- प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को नुकसान से बचने और अपना सामान खुद हटा लेने के लिए तीन दिन की मोहलत दी

उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। उत्तम नगर के सामने 130 करोड़ रुपये की खाली पड़ी 3.084 हेक्टेयर शासकीय जमीन पर बुधवार को प्रशासन ने कब्जा ले लिया। तहसीलदार अभिषेक शर्मा और पूर्णिमा सिंघी ने जमीन पर बोर्ड लगाया, जिस पर लिखा कि यह भूमि सर्वे क्रमांक 1736 रकबा 3.083 हेक्टेयर मप्र शासन की भूमि है। इस पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण करने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं, तहसीलदारों ने जमीन पर तने केरोसीन, बारदान, टायर के गोदाम, सिनेटरी पाइप फैक्ट्री और कुछ आवासीय मकानों को हटाने के लिए जेसीबी चलाना शुरू की। मगर प्रभावित परिवार एकत्र हो गए और नुकसान से बचने को अपना सामान खुद हटा लेने को सात दिन की मोहलत मांगी। इस पर तीन दिन की मोहलत मिली। कहा कि तीन में अपना सामान हटाए, वरना प्रशासन अब सख्ती से कार्रवाई करेगा।

मालूम हो कि दो दिन पहले ही सेशन कोर्ट ने जमीन को शासकीय करार देते हुए गुड़गांव हरियाणा के योगेश गुप्ता के उस दावे को निरस्त कर दिया था, जिसमें वे जमीन को अपना बता रहे थे। जमीन शासकीय है, ये प्रमाणित करने को प्रमाण स्वरूप जो महत्वपूर्ण दस्तावेज तहसीलदार पूर्णिमा सिंघी, पटवारी मनोज तिवारी और सहायक जिला आबकारी अधिकारी रामहंस पचौरी ने प्रस्तुत किए थे, उसे मान्य कर जमीन को शासकीय घोषित करार दिया था। जबकि योगेश गुप्ता ने जमीन निजी बताने को कोर्ट में जो नगर निगम की संपत्तिकर की रसीदें, कस्टम विभाग की एनओसी को अमान्य किया था।

कई निर्माण कर लिए

जमीन, पूर्व मंत्री और मौजूदा विधायक पारस जैन के बंगले से कुछ ही दूरी पर स्थित है। जिस पर कुछ लोगों ने मकान बनाकर किराये से चढ़ा रखे हैं। कुछ लोगों ने बारदान, केरोसीन, टायर रिमोल्डिंग का गोदाम और पाइप फैक्ट्री, प्रिंटिंग प्रेस भी तान रखी है। याद रहे कि ये जमीन कस्टम विभाग कारखाना के रूप में शासकीय अभिलेखों में दर्ज है, तथा इसमें आइस फैक्टरी, गणेश जिनिंग फैक्टरी होने का भी लेख है। सर्वे नंबर 1736 वर्ष 1950 के खसरे से आज तक शासकीय भूमि रही है तथा कस्टम कारखाने के नाम से दर्ज रही है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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