उज्जैन। महाकुंभ सिंहस्थ-2016 के दरमियान खरीदी एलईडी लाइट और अस्थायी शौचालयों के निर्माण में गड़बड़ियों की एफआईआर हुए एक पखवाड़ा गुजर गया है, मगर जांच धीमी गति से चल रही है। दरअसल जांच एजेंसी आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) में स्टाफ की कमी है। यहां 400 प्रकरणों की जांच लंबित है। एसपी राजेश रघुवंशी ने कहा है कि स्टाफ कम है, केस ज्यादा। सिंहस्थ घोटाले संबंधित जांच पूरी होने में थोड़ा वक्त तो लगेगा। दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है।

मालूम हो कि सिंहस्थ के दौरान खरीदी एलईडी लाइट की जांच डीएसपी एके सूर्यवंशी को और शौचालय निर्माण की जांच डीएसपी अजय कैथवास को सौंपी गई है। ईओडब्ल्यू ने नगर निगम के 6 अफसरों समेत 9 लोगों को आरोपित बनाया है। बताया है कि नगर निगम ने 3.50 करोड़ स्र्पए में नोएडा की एचपीएल कंपनी से 120 वॉट की 8 हजार और 150 वॉट की 3300 एलईडी लाइट खरीदी थी।

120 वॉट की एलईडी की कीमत 18090 स्र्पए और 150 वॉट की एलईडी की कीमत 22500 स्र्पए प्रति नग तय की थी। पूर्व में कांग्रेस पार्षद माया त्रिवेदी ने इस खरीदारी में घोटाले का आरोप लगाते हुए ईओडब्ल्यू को शिकायत कर जांच एवं कार्रवाई की मांग की थी। कहा था कि बाजार मूल्य से लगभग दोगुनी कीमत पर लाइट खरीदी गई है। जितनी लाइट लगाने का दावा निगम ने किया, उतने तो पोल ही नहीं थे।

प्रकरण में ईओडब्ल्यू ने खरीदारी के दौरान निगम में उपायुक्त रहे आरपी श्रीवास्तव समेत कार्यपालन यंत्री रामबाबू शर्मा, उपयंत्री जितेंद्र श्रीवास्तव, एचपीएल कंपनी के डायरेक्टर ऋषि सेठ, प्रबंधक मनोज जैन को आरोपी बनाया है। वहीं, पंचकोशी मार्ग पर बनाए 3700 अस्थायी शौचालयों के मामले में ब्रिक एंड बांड कंपनी इंदौर के सिद्धार्थ जैन, निगम के सहायक यंत्री पीयूष भार्गव, कार्यपालन यंत्री रामबाबू शर्मा, राकेश श्रीवास्तव, उपयंत्री श्यामसुंदर शर्मा को आरोपित बनाया गया है।

इन सभी के विरुद्ध धोखाधडी, षडयंत्र और सबूत मिटाने का केस दर्ज हुआ है। मालूम हो कि शौचालय निर्माण के केस की जांच लोकायुक्त ने भी की थी, मगर जांच उपरांत 12 जून 2018 को केस समाप्त कर दिया था। सूत्रों के अनुसार उस समय सियासी समीकरणों के कारण पूरी जांच नहीं हो पाई थी। आर्थिक अपराध् प्रकोष्ठ को इसके सबूत भी मिले हैं।

आज डीएसपी आयुक्त से मिलेंगे, मांगेंगे दस्तावेज

दोनों डीएसपी सोमवार को नगर निगम आयुक्त से जरूरी अन्य दस्तावेज की मांग करेंगे। दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद एक बार फिर आरोपितों से पूछताछ की जाएगी।

परदे के पीछे कई लोग

सिंहस्थ घोटाले से जुड़ी फाइलों में कई और लोगों के नाम भी सामने आए हैं। इसमें कुछ नेता और तत्कालीन अफसरों के नाम भी हैं। प्रभारी मंत्री सज्जनसिंह वर्मा ने बीते दिनों कहा था कि सिंहस्थ से जुड़ी हर गड़बड़ी की जांच करवाई जा रही है। अभी और भी केस दर्ज होंगे।

इंस्पेक्टर के तीन पद, तीनों ही खाली

ईओडब्ल्यू में इंस्पेक्टर के तीन पद हैं, जो लगभग सालभर से खाली हैं। स्टाफ में सिर्फ 3 सब इंस्पेक्टर और दो डीएसपी हैं। पी थ्री लेवल की 25 जांच डीएसपी सूर्यवंशी के पास और 32 जांच कैथवास के पास लंबित हैं। ये दोनों तीनों सब इंस्पेक्टर के साथ पी-टू लेवल के 350 शिकायती प्रकरणों की जांच भी कर रहे हैं। रिक्त पदों को भरने के लिए एसपी कई बार मुख्यालय पत्र भेज चुके हैं।

फोकस पानी की टंकियों पर फोकस ज्यादा

ईओडब्ल्यू का एलईडी लाइट और शौचालय प्रकरण से ज्यादा फोकस पीएचई द्वारा सिंहस्थ के दरमियान खरीदी पानी की टंकियों पर है। मुख्यालय से इस जांच को प्राथमिकता से पूरी करने को कहा गया है। मामले में प्राथमिकी दर्ज हुए दो साल बीतने को आए हैं, मगर अब तक केस दर्ज नहीं हुआ है।

Posted By: Hemant Upadhyay