Adhik Maas 2020: उज्जैन(नईदुनिया प्रतिनिधि)। अश्विन अधिक मास की शुरुआत हो गई है। एक माह तक श्रद्घालु नौ नारायण, सप्त सागर व चौरासी महादेव मंदिरों में दर्शन, पूजन के लिए आएंगे। हालांकि शुरुआती दो दिनों में तीर्थ पर भक्तों की संख्या कम है। तीर्थ पुरोहितों के अनुसार अश्विन अधिक शुक्ल पक्ष में आस्थावानों की संख्या बढ़ेगी।

पुराण प्रसिद्घ अवंतिका को पुरुषोत्तम धाम की मान्यता है। अधिकमास में अवंतिका तीर्थ में आराधना व दान पुण्य करने से महाफल की प्राप्ति होती है। इसी मान्यता के चलते प्रत्येक तीन वर्ष में आने वाले अधिकमास के समय देशभर से श्रद्घालु यहां तीर्थाटन के लिए आते हैं। उज्जयिनी में अधिकमास के दौरान नौ नारायण, चौरासी महादेव व श्रीकृष्ण मंदिरों में दर्शन तथा सप्त सागरों के पूजन का विधान है। प्रत्येक सागर में दान की अलग-अलग महिमा है। मान्यता है कि इसी के अनुसार भक्तों को पुण्य फल प्राप्त होता है।

पुष्टिमार्गीय मंदिरों में विभिन्न मनोरथ के दर्शन

पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय में अधिकमास का विशेष महत्व है। वैष्णवजन साल भर के उत्सव इस एक माह में मनाते हैं। प्रतिदिन भगवान के अलग-अलग मनोरथ के दर्शन होते हैं। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते मंदिरों में केवल दो मनोरथ के दर्शन कराए जा रहे हैं। मंदिरों में प्रवेश के समय कोराना नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

राधा रूप में सजेंगे गोपालजी

सिंधिया देव स्थान ट्रस्ट के प्रसिद्ध गोपाल मंदिर में अश्विन अधिकमास उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। पुजारी पं.अर्पित जोशी ने बताया अधिकमास के कृष्ण व शुक्ल पक्ष की दोनों एकादशी पर गोपालजी का राधा रूप में श्रृंगार होता है। साथ ही राधाजी का श्रृंगार श्रीकृष्ण रूप में किया जाता है। मंदिर में ट्रस्ट व भक्तों की ओर से अलग-अलग दिन अन्नकूट लगाया जाएगा।

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