राजेश वर्मा, उज्जैन (नईदुनिया), Sawan 2021। यदि आपको देश के अलग-अलग प्रांतों, वनखंडों में स्थापित भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन व पूजन का फल एक साथ चाहिए, तो मध्य प्रदेश की धर्मनगरी उज्जैन चले आइए। वस्तुत: राजाधिराज ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर की इस नगरी में महाकाल वन में स्थित चौरासी महादेव व शिवलिंगों की कथाएं शिव-पार्वती के संवाद का ही विस्तार रूप हैं। मान्यता है कि महाकाल वन के इन शिवलिंगों के दर्शन से 12 ज्योतिर्लिंग के पूजन का फल मिलता है। तीनों लोकों में उज्जैन का महाकाल वन शिव साधना का हृदय स्थान माना गया है। महाकाल की इस नगरी में कई दिव्य व अद्भुत शिवलिंग विराजित हैं। महर्षि वेद व्यास द्वारा रचित स्कंद पुराण के अवंतिखंड में इनकी महिमा का गुणगान किया गया है।

केदारनाथ की तरह विराजित हैं केदारेश्वर महादेव

महाकाल वन के चौरासी महादेवों में से 67वें क्रम पर आने वाले श्री केदारेश्वर महादेव का मंदिर मोक्षदायिनी शिप्रा के पुराने पुल के नजदीक स्थित है। इस मंदिर में भगवान केदारेश्वर महादेव उत्तराखंड में स्थित श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग की तरह महिष रूप में विराजित हैं। श्रावण मास में जो भक्त केदारनाथ नहीं जा पाते, वे इस मंदिर में केदारेश्वर महादेव के दर्शन करने आते हैं।

शिव निर्माल्य लांघने के दोष से मिलती है मुक्ति

शास्त्रों में शिव को अर्पित सामग्री जिसे निर्माल्य कहा जाता है, उसे लांघना महा पाप बताया गया है। इसके दोष की निवृत्ति के लिए भगवान नाग चंद्रेश्वर के दर्शन का विधान है। चौरासी महादेव में 19वें क्रम पर आने वाले भगवान श्री नाग चंद्रेश्वर का मंदिर उज्जैन के पटनी बाजार में स्थित है। द्वादश ज्योतिर्लिंग व चारधाम की यात्रा करने वाले भक्त यहां निर्माल्य लंघन दोष की निवृत्ति के लिए दर्शन करने आते हैं।

एक ही शिला पर चौरासी महादेव व द्वादश ज्योतिर्लिंग

मोक्षदायिनी शिप्रा के रामघाट पर धर्मराज का पुराण प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में एक शिला पर महाकाल वन में विराजित चौरासी महादेव एक साथ विद्यामन हैं। एक अन्य शिला पर द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन होते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन-पूजन करने से भक्तों को एक साथ बारह ज्योतिर्लिंग व चौरासी महादेव के दर्शन का पुण्य फल प्राप्त होता है।

एक शिवलिंग में 12 ज्योतिर्लिंग

महाकाल मंदिर के समीप स्थित बड़े गणेश मंदिर में अद्भुत शिवलिंग विराजित है। ज्योतिर्विद पं. आनंदशंकर व्यास के अनुसार इस एक शिवलिंग में 12 ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं। इसका पूजन करने से भक्तों को एक साथ 12 ज्योतिर्लिंग के पूजन का फल प्राप्त होता है। श्रावण में पूरे माह शिव सहस्त्रनामावली से शिवलिंग का अभिषेक व बिल्व पत्र का अर्पण किया जाता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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