धीरज गोमे, उज्जैन (नईदुनिया)। धर्मधानी उज्जयिनी में महाकुंभ सिंहस्थ-2016 के दरमियान हुए घोटालों की जांच एफआइआर के एक साल बाद भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। इतना ही नहीं अब तक चार्जशीट भी दाखिल नहीं हुई। 28 सितंबर 2019 को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने सिंहस्थ के दौरान हुई एलईडी लाइट खरीदी और शौचालय निर्माण में धांधली की शिकायत पर एफआइआर दर्ज की थी। छह अफसरों सहित नौ लोगों को आरोपित बनाया था।

शौचालय निर्माण मामले की जांच डीएसपी अजय कैथवास और एलईडी लाइट खरीदी की जांच एके सूर्यवंशी कर रहे थे। हाल में सूर्यवंशी का तबादला हो गया है। उनकी जगह डीएसपी संजीव पाठक आए हैं। अब उन्हें एलईडी लाइट खरीदी की जांच सौंपी गई है।

शौचालय मामले में ब्रिक एंड बांड कंपनी इंदौर के सिद्धार्थ जैन, निगम के सहायक यंत्री पीयूष भार्गव, कार्यपालन यंत्री रामबाबू शर्मा, उपयंत्री श्यामसुंदर शर्मा, राकेश श्रीवास्तव को और एलईडी लाइट मामले में उपायुक्त रहे आरपी मिश्रा, कार्यपालन यंत्री रामबाबू शर्मा, उपयंत्री जितेंद्र श्रीवास्तव, एचपीएल कंपनी के डायरेक्टर ऋषि सेठ, प्रबंधक मनोज जैन को आरोपित बनाया गया था। इन सभी के खिलाफ धोखाधड़ी, षड्यंत्र और सबूत मिटाने का केस दर्ज हुआ था।

शौचालय निर्माण की जांच में अब तक ये मिला

- नगर निगम द्वारा पंचकोशी मार्ग पर बनाए अस्थायी शौचालयों के निर्माण में गड़बड़ी की शिकायत जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष भरत पोरवाल ने की थी।

- आरोप था कि शौचालय मापदंड अनुसार नहीं बनाए हैं, जो बनाए उनका न मेंटेनेंस किया गया और ना व्यस्थित रिकॉर्ड रखा गया।

- शौचालयों की सफाई के लिए कर्मचारियों की तैनाती होनी थी पर नहीं की गई।

- शौचालय के लिए जरूरी सेप्टीटैंक भी नहीं बनाए गए थे।

- टेंडर नियम का पालन नहीं किया गया था, तकनीकी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की

अधिक कीमत पर खरीदी एलईडी लाइट, कई खंभों से गायब

- एलईडी लाइट खरीदी में धांधली की शिकायत कांग्रेस पार्षद रहते माया त्रिवेदी ने की थी। आरोप था कि अधिक कीमत पर खरीदी की गई।

- खंभों पर लगाई एलईडी का मेंटेनेंस पांच साल तक करना था, पर नहीं किया गया। खराब एलईडी को 48 घंटे में बदलने की शर्त टेंडर में थी, मगर इसका पालन नहीं किया गया।

- कई लाइट खंभों पर से गायब हैं। खंभों पर लगी और स्टोर में रखी लाइट का हिसाब नहीं है।

- सड़कों को रोशन करने के लिए 3.50 करोड़ रुपये में नोएडा की एचपीएल कंपनी से 120 वाट की 8000 और 150 वॉट की 3300 एलईडी लाइट खरीदी थी।

- 120 वॉट की एलईडी की कीमत 18090 रुपये और 150 वॉट की एलईडी की कीमत 22500 रुपये प्रति नग थी।

इनका कहना है

शौचालय मामले में प्रारंभिक जांच में अब तक जो सबूत प्राप्त हुए हैं, उनके आधार पर चालान कोर्ट में पेश नहीं किया जा सकता।

- अजय कैथवास, जांच अधिकारी

सिंहस्थ में शौचालय निर्माण और लाइट खरीदी संबंधित प्रकरण की जांच जारी है। लॉकडाउन और कोरोना आपदा के कारण जांच प्रभावित हुई है। जल्द पूरी कर लेंगे।

- दिलीप सोनी, एसपी, ईओडब्ल्यू, उज्जैन

Posted By: Nai Dunia News Network

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