उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। औषधीय गुणों के कारण डेढ़ साल में अश्वगंधा की मांग देश-विदेश में काफी बढ़ी है और मालवा की मिट्टी और जलवायु अश्वगंधा की खेती के लिए उपयुक्त है। इस लिहाज से इस सीजन में यहां के 20 किसानों ने अश्वगंधा की फसल लेने को बोवनी की है। इनमें बड़नगर तहसील के गांव अजड़ावदा के किसान योगेंद्र कौशिक का नाम भी शामिल है। ये वो किसान हैं जिन्होंने साल-2014 में मध्य प्रदेश सरकार से श्रेष्ठ किसान पुरस्कार पाया था।

मालूम हो कि अश्वगंधा एक कैश क्राप है, जिससे मोटी कमाई होती है। अश्वगंधा एक अद्धितीय गंध और ताकत बढ़ाने की क्षमता रखनेवाला पौधा होता है। यह महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी होता है। इससे कई दवाइयां बनाई जाती है। अश्वगंधा का वानस्पतिक नाम विथिनिया सोम्निफेरा है। इसके फल के बीज, पत्ते, छाल, डंठल और जड़ों को बेचने से अच्छी खासी आय होती है।

उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक सुभाष श्रीवास्तव ने बताया कि अश्वगंधा की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार योजना भी चला रही है। अभी दो दिन पहले कृषि उत्पादन आयुक्त शैलेंद्रसिंह ने एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में कहा था कि उन्होंने उज्जैन संभाग के भ्रमण में किसानों से चर्चा में पाया कि मालवा की मिट्टी और जलवायु अश्वगंधा की खेती के लिए उपयुक्त है। अश्वगंधा की खेती कर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं।

आलू, प्याज, लहसून, मटर में ज्यादा रुझान

अफसरों का कहना है कि उज्जैन जिले में अश्वगंधा की खेती के लिए अनुकूलता तो है मगर यहां मेडिसिन प्लांट न होने से इसकी खेती करने में रूचि कम है। हां, इसकी जगह यहां के किसान आलू, प्याज, लहसुन और मटर की बोवनी करते हैं और अच्छा खासा इसमें भी मुनाफा कमाते हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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