उज्जैन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। ढाई दशक पहले बंद हुई बिनोद मिल की 22,245 वर्ग मीटर जमीन नीलाम करने को लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग ने एक बार फिर अधिसूचना जारी की है। इस बार जमीन का रिजर्व मूल्य 91 करोड़ 3 लाख रुपये रखा है। इसके पहले दो बार निकाली अधिसूचना में रिजर्व मूल्य 72 करोड़ 61 लाख रुपये रखा था। यानी 6 महीने में जमीन की कीमत 18 करोड़ 42 लाख रुपये बढ़ गई है। कहा गया है कि डेवलपर्स, बिल्डर और निवेशकों के लिए ये अच्छा मौका है। वे 23 अक्टूबर से 10 नंवबर तक निविदा प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं। 28 अक्टूबर को प्रतिभागियों को जमीन का स्थल निरीक्षण कराया जाएगा। बिड जमा करने की प्रारंभिक तिथि 1 नवंबर है।

मालूम हो कि मध्यप्रदेश की सरकार जमीन बेचकर बिनोद मिल के 4353 मजदूरों या उनके वारिसों को उनका बकाया पैसा देना चाहती है। इसके लिए वह इस साल पहले भी दो बार जमीन नीलाम करने को अधिसूचना जारी कर चुकी है। पहली अधिसूचना जनवरी-2021 में और दूसरी अधिसूचना मई-2021 में निकाली थी। जमीन नीलाम करने को पहले अपनाई प्रक्रिया में शासन ने गुजरात के पीयूष सेठ द्वारा 75 करोड़ रुपये में जमीन खरीदने के टेंडर प्रस्ताव को निरस्त कर दिया था। दूसरी बार की प्रक्रिया नीलामी की तारीख 18 जून से एक दिन पहले प्रक्रिया को निरस्त कर दिया था। अब तीसरी बार निविदा निकाली गई है और वो भी रिवर्ज मूल्य बढ़ाकर। याद रहे कि वर्ष- 1996 में कपड़ा बनाने वाली बिनोद मिल बंद हो गई थी। इसके अगले ही साल मजदूर अपना बकाया भुगतान पाने को कोर्ट में चले गए थे। साल-2017 में हाईकोर्ट ने और फिर फरवरी- 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने मजदूरों के हक में फैसला सुनाया था।

आठ महीने पहले ही मिल जाना था पैसा

मिल मजदूरों ने नईदुनिया को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार आठ महीने पहले ही मिल मजदूरों को उनके हक का पैसा मिल जाना था। कोर्ट का फैसला था कि राज्य सरकार दो साल के भीतर बिनोद मिल की जमीन बेचकर मजदूरों को उनकी बकाया राशि का भुगतान 4 फीसद ब्याज के साथ करें। तब जमीन की कीमत 9 अरब रुपये आंकी गई थी। जोड़-घटाव के बाद श्रमिकों का हिसाब 97 करोड़ रुपये का बना था, जो 4 हजार से अधिक श्रमिकों एवं उनके आश्रितों को मिलना है। क्योंकि करीब आधे श्रमिकों की मृत्यु हो चुकी है। श्रमिकों के स्वत्वों के भुगतान के संबंध में उच्च न्यायालय के निर्णय अनुसार मिल की 18.018 हेक्टेयर जमीन का आधिपत्य राज्य शासन को सौंपा गया है। कायदे से राशि श्रमिकों को 27 फरवरी 2021 से पहले मिल जाना थी, पर आज तक नहीं मिली। शासन जमीन का कुछ हिस्सा नीलम कर श्रमिकों को पैसा देना चाहता है, पर इसके लिए अब तक नीलामी नहीं हो पाई है। अब देखना है कि मजदूरों को कब उनके हक का पैसा मिलता है। मजदूर संघ के अनुसार हर एक श्रमिक के खाते में 2 से तीन लाख रुपये तक आने का अनुमान है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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