वे

ओलावृष्टि के बाद प्रशासन ने फिलहाल 31 गांवों को इसकी चपेट में आना शामिल किया है, जबकि किसान ओलावृष्टि और बारिश के बाद हाहाकार मचा रहा है। किसानों की फसलों खेतों में बिछ गईं हैं। वहीं फूल झड़ गए हैं। प्रशासन ने राज्य सरकार को 31 गांवों की जानकारी भेज दी है। अब कलेक्टर ने कहा कि अभी बारिश हो रही है। बारिश रुकने के बाद तीन दिनों बाद कृषि विभाग और राजस्व का एक दल गठित करेंगे, जो गांवों में फसलों की हकीकत जानेंगे। फसलों की स्थिति जानने के बाद प्रतिवेदन राज्य सरकार को भेजा जाएगा। इसमें राहत के रूप में आरबीसी छह (चार) के तहत किसानों की मदद की जाएगी।

खरगापुर क्षेत्र में गिरे ओले, किसानों का दर्द जानने नहीं पहुंचा कोई

फोटो-101- ओले गिरने के बाद एकत्र कर दिखाते हुए।

खरगापुर। तहसील क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में ओलावृष्टि के बाद किसान परेशान हो गए। ओलावृष्टि होने से किसानों की फसलें पूरी तरह तबाह हो गईं हैं। खरगापुर नगर छोड़कर विभिन्ना ग्रामीण क्षेत्रों में यह हालात देखे गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में चिनगुवां, मनगुवां, दोर, चंदेरी, कोटरा, भानपुरा, पिपरा बिलारी, पचेर, देरी सहित अन्य गांवों में ओले गिरने की बात सामने आई है। जहां पर अभी तक न तो राजस्व विभाग की कोई टीम मौके पर पहुंची और न ही किसानों से इस संबंध में जानकारी ली गई। किसान मुआवजा को लेकर सर्वे की मांग करते रहे। बताया गया कि राजस्व अफसर तो ठीक है, यहां पर जनप्रतिनिधि भी किसानों का दर्द जानने के लिए नहीं गए हैं।

लिधौरा में खेतों में भरा पानी, बिछ गई खेतों में फसलें

फोटो-102- किसानों के खेतों में बारिश के बाद भरा हुआ पानी।

लिधौरा। लिधौरा क्षेत्र में लगातार तीन दिनों से हो रही बारिश के चलते अब फसलों को काफी नुकसान हो रहा है। लगातार बारिश के बाद अब खेतों में पानी भर गया। वहीं आंधी तूफान चलने के बाद फसलें खेतों में बिछ गई है। क्षेत्र में चना, मसूर, मटर, सरसों की फसलें अब बर्बाद हो रहीं हैं। किसान अरविंद, रामप्रसाद साहू, हरि अहिरवार, जुगला कुशवाहा, प्रभुदयाल कुशवाहा ने बताया कि फसलों में पाला पड़ने की संभावना बनी हुई है और खड़ी हुईं फसलों के फूल भी झड़ गए हैं। फिलहाल प्रशासन की ओर से मौके पर कोई भी टीम नहीं पहुंची है। न ही कोई सर्वे किया गया, ऐसे में अब किसान चिंतित नजर आ रहे हैं।

बड़े आकार के ओले गिरे, फसलें बर्बाद

निवाड़ी। निवाड़ी जिले में अत्याधिक ओलावृष्टि हुई है। यहां पर कई गांव ओले की चपेट में आने के बाद खेतों में खड़ी हुई फसल बर्बाद हो गई है। फसल बर्बाद होने के बाद अब किसान सर्वे की मांग कर रहे हैं। हालांकि सुबह से ही कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी और विधायक अनिल जैन खेतों का जायजा लेने के लिए निकल पड़े। क्षेत्र में बहेला, नोरा, घूपसी, उड़दौरा, पठारा, चचावली, कलोथरा सहित एक दर्जन से अधिक गांवों में ओले गिरने के बाद फसल बर्बाद हो गई। इसके अलावा लगातार ही हो रही बारिश के चलते किसान परेशान हो गए हैं। अब फसलों में आए फूल भी झड़ गए। अब कलेक्टर ने राजस्व टीमों को भी दौड़ाया है। यहां पर बताया गया कि 100 ग्राम वजन के ओले गिरे हैं। हालांकि ओरछा तहसील क्षेत्र में ओले से राहत मिली, लेकिन लगातार बारिश से फसलों को नुकसान है।

