उज्जैन। पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का महापर्व श्राद्ध 24 सितंबर से शुरू होंगे। इस बार महालय श्राद्ध का पर्व काल पूरे 16 दिन का रहेगा। धर्मशास्त्र के जानकारों के अनुसार श्राद्ध पक्ष में पांच महायोग बन रहे हैं। इनमें पितरों की तृप्ति व प्रसन्न्ता के लिए पितृ कर्म करना विशेष शुभ फल प्रदान करेगा।

ज्योतिषाचार्य पं. अमर डब्बावाला के अनुसार श्राद्धपक्ष में 25 सितंबर को प्रतिपदा व 27 को तृतीया तिथि पर सर्वार्थसिद्धि, 29 को पंचमी व 1 अक्टूबर को सप्तमी तिथि पर अमृत सिद्धि तथा 4 अक्टूबर को दशमी तिथि पर गुरु पुष्य नक्षत्र का महासंयोग बन रहा है। इन तिथियों पर पितरों की प्रसन्न्ता व तृप्ति के तीर्थ पर तर्पण, पिंडदान करना विशेष शुभ रहेगा। श्राद्धपक्ष पितरों की तिथि पर पितृकर्म करने से उतरोत्तर उन्न्ति, प्रगति तथा सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। श्राद्ध पक्ष में उज्जयिनी में स्थित गया कोठा, रामघाट तथा सिद्धवट पर पितृकर्म का विशेष महत्व बताया गया है।

श्राद्ध में कुतुपकाल विशेष

श्राद्ध पक्ष में कुतुपकाल का विशेष महत्व है। पं. डब्बावाला के अनुसार श्राद्ध में सुबह 10.50 बजे से दोपहर 12.50 बजे तक के समय को कुतुपकाल कहा गया है। यह समय पितरों के श्राद्ध के लिए विशेष माना गया है।