उज्जैन/भोपाल। नईदुनिया प्रतिनिधि। Ayushman Bharat Scheme आयुष्मान भारत योजना की राशि के लिए महिलाओं का जबरन ऑपरेशन कर यूट्रस (गर्भाशय) निकालने के मामले में मध्य प्रदेश के उज्जैन के गुरुनानक अस्पताल के डायरेक्टर के खिलाफ एफआईआर की तैयारी है। मामले में गठित जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा जरूरत नहीं होने पर भी महिलाओं के गर्भाशय निकाले गए। आयुष्मान भारत के सीईओ जे. विजय कुमार ने ज्वाइंट डायरेक्टर उज्जैन की रिपोर्ट पर अवैध इलाज करने, धोखाधड़ी और फर्जी रिकॉर्ड तैयार करने का केस दर्ज करवाने के निर्देश दिए हैं।

मामला दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में सामने आया था। अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगा था कि उसने आयुष्मान भारत योजना की राशि के लिए 99 दिनों में 539 महिलाओं के गर्भाशय निकाले। इसमें कई गैर जरूरी ऑपरेशन शामिल हैं। योजना की मॉनिटरिंग करने वाली नेशनल हेल्थ एजेंसी ने यह धांधली पकड़ी थी।

इधर, गुरुनानक अस्पताल के निदेशक डॉ. उमेश जेठवानी के अनुसार, आयुष्मान भारत योजना के तहत सारी कार्रवाई ऑनलाइन की जाती है। सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयुष्मान योजना की ओर से सहमति पत्र मिलते हैं। मरीज की अस्पताल से छुट्टी होने के बाद भुगतान की प्रक्रिया होती है। महिलाओं के ऑपरेशन से संबंधित दस्तावेजों में अनियमितताएं नहीं की गई।

जबलपुर के मेट्रो हॉस्पिटल में मरीजों से ज्यादा वसूली

जबलपुर के मेट्रो हॉस्पिटल में भी गड़बड़ी की शिकायत मिली है। अस्पताल ने कई मरीजों से योजना में तय पैकेज की राशि लेने के बावजूद ऊपर से भी पैसे लिए। कई मरीजों ने इसकी शिकायत स्टेट हेल्थ एजेंसी से की है। आयुष्मान भारत योजना की कार्यपालन अधिकारी सपना एम. लोवंशी ने बताया कि अस्पताल पर कार्रवाई को लेकर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। इसमें अस्पताल पर जुर्माना लगना तो तय है। एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है।

इसके अलावा जबलपुर संभाग के एक जिले में करीब महीने भर पहले एक अस्पताल के आयुष्मान मित्र द्वारा करीब 60 मरीजों का गलत तरीके से आयुष्मान कार्ड बनाने का मामला भी सामने आया है। इस संबंध में जब अस्पताल प्रबंधन से बात की गई तो प्रबंधन ने कहा कि उस आयुष्मान मित्र को पहले ही अस्पताल से निकाला जा चुका है। जितने भी आयुष्मान कार्ड उस अस्पताल ने बनाए थे, सभी निरस्त कर दिए गए हैं। बता दें कि प्रदेश में यह योजना 23 सितंबर 2018 में शुरू हुई थी। तब से अब तक इस योजना के तहत करीब दो लाख मरीजों का इलाज किया जा चुका है।

Posted By: Hemant Upadhyay