मोहनगढ़ के दर्जनों गांवों में बर्बाद हुई फसल

मोहनगढ़। टीकमगढ़ जिले के मोहनगढ़ क्षेत्र में भी ओले गिरे हैं। मोहनगढ़ क्षेत्र में कोड़िया, गोर, बनगांय, मस्तापुर, दरगांय, मोहनगढ़, दरगांयकलां, बला, मालपीथा, लखेपुर, पंचमपुरा सहित एक दर्जन से ज्यादा गांवों में ओलावृष्टि होने के बाद किसानों परेशान हो गए। यहां पर गेहूं की फसल बड़ी हो गई थी और वह कुछ समय बाद आने वाली थी। लेकिन आंधी तूफान के साथ ही ओलावृष्टि के बाद फसल पूरी तरह खेत में बिछ गई। इसके साथ ही सरसों, मटर, चना की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गईं हैं। किसान काशीराम अहिरवार, संजय प्रताप सिंह बुंदेला, रविेंद्र सिंह, बैंकट सिंह, माली यादव ने कहा कि किसानों का दर्द जानने के लिए अभी प्रशासन नहीं पहुंचा है। ऐसे में अब किसान कर्जदार हो जाएगा।

एक्सपर्ट व्यूः नहीं मिलेगा एक भी पैसा

आपदा को लेकर किसानों के साथ न्यायपूर्ण व्यवस्था नहीं है। 20-25 प्रतिशत तक नुकसान अगर भेजा जाता है, तो किसानों को एक भी पैसा नहीं मिलेगा। इसलिए यह सब कहना बेकार है। 25 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान होने के बाद राहत राशि मिलती है, जिसमें अलग-अलग राशि प्रतिशत के साथ अंकित है। यह कोई नया नियम नहीं है। यह पिछले करीब 35 सालों यही व्यवस्था चली आ रही है, जबकि होना चाहिए कि किसानों को खेतों में बोई फसलों का पूरा पैसा मिलना चाहिए।

- बीएल मिश्रा, रिटायर्ड डिप्टी कलेक्टर।

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मैं स्वयं गांवों में गया हूं

सुबह साढ़े 6 बजे ही ओलावृष्टि की सूचना मिलने के बाद तत्काल निकल आया था। खेतों में जाकर मैंने और टीम ने मुआयना किया है। दोपहर तक करीब 109 गांव प्रभावित बताए थे। लेकिन अब घट-बढ़ भी सकते हैं। किसानों के साथ न्यायपूर्ण कार्य किया जाएगा। किसानों का नुकसान हुआ है, इसे झुठलाया नहीं जा सकता है। मैं बारिश रुकने के बाद सर्वे का कार्य कराऊंगा।

- नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी, कलेक्टर, निवाड़ी।

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तीन दिन बाद गठित करेंगे टीम

जिले में 31 गांवों में ओलावृष्टि होने की बात सामने आई है। फिलहाल बारिश रूकने के बाद सर्वे होगा। कृषि और राजस्व की टीमें गठित होंगी। इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट रूप से सामने आएगी। शासन स्तर पर वर्तमान हालात को लेकर जानकारी भेजी गई है। सर्वे के बाद नियमानुसार ही मुआवजे की प्रक्रिया की जाएगी।

-सुभाष कुमार द्विवेदी, कलेक्टर, टीकमगढ़।

Posted By: Nai Dunia News Network

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