उज्जैन। शनैश्चरी अमावस्या पर नहान में आई परेशानी के बाद कमलनाथ सरकार की नाराजगी झेल रहा जिला प्रशासन मकर संक्रांति (15 जनवरी) के स्नान में कोई भी चूक नहीं रखना चाहता। कार्रवाई स्वरूप नर्मदा का जल तो मांगा ही है, वैकल्पिक इंतजाम भी किए जा रहे हैं। गऊघाट में जमा खान का गंदा पानी लिफ्ट कर त्रिवेणी घाट पर लिफ्ट किया जा रहा है। दूसरी ओर रामघाट पर गंभीर का 7 एमसीएफटी पानी लाया जा रहा है। ऐसे में अगर समय पर नर्मदा का पानी नहीं आया या कम आया तो भी श्रद्घाल शिप्रा नदी में अच्छे से स्नान कर पाएंगे।

शनैश्चरी अमावस्या पर त्रिवेणी पर नर्मदा का जल नहीं पहुंचा था। इस पर श्रद्घालुओं को डबरी में भरे गंदे पानी में स्नान करना पड़ा था। कई लोग तो सिर्फ आचमन कर वापस लौट गए थे। इस पर प्रदेश की नई कांग्रेस सरकार की खासी किरकिरी हुई थी। भाजपा ने सरकार को निशाने पर ले लिया था। राजनीति शुरू होते ही सरकार एक्शन में आई और जांच रिपोर्ट तलब कर ली। जांच पूरी होती इससे पहले ही तत्कालीन संभागायुक्त एमबी ओझा और कलेक्टर मनीष सिंह को उज्जैन से रवाना कर दिया गया। नए संभागायुक्त के रूप में अजीत कुमार और कलेक्टर के रूप में शशांक मिश्रा को पदस्थ किया। दोनों ही अफसर जिले की सरकारी मशीनरी के साथ अब पर्व स्नान की तैयारी में जुटे हुए हैं। अफसर कोई कसर बाकी नहीं रखना चाहते। इसी कड़ी में नर्मदा का जल जल्द उज्जैन लाने के लिए बुधवार को उज्जैन संभागायुक्त ने इंदौर के जलोदा बेराज के गेट खुलवाए। वहां के किसानों ने अपने खेत सींचने के लिए गेट लगा रखा था। इधर, उज्जैन में त्रिवेणी पर सूखी शिप्रा नदी में जल लाने के लिए गऊघाट से पानी मोटरों की मदद से लिफ्ट कर डाला जा रहा है। इससे संक्रांति पर त्रिवेणी पर भी श्रद्घालु स्नान कर सकेंगे। वहीं रामघाट पर नहान के लिए गंभीर से पानी छोड़ा जा रहा है। 7 एमसीएफटी पानी रामघाट पर छोड़ा जाएगा। इससे आसानी से लोग यहां स्नान कर सकेंगे। बता दें कि उज्जैन शहर में एक दिन जलप्रदाय पर 7 एमसीएफटी पानी खर्च होता है। यानी पेयजल के लिए आरक्षित गंभीर नदी के जल को अगर लिया भी जा रहा है तो चिंता की कोई बात नहीं। गंभीर में अभी 6 माह का पानी शेष है। इसके अतिरिक्त नर्मदा का जल शिप्रा में आने पर उसे भी पेयजल के रूप में लिया जा सकेगा।

त्रिवेणी पर स्नान कराने में 20 लाख का खर्च

त्रिवेणी पर श्रद्घालुओं को स्नान कराने के लिए प्रशासन 20 लाख रुपए खर्च करने जा रहा है। यह राशि गऊघाट में जमा शिप्रा के पानी को मोटर की मदद से लिफ्ट कर त्रिवेणी घाट पर पहुंचाने में खर्च हो रही है। इस कार्य को अंजाम देने के लिए पीएचई सहित नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की टीम जुटी है। मालूम हो कि मकर संक्रांति का स्नान करने के लिए सामान्यतः श्रद्घालु रामघाट पर जुटते हैं, जहां वर्तमान में पानी गंदा है।

गंभीर में 180 दिन जलप्रदाय का पानी, 15 जनवरी के बाद उज्जैन में एक दिन छोड़कर जल प्रदाय

गंभीर जलाशय में बुधवार को 1180 एमसीएफटी पानी था। डेड स्टोरेज का 100 एमसीएफटी पानी छोड़ दें तो 6 एमसीएफटी प्रतिदिन खपत के मान से 180 दिन सप्लाई करने जितना। यानी जून तक जल सप्लाई के लिए गंभीर में पर्याप्त पानी है, बावजूद नगर निगम 15 जनवरी के बाद एक दिन छोड़कर जल प्रदाय की तैयारी में है। महापौर परिषद से मंजूरी मिल चुकी है, अब सिर्फ नगर निगम आयुक्त के आदेश का इंतजार है।

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पहले और अब : सप्ताहभर भरा था यहां पानी, अब है यह हाल

फोटो त्रिवेणी ब्रिज स्थित शिप्रा नदी का है, जहां सप्ताहभर पहले पानी भरा था, लेकिन खेतों की सिंचाई के लिए पानी किसानों द्वारा ले लिए जाने से शिप्रा दम तोड़ती नजर आ रही है।

प्रशासन का किसानों को मैसेज... हटा लें मोटरें, वरना जब्त कर लेंगे

एनवीडीए की शिकायत के बाद प्रशासन ने सोमवार को किसानों को मोबाइल पर मैसेज जारी किया। मैसेज में लिखा कि वे अपनी मोटरें नदी से हटा लें, वरना जब्त कर ली जाएंगी। मैसेज मिलने के बाद किठोदा, आलमपुर उड़ाना सहित आसपास के गांव के कुछ किसानों ने तो मोटर हटा ली, लेकिन कुछ ने नहीं हटाई। किसानों का कहना रहा कि अगर खेतों में सिंचाई नहीं की तो फसल सूख जाएगी। इससे भारी नुकसान होगा।